वेब सीरी रिव्‍यू: बेहतर हो सकती है, अच्‍छी बनकर रह गई काजोल की ‘द ट्रायल’

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वेब सीरी रिव्‍यू: बेहतर हो सकती है, अच्‍छी बनकर रह गई काजोल की ‘द ट्रायल’

वेब सीरी रिव्‍यू: बेहतर हो सकती है, अच्‍छी बनकर रह गई काजोल की ‘द ट्रायल’

‘द ट्रायल’ वेब सीरीज की कहानी

काजोल की वेब सीरीज ‘द ट्रायल’ बीते कुछ समय से लगातार चर्चा में है। यह सीबीएस के हिट शो ‘द गुड वाइफ’ पर आधारित है। कहानी नोयोनिका सेनगुप्ता (काजोल) की है, जिसका पति एक सेक्स स्कैंडल का आरोपी है और जेल में बंद है। अपने पति के लिए नोयोनिका वकालत की प्रैक्टिस करने लगती है। लेकिन क्या कोर्टरूम में लड़ाई लड़ते हुए वह अपनी बिखरी हुई जिंदगी को वापस पटरी पर ला पाएगी? ‘द ट्रायल’ इसी की बानगी है।

‘द ट्रायल’ वेब सीरीज का ट्रेलर

‘द ट्रायल’ वेब सीरीज रिव्‍यू

डायरेक्‍टर सुपर्ण वर्मा ने दूसरे कानूनी कोर्टरूम ड्रामा से उलट ‘द ट्रायल – प्यार, कानून, धोखा’ सिर्फ एक जटिल मामले को सुलझाने वाली कहानी पर नहीं बुनी गई है। इसके बजाय, यह सीरीज हमें नोयोनिका सेनगुप्ता जिंदगी की गहराई में गोते लगाने का मौका देती है। वह किसी समय एक बेहतरीन वकील रह चुकी है। लेकिन फिर उसकी जिंदगी में एक ऐसी घटना घटती है, जो उसे फिर से अपने करियर को नए सिरे से शुरू करने की यात्रा पर लेकर जाती है। एक वकील के रूप में अपने पहले की कामयाबी को भुलाकर नोयोनिका अपने दोस्त विशाल (एली खान) के एक पॉपुलर लॉ फर्म में सबसे जूनियर पद पर नौकरी शुरू करती है। जैसे ही उसके पति का हाई-प्रोफाइल मामला सुर्ख‍ियों में आता है, नोयोनिका अपने पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ के बीच नाजुक संतुलन बनाने की कोश‍िश करती है।

राइटर अब्बास दलाल, हुसैन दलाल, सिद्धार्थ कुमार और डायरेक्‍टर सुपर्ण वर्मा की टीम ने ‘द ट्रायल’ के जरिए मौजूदा न्यायिक प्रणाली, टीवी पत्रकारों की भूमिका और एक पॉपुलर लॉम फर्म के काम करने के तरीके को व्‍यांगत्‍मक अंदाज में दिखाया है। कोर्टरूम से लेकर घर के लिविंग रूम तक एक बड़े तबके से आने वाले पति-पत्नी की लड़ाई को र‍ियलस्‍ट‍िक तरीके से पर्दे पर रखा गया है।

‘द ट्रायल’ में काजोल

हालांकि, कहानी में जरूरी गहराई और गंभीरता की कमी खलती है। जबकि स्‍क्रीनप्‍ले भी घिसी-पिटी बातों और रूढ़ियों का शिकार है। यह एक कई परतों वाली और महीन कहानी हो सकती थी। असल जिंदगी के हाई-प्रोफाइल मामलों जैसे कि रहस्यमय परिस्थितियों में एक्‍टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत, उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती की निंदा, और 5G तकनीक के खिलाफ जूही चावला की जनहित याचिका, जैसे किरदार सीरीज का हिस्‍सा हैं, लेकिन उन्‍हें ढीले-ढाले अंदाज में ही छोड़ दिया गया है।

सीरीज में विवादास्पद मामलों से जुड़े किस्‍से प्‍लॉट का हिस्‍सा हैं। लेकिन शो का फोकस नोयोनिका और उसके संघर्ष पर ज्‍यादा है। काजोल ने एक ‘अच्छी पत्नी’ के रूप में जबरदस्‍त परफॉर्मेंस दी है। जिस गरिमा के साथ वह अपने भीतर मचे उथल-पुथल का सामना करती हैं, वह पर्दे पर बखूबी बयां होती है। उम्र के साथ काजोल की एक्‍ट‍िंग कितनी जबरदस्‍त हो गई है, इसकी झलक हमें देखने को मिलती है। काजोल का संयमित अंदाज शो का मुख्य आकर्षण है। उनके अलावा जिशु सेनगुप्ता, अली खान, शीबा चड्ढा, कुब्रा सैत, किरण कुमार और गौरव पांडे ने भी अपने किरदारों के साथ पूरी तरह से न्‍याय किया है।

‘द ट्रायल’ को देखते हुए आप कई बार यह अंदाजा लगा लेते हैं कि कहानी में आगे क्‍या होने वाला है। क्‍लाइमेक्‍स की ओर बढ़ते ही कहानी सुविधाजनक मोड़ लेती है, लेकिन स्‍क्रीनप्‍ले में कुछ ऐसे मौके भी हैं, जो आपको चौंका देते हैं। हालांकि, इस शानदार स्टारकास्ट के साथ इस तरह के लीगल ड्रामा के ग्राफ को और बेहतरीन बनाया जा सकता था।

क्‍यों देखें- कोर्टरूम ड्रामा, कानूनी दांव पेच में दिलचस्‍पी रखते हैं, काजोल की बेहतरीन एक्‍ट‍िंग के दीवाने हैं तो यह सीरीज आपके लिए है।