राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव का क्या माहौल? जानिए किसका पलड़ा है कितना भारी

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राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव का क्या माहौल? जानिए किसका पलड़ा है कितना भारी

राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव का क्या माहौल? जानिए किसका पलड़ा है कितना भारी

जयपुर: राजस्थान के सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान शुक्रवार 26 अगस्त को होने हैं। मतदान में अब कुछ ही समय शेष बचा है। ऐसे में चुनावी सरगर्मियां चरम पर है। राजस्थान विश्वविद्यालय में अपेक्स अध्यक्ष पद के लिए कुल 6 प्रत्याशी मैदान में हैं। सभी प्रत्याशियों ने प्रचार प्रसार में पूरी ताकत झोंक दी है। लगातार चुनावी रैलियों, सभाओं के साथ छात्रों को रिझाने के लिए हर तरह के जतन किए जा रहे हैं। कहीं सामूहिक फिल्म दिखाए जाने के प्रोग्राम बनाए जा रहे हैं तो कहीं अलग तरह की पार्टियों का आयोजन किया जा रहा है। पोस्टर्स, बेनर्स और होर्डिंग्स से शहर अटा पड़ा है। साथ ही सोशल मीडिया पर भी कैंपेन चलाए जा रहे हैं। चूंकि अब चुनाव प्रचार थम गया है, लिहाजा उम्मीदवारों का जोर डोर टु डोर वोट अपील और सोशल मीडिया कैंपन पर अधिक है।

राजस्थान विश्वविद्यालय के चुनावों में क्या है माहौल
राजस्थान विश्वविद्यालय में अध्यक्ष पद के लिए यूं तो 6 प्रत्याशी मैदान में हैं लेकिन चुनावी माहौल को देखते हुए तीन प्रत्याशियों में सीधी टक्कर देखी जा रही है। हालांकि एनएसयूआई प्रत्याशी रितु बराला और निर्दलीय प्रत्याशी निर्मल चौधरी में सीधी टक्कर देखी जा रही है। रितु का मजबूत पक्ष यह है कि वह पूर्व में महारानी कॉलेज की अध्यक्ष रह चुकी है। संगठन ने उसे टिकट दिया है।

एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष अभिषेक चौधरी लगातार रितु के समर्थन में मतदान की अपील कर रहे हैं। दूसरी ओर निर्मल चौधरी भी निर्दलीय प्रत्याशी होकर सीधी टक्कर देते नजर आ रहे हैं क्योंकि निर्मल चौधरी अध्यक्ष का चुनाव अपने बूते लड़ना चाहते हैं। टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने कोई विरोध नहीं किया और अपने चुनाव कैंपेन में व्यस्त रहे। निर्मल के साथ छात्र छात्राओं का बड़ा समूह है जो लगातार चुनावी तैयारियों में जुटा हुआ है। निर्मल की बहन महारानी कॉलेज में पढ रही है। वहां से भी निर्मल को अच्छे वोट मिलने की संभावना है।

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राजनैतिक पार्टियों की आपसी प्रतिस्पर्द्धा छात्रसंघ चुनाव में नजर आ रही
मंत्री मुरारीलाल मीणा की बेटी निहारिका जोरवाल निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रही है। मुरारीलाल मीणा कांग्रेस पार्टी से है। ऐसे में भाजपा से जुड़े मीणा समाज के नेता मुरारीलाल मीणा को सबक सिखाने के लिए उनकी बेटी के बजाय किसी अन्य प्रत्याशी के समर्थन देना चाहते हैं। बुधवार शाम को जयपुर शहर में स्थित एक छात्रावास में मीणा समाज की बैठक हुई। इस बैठक में भाजपा से जुड़े मीणा समाज के कई नेता शामिल हुए। इस बैठक में एबीवीपी के प्रत्याशी नरेन्द्र यादव को साफा पहनाकर सम्मानित किया गया।

इससे साफ जाहिर होता है कि भाजपा से जुड़े मीणा समाज के कई छात्र निहारिका के साथ नहीं है। इस लिहाज से निहारिका को पिता के मंत्री होने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। मीणा समुदाय के समर्थन देने पर नरेन्द्र यादव रितु और निर्मल के टक्कर में आ गए हैं।

मुकेश भाकर और रामनिवास गावड़िया का समर्थन प्राप्त है निर्मल को
अध्यक्ष पद के प्रत्याशी निर्मल चौधरी नागौर जिले के मेड़ता के पास स्थित एक गांव के रहने वाले हैं। निर्मल चौधरी छात्र राजनीति के बाद विधायक बने मुकेश भाकर और रामनिवास गावड़िया के साथ सक्रिय नजर आते रहे हैं। दोनों विधायक निर्मल को आगे बढाना चाहते हैं और इनका समर्थन कर रहे हैं। हालांकि भाकर और गावड़िया ने खुद के ट्विटर हैंडल या फेसबुक के जरिए निर्मल के समर्थन में मतदान की अपील नहीं की है लेकिन सब जानते हैं कि निर्मल चौधरी विधायक मुकेश भाकर और रामनिवास गावड़िया की टीम का एक्टिव नेता है।

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दरअसल मुकेश भाकर ने सीधे तौर पर निर्मल चौधरी को वोट करने की अपील नहीं की है, लेकिन सोशल मीडिया पर मुकेश भाकर निर्मल चौधरी से जुड़े ट्वीट को रीट्वीट कर रहे हैं। दो दिन पहले जब निर्मल चौधरी पर लाठीचार्ज के वीडियो को ट्वीट करके मुकेश भाकर ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध भी जताया था।

प्रताप भानू मीणा, हितेश्वर बैरवा पहुंचाएंगे निहारिका जोरवाल को नुकसान
अध्यक्ष पद के प्रत्याशी प्रताप भानू मीणा और हितेश्वर बैरवा अनुसूचित जाति और जनजाति के वोट हासिल करेंगे। ऐसे में मंत्री मुरारीलाल मीणा की बेटी निहारिका जोरवाल को ये दोनों प्रत्याशी सीधा नुकसान पहुंचाएंगे। निहारिका जोरवाल और पूर्व महासचिव नरेश मीणा ने प्रताप भानू से नामांकन वापस लेने की काफी गुहार की लेकिन प्रताप भानू चुनाव में डटे रहे।

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कुछ लोग यह भी आरोप लगा रहे हैं कि प्रताप भानू एनएसयूआई का एक्टिव मेम्बर रहा है। संगठन की ओर से उसे जानबूझकर चुनाव मैदान में खड़ा किया है ताकि वे एससी-एससी के वोट प्राप्त कर ले, जिससे की एनएसयूआई की रितु बराला की जीत सुनिश्चित हो सके। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि राजस्थान विश्वविद्यालय के चुनावों में त्रिकोणीय मुकाबला नजर आ रहा है।
(रिपोर्ट – रामस्वरूप लामरोड़)

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