विदेशी बाजारों में गिरावट से स्थानीय तेल-तिलहनों के भाव लुढ़के

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विदेशी बाजारों में गिरावट से स्थानीय तेल-तिलहनों के भाव लुढ़के

नयी दिल्ली, छह जुलाई (भाषा) विदेशी बाजारों में खाद्य तेलों के दाम टूटने के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बुधवार को मूंगफली तेल-तिलहन और बिनौला तेल को छोड़कर सभी तेल-तिलहनों की कीमतें हानि दर्शाती बंद हुईं। मूंगफली तेल-तिलहन और बिनौला तेल के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।

बाजार सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में लगभग चार प्रतिशत तथा शिकॉगो एक्सचेंज में लगभग दो प्रतिशत की गिरावट है जबकि कल रात यह लगभग आठ प्रतिशत टूटा था। विदेशी बाजारों में इस जोरदार गिरावट के कारण सरसों, सोयाबीन तेल-तिलहन, सीपीओ, पामोलीन सहित लगभग सभी तेल-तिलहनों में गिरावट देखने को मिली। जबकि नमकीन बनाने वाली कंपनियों की बिनौला और मूंगफली तेल की मांग होने से इन दोनों तेल-तिलहनों के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।

सूत्रों ने कहा कि सरकार ने बुधवार को खाद्य तेलों की महंगाई के संदर्भ में चर्चा की और कंपनियों से खाद्य तेलों के दाम में और देश में सभी स्थानों पर एक ब्रांड के तेल के दाम समान रखने को कहा है। इस बैठक के बाद खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने कहा कि सरकार के इस प्रस्ताव पर तेल कंपनियों ने अपनी सहमति जताई है। सूत्रों ने दाम में कमी करने के आश्वासन का स्वागत करते हुए कहा कि जिस हिसाब से वैश्विक कीमतों में गिरावट आई है उसे देखते हुए दाम में और यानी लगभग 30-35 रुपये प्रति लीटर कमी किये जाने की संभावना बनती है। लेकिन फिलहाल सरकार को अपनी सतर्कता बनाए रखनी होगी और अपेक्षित परिणाम तभी मिलेंगे जब एमआरपी के संदर्भ में कोई सख्त कानून बने और उसका सख्ती से क्रियान्वयन हो।

सूत्रों ने कहा कि विदेशों में बाजार टूटने से वहां सीपीओ और पामोलीन तेल के भाव लगभग आधे रह गये हैं। सरसों तेल का थोक भाव लगभग 133 रुपये लीटर है और इसका एमआरपी अधिक से अधिक 155 रुपये लीटर होना चाहिये जिसमें फायदा और सारे खर्चे शामिल हैं। इसी प्रकार सोयाबीन डीगम का थोक दाम अधिभार और सारे खर्च एवं मुनाफे सहित 120 रुपये लीटर है जिसका एमआरपी अधिकतम 140-145 रुपये लीटर होना चाहिये। इसी प्रकार पामोलीन तेल का थोक दाम 112 रुपये लीटर बैठता है और इसका एमआरपी अधिकतम 128-130 रुपये लीटर से अधिक नहीं होना चाहिये।

सूत्रों ने कहा कि बैंकों का आयातकों को दिया गया कर्ज डूबने की आशंका बन गई है। हालत यह है कि अब नये आयातकों को बैंक (लेटर आफ क्रेडिट) ऋण साखपत्र जारी नहीं कर रहे हैं। बैंक अब इस तरह का जोखिम लेने से कतरा रहे हैं। बंदरगाहों पर उनके लाखों टन खाद्य तेल की खेप पड़ी है जिसे वे बहुत कम भाव पर छोटे-छोटे खेपों में बेचने को बाध्य हैं। डॉलर मजबूत होने और रुपये की ऐतिहासिक गिरावट से उनकी हालत और पस्त हो चली है।

सूत्रों ने कहा कि खाद्य तेलों के मामले में अनिश्चितता को केवल तेल-तिलहन उत्पादन बढ़ाकर ही दूर किया जा सकता है।

बुधवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 7,210-7,260 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 6,665 – 6,790 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 13,500 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली सॉल्वेंट रिफाइंड तेल 2,595 – 2,785 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 14,400 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,280-2,360 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,320-2,425 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी – 17,000-18,500 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,300 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 12,850 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,550 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 10,550 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 13,700 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 12,400 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 11,300 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 6,100-6,200 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज 5,850- 5,900 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का) 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

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