विश्वविद्यालयों की फर्जी डिग्रियां बांटने वाला गैंग का खुलासा, पांच गिरफ्तार, पढ़िए इनके कारनामें

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विश्वविद्यालयों की फर्जी डिग्रियां बांटने वाला गैंग का खुलासा, पांच गिरफ्तार, पढ़िए इनके कारनामें

विश्वविद्यालयों की फर्जी डिग्रियां बांटने वाला गैंग का खुलासा, पांच गिरफ्तार, पढ़िए इनके कारनामें


राजस्थान में फर्जी डिग्री डिप्लोपा गैंग का पर्दाफाश हुआ है। इस गैंग का सरगना सहित पांच आरोपी गिरफ्तार हुए हैं। इनके पास से कुछ बिना नाम की डिग्री, डिग्री तैयार करने का सामान, स्टाम्प सहित अन्य सामान बरामद किया गया है। ये गैंग दूसरे राज्यों से कोर्स के नाम पर फर्जी डिग्री बांटता था।

 

फर्जी डिग्री गैंग का खुलासा
जयपुर: राजस्थान के अलग-अलग जिलों में रहने वाले हजारों युवा हर वर्ष दूसरे राज्यों के विश्वविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों से डिप्लोमा और डिग्रियां करते हैं। इनमें कई ऐसे भी होते हैं जो एजेंट्स के जरिए बैकडेट में एडमिशन लेकर डिप्लोमा डिग्री लेने का प्रयास करते हैं। सरकारी नौकरी की चाह में कई युवा शॉर्टकट रास्ता अपनाते हुए ऐसे गिरोह के चंगुल में फंस जाते हैं, जो बैकडेट में एडमिशन या पुराने बैच का स्टूडेंट बताकर कई तरह के डिप्लोमा और डिग्री देने का दावा करते हैं। जयपुर पुलिस ने एक ऐसे ही गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने हजारों युवाओं के फर्जी तरीके से डिप्लोमा और डिग्रियां बेची है।

इन विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों की फर्जी डिग्रियां बेची

जयपुर की करणी विहार थाना पुलिस ने फर्जी डिग्रियां और डिप्लोमा बेचने वाले गिरोह का खुलासा किया है। थाना प्रभारी लिखमाराम बटेसर ने बताया कि चुरू जिले में स्थित ओपीजेएस यूनिवर्सिटी के विभिन्न कोर्सेज की फर्जी डिग्रियां पिछले कई सालों से बेची जा रही थी। इसी तरह उत्तर प्रदेश के शिकोहाबाद स्थित जेएस यूनिवर्सिटी, महात्मा गांधी एलम यूनिवर्सिटी सिक्किम और मेघायल की शिक्षण संस्थानों की फर्जी डिग्रियां और डिप्लोमा बेचे गए। यह गिरोह पिछले 18-20 साल से इस तरह का काम कर रहे थे। कुछ समय तक तो ये लोग वहां से संपर्क करके युवाओं से रुपए लेकर एडमिशन दिलाते थे। बाद में वहां की डिग्रियों, डिप्लोपा की हूबहू नकल जयपुर में ही तैयार करके बेचने लगे।

ऐसे पकड़ में आया ये गिरोह

कुछ महीनों पहले पुलिस ने वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा में पेपर लीक करने वाले गिरोह का खुलासा किया था। इस गैंग का सूत्रधार भूपेन्द्र सारण था। पुलिस ने भूपेन्द्र सारण के घर पर दबिश दी तो उसके घर से सैंकड़ों की संख्या में फर्जी डिग्रियां और डिप्लोमा, कई विश्वविद्यालयों के लेटरपैड, मोहरें और स्टाम्प मिले थे। कई ऐसी डिग्रियां भी मिलीं, जिनमें किसी का नाम नहीं लिखा था। गिरोह के सदस्य लैपटॉप और कंप्यूटर से विभिन्न सॉफ्टवेयर के जरिए हूबहू दस्तखत करके फर्जी डिग्रियां तैयार करके बेच देते थे। करणी विहार पुलिस ने भूपेन्द्र सारण को गिरफ्तार करके पूछताछ की तो पूरे गिरोह का भंडाफोड़ हो गया।

ये आरोपी आए गिरफ्त में

फर्जी डिग्रियां और डिप्लोमा बेचने वाले गिरोह में करणी विहार पुलिस ने कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पहला आरोपी भूपेन्द्र सारण है, जो जालोक जिले के परावा गांव का रहने वाला है। भूपेन्द्र अपनी पत्नी के साथ जयपुर के रजनी विहार में रहता था, जहां पिछले दिनों पुलिस ने उसके मकान को बुलडोजर से ध्वस्त किया था। दूसरा आरोपी अजय भारद्वाज है, जो गांधी पथ जयपुर का रहने वाला है। तीसरा आरोपी कैलाश सिसोदिया है, जो मूलरूप से मध्यप्रदेश का रहने वाला है और फिलहाल जयपुर के ज्योति नगर में रहता है। चौथा आरोपी अशोक विजय है, जो मूल रूप से कोटा का रहने वाला है और फिलहाल जयपुर में रहता है। पांचवां आरोपी प्रमोद सिंह है, जो मूलरूप से महाराष्ट्र का रहने वाला है और वर्तमान में वह नागौर जिले के कुचेरा कस्बे में रहता है। इन आरोपियों के ठिकानों से पुलिस कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं, जिनमें फर्जी डिग्रियां और डिप्लोमा तैयार करने का पूरा सामान मिला है। (रिपोर्ट- रामस्वरूप लामरोड़, जयपुर)

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