संत सम्मेलन में बीजेपी का गहलोत पर सीधा हमला, कांग्रेस सरकार को बताया साधु विजयदास की मौत का जिम्मेदार

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संत सम्मेलन में बीजेपी का गहलोत पर सीधा हमला, कांग्रेस सरकार को बताया साधु विजयदास की मौत का जिम्मेदार

भरतपुर: अवैध खनन के खिलाफ आत्मदाह करने वाले विजयदास की मौत का जिम्मेदार गुरुवार को प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार को ठहराया गया। राजस्थान के भरतपुर में धार्मिक आस्था से जुड़ी पहाड़ियों में खनन के खिलाफ आंदोलन से आत्मदाह तक सरकार की लापरवाही पर सवाल उठाए गए। यह आरोप बीजेपी नेताओं ने भरतपुर के पसोपा गांव में आयोजित संत सम्मेलन में लगाए। विजय दास को श्रद्धांजलि देने पहुंचे नेताओं ने बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी थे। यहां बीजेपी नेताओं ने संत की मौत के लिए कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार बताया।

कांग्रेस ने संज्ञान नहीं लिया, लोगों की आस्था पर प्रहार होता रहा- पूनियां
सतीश पूनियां ने कहा कि इस पूरे इलाके में जो धार्मिक आस्था का प्रतीक है वहां वैध और अवैध खनन होता रहा और लोगों की आस्था पर प्रहार होता रहा। इस मामले को लेकर साधु संतों का 550 दिनों से धरना था लेकिन राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने इसे संज्ञान में नहीं लिया। जिसका परिणिति बाबा विजय दास के आत्मदाह से हुई। भाजपा साधु-संतों और धार्मिक भावनाओं व साधु-संतों के नैतिक पक्ष के साथ खड़ी हुई है । धार्मिक आस्था की पहाड़ियों पर खनन कार्य हो रहा था जिस को रोकने की मांग को लेकर साधु संत 550 दिन से धरना दे रहे थे । उन्होंने कहा, संत श्री विजयदास जी ने ब्रज क्षेत्र में प्रकृति और पर्वत को बचाने के लिए पर्वत जैसा बलिदान दिया है, संत श्री विजयदास जी का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। पवित्र भूमि ब्रज चौरासी की रक्षा और संतों के मान-सम्मान के लिए भाजपा प्रदेश में सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती से लड़ाई लड़ेगी।

सरकार खनन गिरोह के साथ है। बलिदानी संत की आवाज अब हम बुलंद करेंगे- गजेंद्र सिंह
जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि संतों का मामला कोई राजनैतिक विषय नहीं है। यह धार्मिक मान्यता और जन भावना के उलंघन का विषय है। उन्होंने कहा, सरकार खनन गिरोह के साथ है। बलिदानी संत की आवाज अब हम बुलंद करेंगे। यही जनभावना है। धार्मिक प्रतिवद्धताओं से जुड़े पहाड़ों का सर्वनाश किया जा रहा था। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी जब कार्रवाई नहीं हुई। संतों और स्थानीय लोगों के साथ विश्वासघात हो रहा था। उन्हें पुलिस के की ओर से दबाया जा रहा था। तब संतों ने विश्वासघात से आहत होकर 14 संतों ने आत्मदाह की चेतावनी दी थी। लेकिन यह गूंगी, अंधी और बहरी सरकार चेती नहीं। और आखिर में संत के शरीर की लपटों और उसके मुंह से निकलती हुई राधे-राधे की चीख के बाद सरकार जागी। पिछले 9 या 10 महीने से यह काम नहीं हो रहा था। जबकि 9 महीने में तो बच्चा पैदा हो जाता है। एक फाइल पर साइन करने लोगों को तड़पा रहे थे। खनन 10 गुना बढ़ गया था। जो काम 10 महीने में नहीं हुआ वह 24 घंटे में हो गया। इसके पीछे पापी और दोषियों को बख्शा नहीं जाए। इसकी मांग को लेकर जो आंदोलन चल रहा है। संत विजय दास की आत्महत्या के बाद संतों ने FIR दर्ज करवाने की कोशिश की वह नहीं की जा रही है। लेकिन भारत के संविधान ने इतनी ताकत दी है अभी कोर्ट का भी रास्ता है। राजस्थान की सरकार जिस तरह से तुष्टिकरण कर रही है। करौली, भीलवाड़ा जोधपुर में जिस तरह की परिस्थितियां बनी। उदयपुर में गला रेत दिया गया, और भरतपुर में जिस तरह गला रेत दिया गया। उसके बाद भी क्या राजस्थान की सरकार हिन्दू की आवाज कोई राजनीतिक दल या जन प्रतिनिधि नहीं उठाए। इसका जवाब राजस्थान के मुखिया को देना चाहिए।

सभी भाजपा नेता पहुंचे थे पसोपा गांव
जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और सतीश पूनिया पसोपा गांव के पशुपति नाथ मंदिर में पहुंचे। यह वहीं पशुपति नाथ मंदिर है जिसके महंत बाबा विजय दास थे। और उन्होंने खनन के बीच चल रहे धरने के बीच आत्मदाह कर ली। गुरुवार को पशुपति नाथ मंदिर में संत सम्मेलन का कार्यक्रम था। इस दौरान प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां, अलवर सांसद बाबा बालक नाथ, सीकर सांसद सुमेधानंद, सवाईमाधोपुर सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया, भरतपुर सांसद रंजीता कोली पहुंचीं। सभी ने बाबा विजय दास की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

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