वर्ल्ड ओजोन डे 2022 : प्रति व्यक्ति से फैलता है 18 ग्राम प्लास्टिक का कचरा | World Ozone Day 2022 Theme | Patrika News

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वर्ल्ड ओजोन डे 2022 : प्रति व्यक्ति से फैलता है 18 ग्राम प्लास्टिक का कचरा | World Ozone Day 2022 Theme | Patrika News

वर्ल्ड ओजोन डे 2022 : प्रति व्यक्ति से फैलता है 18 ग्राम प्लास्टिक का कचरा | World Ozone Day 2022 Theme | Patrika News

ओजोन लेयर हमें कैसे रखती है सुरक्षित ?

यह एक गैस है, जो कि वायुमंडल में रहती है। ओजोन लेयर को ओजोन शील्ड के नाम से भी जाना जाता है, यह लेयर सूरज से निकलने वाली नेगेटिव अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन को अब्सॉर्ब कर यूवी किरणों को धरती पर पहुंचने से बचाती है।यह हानिकारक किरणें पर्यावरण के लिए बिलकुल भी सही नहीं है और कैंसर जैसी कई खतरनाक बीमारियों की वजह बन सकती हैं।

क्यों मनाया जाता है यह दिन ?

यह दिन हम सभी के लिए बहुत खास होता है, वर्ल्ड ओजोन डे पर्यावरण की सुरक्षा के लिए लिए मनाया जाता है।डैमेज हो रही ओजोन लेयर के बारे में जागरूक करने के लिए इस दिन को चुना गया है। हर व्यक्ति अपनी कोशिश से प्रदूषण को कम करने की कोशिश करे तो ओजोन लेयर को डैमेज होने से बचाया जा सकता है।19 दिसंबर 1964 में यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली ने ओजोन परत के संरक्षण के लिए 16 सितंबर को वर्ल्ड ओजोन डे के तौर पर मनाए जाने की घोषणा की थी। तभी से हर साल वर्ल्ड ओजोन डे मनाया जाता है।

वर्ल्ड ओजोन डे 2022 की थीम
इस साल ओजोन डे को Global Cooperation Protecting Life on Earth नाम की थीम दी गई है। इसका मतलब पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया में एयर क्वालिटी की मॉनिटरिंग पिछले 10 सालों में 6 गुना बढ़ी है। WHO के मुताबिक हर साल प्रदूषण से 70 लाख लोगों की जान चली जाती है इसलिए इस बार थीम का नाम सबसे अलग रखा गया है ।

क्यों जरूरी है ओजोन डे मनाना ?
ओजोन परत की स्थिति को देखते हुए हर साल ओजोन डे मनाना बेहद जरूरी है ताकि हर किसी को ओजोन परत के बारे में जानकारी देकर जागरूक किया जा सके। हर साल ओजोन डे पर लोगों को क्लोरोफ्लोरोकार्बन, प्लास्टिक और सभी हानिकारक प्रदार्थो के इस्तेमाल को कम कर ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने की सलाह दी जाती है।

सरकार ने 1 जुलाई 2022 से प्लास्टिक पर बैन लगाया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक भारत में हर साल 2.4 लाख टन सिंगल यूज प्लास्टिक पाया जाता है। इस हिसाब से हर व्यक्ति हर साल 18 ग्राम प्लास्टिक का कचरा पैदा करता है। सबसे खतरनाक प्रदूषण पॉलिथीन का है जो सभी देशों के माध्यम से भूमि पर तो फेल ही रहा है साथ ही समुद्र में फेल कर समुद्री जीव और वनस्पतियों को भी खत्म कर रहा है।

‘एसी, फ्रिज से निकलने वाली क्लोरीन गैस से ओजोन परत को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचता है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए, जिससे ठंडक रहेगी तो एसी की आवश्यकता कम पड़ेगी।’
– प्रमा सोलोमन असिस्टेंट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ एनवायरमेंट साइंस,राजस्थान विश्विद्यालय

जलवायु परिवर्तन की आइकन हैं ग्रेटा थनबर्ग
जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर दुनियाभर के लोगों के लिए ग्रेटा एक आइकन बन गई हैं। वह जलवायु परिवर्तन पर खुल कर बोलती हैं। नवंबर 2018 में उनके अभियान में 24 देशों के लगभग 17 हजार छात्रों ने हिस्सा लिया था। मार्च 2019 तक उनके अभियान से 135 देशों के 20 लाख बच्चे जुड़ चुके थे। साल 2020 में यह संख्या बढ़कर 36 लाख हो गई। ऐसे ही कई लोग ग्रेटा से जुड़ते गए और आज वह लगभग पूरे विश्व को पर्यावरण का पाठ पढ़ा रही है।



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