विजयराघवगढ़ विधानसभा सीट पर पाठक परिवार का राज, कांग्रेस ने तिलिस्म तोड़ने का बनाया प्लान

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विजयराघवगढ़ विधानसभा सीट पर पाठक परिवार का राज, कांग्रेस ने तिलिस्म तोड़ने का बनाया प्लान

विजयराघवगढ़ विधानसभा सीट पर पाठक परिवार का राज, कांग्रेस ने तिलिस्म तोड़ने का बनाया प्लान

कटनी: एमपी (MP Election News) में बीते पांच सालों में बीजेपी और कांग्रेस की सरकार रही है। दोनों ही दल अब चुनावी मैदान में है और इनके दावे अलग-अलग हैं। वहीं, दोनों दल के दावेदार अब अपनी सीटों पर सक्रिय हो गए हैं। बात करेंगे कटनी जिले के सबसे चर्चित विजयराघवगढ़ सीट की है। इस सीट पर अभी बीजेपी का कब्जा है। हालांकि पार्टियों से ज्यादा विजयराघवगढ़ सीट पर एक परिवार का दबदबा रहा है। वह है पाठक परिवार। विजयराघवगढ़ सीट से अभी बीजेपी के संजय पाठक विधायक हैं। वह शिवराज कैबिनेट में मंत्री भी रहे हैं। इस परिवार का तिलिस्म तोड़ना सियासी दलों के लिए बड़ा मुश्किल रहा है। आइए आपको बताते हैं कि इस क्षेत्र का सियासी समीकरण क्या है।

विजयराघवगढ़ से विधायक संजय पाठक हैं, जो पिछले 15 वर्षों से लगातार जीतते आ रहे हैं। हालांकि आगामी विधानसभा चुनाव काफी पेंचीदा नजर आ रहा है क्योंकि यहां बीजेपी के कई नेता छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम चुके हैं। शायद यही कारण है कि मौजूदा विधायक ने अपना दमखम दिखाने के लिए हाल ही में जनादेश के नाम पर निजी वोटिंग कराते हुए सूबे के जिम्मेदारों के समाने अपनी टिकट की दावेदारी ठोक दी है।

विजयराघवगढ़ पर किनका रहा है राज

1967 में विजयराघवगढ़ विधानसभा बना था। विधानसभा बनने के बाद से अब तक कांग्रेस पार्टी के 7 विधायक रहे हैं, इसमें एक उपचुनाव भी शआमिल हैं। वहीं, यहां की जनता ने छह बार बीजेपी को मौक दिया है। विजयराघवगढ़ विधानसभा में सबसे ज्यादा राज पाठक परिवार ने किया है फिर वो चाहे कांग्रेस में रहकर हो या बीजेपी में आकर।

दरअसल, 1993 से 2003 तक सत्येंद्र पाठक कांग्रेस से विधायक रहे। वह एमपी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। बाद में बीजेपी प्रत्याशी रहे कुंवर ध्रुव प्रताप सिंह ने मंत्री सत्येंद्र पाठक को हराते हुए बीजेपी की झोली में जीत डाली थी। हालांकि 2008 के विधानसभा चुनाव में फिर सत्येंद्र पाठक के पुत्र संजय पाठक ने कांग्रेस को जीत दिलवाते हुए पूरे 6 वर्ष राज किया।
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इसके बाद संजय पाठक ने कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिए। उपचुनाव में वह भारी मतों से विजय हुए। साथ ही शिवराज सरकार में मंत्री भी बन गए। पिछले 15 वर्षों में 3 बार के विधायक रहे संजय सत्येंद्र पाठक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खास माने जाते हैं।

जनता का विकास और कांग्रेस के दावेदार

तेज तर्रार और अपनी दबंग छवि के लिए मशहूर विधायक संजय पाठक एक बेहतर व्यवसायी हैं। यही वजह है कि वह प्रदेश के सबसे अमीर विधायक हैं। विजयराघवगढ़ के बुजुर्ग उन्हे बेटा तो युवा वर्ग संजू भैया के नाम से बुलाता है। इन्हीं कारणों से विधायक संजय पाठक न सिर्फ शासन स्तर पर बल्कि निजी तौर से भी लोगों की मदद करते हैं।

खनिज संपदा से परिपूर्ण विजयराघवगढ़

दरअसल, विजयराघवगढ़ विधानसभा, खनिज संपदा से परिपूर्ण है, जिसका फायदा उठाते हुए विधायक ने कई कंपनियों को क्षेत्र में स्थापित करवाते हुए स्थानीय लोगों को रोजगार दिलवाने का काम किया। क्षेत्र के विकास के लिए इसी वर्ष उन्होंने विजयराघवगढ़ में हरिहर तीर्थ बनाने का निर्णय लिया।

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अब बदल रहे हैं समीकरण

हालांकि कुछ वजहों से विधायक के प्रति नाराजगी भी है। क्षेत्र में अवैध रेत खनन होने की वजह से जल स्तर कम हो रहा है। इसका असर किसानों और आम लोगों पर पड़ रहा है। वहीं, इस क्षेत्र से बीजेपी के पूर्व विधायक ध्रुव प्रताप सिंह ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। साथ ही संजय पाठक के करीबी माने जाने वाले संदीप उर्फ पप्पू बाजपाई और ब्राह्मण समाज से जुड़े छेदीलाल कांग्रेस में शामिल हो गए हैं।

अब विजयराघवगढ़ विधानसभा की हालत यह हो गई है। वोटों में यहां बड़ा बिखराव संभव है। वहीं, कांग्रेस की तरफ से पूर्व प्रत्याशी पद्मा शुक्ला, कांग्रेस नेता नीरज सिंह बघेल सहित पूर्व विधायक ध्रुव प्रताप सिंह की दावेदारी है।

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यह है वोटरों की संख्या
विजयराघवगढ़ विधानसभा में 2 लाख 30 हजार 887 वोटर्स हैं, जिसमें महिला 1,11,021 और पुरुष मतदाता 1,19,866 हैं। जातिगत समीकरण की बात करें तो ब्राह्मणों की संख्या 58 से 64 हजार, ठाकुर समाज 30 से 35हजार , कोल (आदिवासी) 42 से 46 हजार और अल्पसंख्यक करीब 24 से 27 हजार मतदाता हैं। वहीं, साहू, यादव, गाडरी सहित अन्य पिछड़ा वर्ग के 47 हजार वोट हैं।

ये लोग क्षेत्र के विकास और जातिगत समीकरण के आधार पर अपना जनप्रतिनिधि चुनने का काम करते हैं। शायद यही कारण है कि एक लंबे वक्त से विधायक संजय पाठक बने हुए हैं। कांग्रेस विजयराघवगढ़ में जाति को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार का चयन कर सकती है।

कटनी से नारायण गुप्ता की रिपोर्ट

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