विकासशील देशों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला नहीं हो वैश्विक न्यूनतम कर समझौता : सीतारमण

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विकासशील देशों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला नहीं हो वैश्विक न्यूनतम कर समझौता : सीतारमण

नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को जी-20 देशों से प्रस्तावित वैश्विक न्यूनतम कर समझौते से विकासशील देशों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समझौते के ऐसे किसी भी अनचाहे परिणाम से रक्षा जरूरी है, जिसका विकासशील देशों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि एक निष्पक्ष और समावेशी कर प्रणाली सुनिश्चित करने के लिये यह जरूरी है कि जी-20 के सभी सदस्य देश बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर कर लगाने के प्रस्तावित समझौते को अंतिम रूप देने में सक्रिय रूप से भाग लें। उन्होंने कहा कि राजस्व के मामले में विकासशील देशों के लिये इस समझौते का परिणाम ‘सार्थक’ होना चाहिए।

भारत समेत 130 देशों ने पिछले साल जुलाई में वैश्विक कर नियमों में सुधारों पर सहमति जतायी थी। इस कदम का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां न्यूनतम 15 प्रतिशत की दर से वहां कर दें, जहां वे काम कर रही हैं।

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उस समय वित्त मंत्रालय ने कहा था कि लाभ आवंटन में हिस्सेदारी और कर नियमों के दायरे सहित कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान किया जाना बाकी है। प्रस्ताव के तकनीकी विवरण पर विचार-विमर्श के बाद एक ‘आम सहमति’ के आधार पर समझौता’ होगा।

प्रस्तावित समाधान में दो चीजें शामिल हैं…एक संबंधित बाजार क्षेत्र में लाभ के अतिरिक्त हिस्से का पुन: आवंटन और दूसरा न्यूनतम कर है, जो कर नियमों के अधीन है।

उन्होंने इंडोनेशिया के बाली में कर और विकास विषय पर जी-20 मंत्री स्तरीय बैठक में कहा, ‘‘…ऐसे किसी भी अनचाहे परिणाम से रक्षा जरूरी है, जिसका विकासशील देशों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हम निष्पक्ष, पारदर्शी, कुशल तथा प्रभावी वैश्विक कर प्रणाली के लिये वैश्विक सहयोग को मजबूत करने को लेकर निरंतर काम करेंगे, जो संसाधन जुटाने के विकासशील देशों के प्रयासों का समर्थन करता है और सशक्त बनाता है।’’

सीतारमण ने कहा, ‘‘यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि विकासशील देश बातचीत में भी प्रभावी रूप से शामिल हों। संसाधनों की कमी और समावेशी समझौते पर चर्चा में भाग लेने की सीमित क्षमताओं को दूर करने की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विकासशील देशों की जरूरतों और चिंताओं को व्यक्त किया जा सके और उसे सुना जा सके। यह वास्तव में समावेशी ढांचा है।’’

सीतारमण ने समझौते के तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप देने में सभी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी का समर्थन करने के लिए जी-20 समावेशी व्यवस्था का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, ‘‘यह विकासशील देशों के लिये निष्पक्ष, भरोसेमंद और समावेशी कर प्रणाली सुनिश्चित करेगा। इसके परिणामस्वरूप ‘सार्थक राजस्व’ सुनिश्चित होगा।’’

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