राजस्थान में बजरी को लेकर आई राहत भरी खबर, पढ़ें पूरी खबर | environment ministry gave permission gravel mining in rajasthan | Patrika News

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राजस्थान में बजरी को लेकर आई राहत भरी खबर, पढ़ें पूरी खबर | environment ministry gave permission gravel mining in rajasthan | Patrika News

राजस्थान में नदियों से वैध बजरी खनन के लिए 60 खनन क्षेत्रों के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति जारी हो गई है।

जयपुर

Published: February 13, 2022 07:01:42 pm

जयपुर। राजस्थान में नदियों से वैध बजरी खनन के लिए 60 खनन क्षेत्रों के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति जारी हो गई है। अब प्रदेश में नदियों से बजरी के वैध खनन की राह प्रशस्त हो गई है, वहीं बजरी की समस्या का समाधान भी हो गया है। अब आवश्यक औपचारिकताएं पूरे होने के साथ ही प्रदेश में लगभग सभी क्षेत्रों में बजरी का वैध खनन शुरु हो जाएगा।

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मंशा पत्रों की वैधता 13 महीने से बढ़ाकर 68 महीने हुई
अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस, पेट्रोलियम एवं ऊर्जा डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा बजरी की समस्या से लोगों को राहत दिलाने के लिए निरंतर समाधान खोजने के निर्देश दे रहे थे। पिछले साल 11 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश जारी होने के बाद मुख्यमंत्री की पहल पर राज्य सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर खनिज पट्टों के लिए जारी मंशा पत्रों की वैधता को 13 माह के स्थान पर 68 माह कर दिया है। खान एवं गोपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया ने भी केन्द्र सरकार से पर्यावरण अनुमति मिलने पर खुशी जाहिर की है।

औपचारिकताएं पूरे होते ही जारी होगी खनन लीज
सुबोध अग्रवाल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार द्वारा जालोर में दो व भीलवाड़ा में एक बजरी खनन पट्टे और उसके बाद 4 दिसंबर को देवली, राजसमंद, नाथद्वारा में बजरी मंशा पत्रों की वैधता की राह प्रशस्त होने से कुल छह बजरी खनन की लीज जारी हो सकी है। उन्होंने बताया कि बजरी से संबंधित सभी प्रकरणों की मोनीटरिंग व समन्वय के लिए अतिरिक्त निदेशक बीएस सोढ़ा को प्रभारी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि पर्यावरणीय स्वीकृति जारी होने के बाद राज्य स्तर पर आवश्यक औपचारिकताएं पूरे होते ही खनन लीज जारी की जाएगी, जिससे बजरी का वैध खनन शुरू हो जाएगा।

600 करोड़ रूपए का मिलेगा राजस्व
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि एक मोटे अनुमान के अनुसार राज्य में 70 मिलियन टन बजरी की मांग है। इन 60 खनन क्षेत्रों के लिए लीज जारी होते ही प्रदेश में बजरी की समस्या का पूरी तरह से समाधान हो जाएगा। इससे एक और जहां रियल एस्टेट सहित निर्माण क्षेत्र की बजरी की समस्या का समाधान होगा वहीं एक अनुमान के अनुसार राज्य सरकार को भी 600 करोड़ रूपए का राजस्व मिलेगा। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार एक्सपर्ट एप्रेजल कमेटी द्वारा रिकमंडडेड सभी 60 प्रकरणों में अनुमति जारी हो गई है। निदेशक माइंस केबी पण्डया ने बताया कि विभाग द्वारा आवश्यक कार्यवाही की तैयारियां शुरू कर दी गई है।

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