वैश्विक उर्वरक आपूर्तिकर्ता भारत को दें तरजीह, पर गुटबंदी बर्दाश्त नहींः मांडविया

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वैश्विक उर्वरक आपूर्तिकर्ता भारत को दें तरजीह, पर गुटबंदी बर्दाश्त नहींः मांडविया

नयी दिल्ली, सात दिसंबर (भाषा) ऊंची वैश्विक दरों के कारण चालू वित्त वर्ष में उर्वरक सब्सिडी के उछलकर 27 अरब डॉलर तक पहुंचने की आशंका के बीच सरकार ने बुधवार को वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं से भारत को तरजीह देने का अनुरोध करते हुए कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी के लिए गुटबंदी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भारत उर्वरकों के साथ-साथ उसके कच्चे माल का एक प्रमुख आयातक देश है। यह घरेलू मांग को पूरा करने के लिए करीब 90 लाख टन यूरिया का आयात करता है। बड़ी मात्रा में डीएपी और एमओपी का भी आयात किया जाता है।

रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया ने ‘फर्टिलाइजर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (एफएआई) के एक सम्मेलन में कहा कि किसानों को सस्ती कीमत पर उर्वरक मुहैया कराने के लिए सरकार ने कई सुधार किए हैं और सब्सिडी भी बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि सरकार आत्मनिर्भर बनने के प्रयासों के तहत नैनो तरल यूरिया और नैनो डीएपी जैसे वैकल्पिक उर्वरकों को भी बढ़ावा दे रही है।

उन्होंने उर्वरकों की वैश्विक कीमतों में तेज उछाल के कारण सरकार के उर्वरक सब्सिडी खर्च में वृद्धि पर भी चिंता जताते हुए कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक बाजार में जो कुछ भी हुआ वह अनुचित और सही नहीं था।

उन्होंने कहा कि सरकार ने बगैर किसी रुकावट के उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारतीय उर्वरक कंपनियों और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के बीच ऐसे कई समझौतों और समझौता ज्ञापनों को अंजाम दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘यह वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं के लिए भारत जैसे बड़े बाजार की गतिशीलता को समझने और हमें तरजीह देने का उपयुक्त समय है।’’

हालांकि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार आने वाले समय में उर्वरक कंपनियों की गुटबंदी को बर्दाश्त करने के बजाय निश्चित रूप से निष्पक्ष और स्पष्ट भागीदारों का चयन करेगी।

मांडविया ने भारतीय फर्मों के साथ साझेदारी करने के अलावा वैश्विक कंपनियों को भारत में उर्वरक निर्माण संयंत्र और भंडारण इकाई स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया।

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले तीन वर्षों में हमने उर्वरकों और कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि देखी है। हमारी सरकार ने कई सुधार किए हैं और यह सुनिश्चित किया है कि भारतीय किसानों को खाद सस्ती कीमत पर उपलब्ध हों। इसके लिए वर्ष 2019-20 में 10 अरब डॉलर रही उर्वरक सब्सिडी को बढ़ाकर चालू वित्त वर्ष में लगभग 27 अरब डॉलर कर दिया गया है।’’

मांडविया ने कहा कि देश वर्ष 2025 तक यूरिया के मामले में आत्मनिर्भर हो जाएगा क्योंकि सरकार कई बंद संयंत्रों को फिर से चालू कर रही है। फिलहाल, देश का यूरिया (पारंपरिक) उत्पादन 260 लाख टन है, जबकि स्थानीय मांग को पूरा करने के लिए लगभग 90 लाख टन का आयात किया जाता है।

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