यूं ही नहीं आया है ओलिंपिक में सोना, देखिए साल-दर-साल कैसा रहा नीरज चोपड़ा का सफर

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यूं ही नहीं आया है ओलिंपिक में सोना, देखिए साल-दर-साल कैसा रहा नीरज चोपड़ा का सफर

तोक्यो
नीरज चोपड़ा के गले में सोने का तमगा और चेहरे पर मुस्कान सबने देखी। सबने देखी कि कैसे 23 साल का एक लड़का दौड़ता हुआ आता है, भाला फेंकता है और इतिहास रच देता है। सबने देखा कि भाला फेंकने के बाद वह जोश में चिल्लाता है। इससे पहले कि भाला धरती पर गिरे उसे पता होता है कि उसने मैदान मार लिया है। यह उसका ऐटिट्यूड है। खुद पर भरोसा है। और इस भरोसे के पीछे है कड़ी मेहनत, लगन, तकनीक और कुछ करने का जज्बा।

साल-दर-साल, टूर्नमेंट दर टूर्नमेंट नीरज के खेल में तेजी से सुधार आता गया। वह लगातार ऊंचाई की ओर बढ़ते गए। 2016 में जूनियर चैंपियनशिप जीतने के साथ ही लोगों को लगने लगा था कि यह लड़का कुछ करेगा। और नीरज ने पानीपत की गलियों से पोडियम तक का सफर तय किया।

साल 2014 में नीरज का बेस्ट थ्रो 70.19 मीटर था। और साल 2021 में यह 88 मीटर पार गया। खेल को करीब से जानने वाले कहते हैं कि यह आसान काम नहीं है। भाला फेंकना सिर्फ ताकत का काम नहीं है, इसमें तकनीक का काफी काम है। नीरज ने अपना भाला बदला था। और ऐसा भाला लिया था जिसे आप अच्छी तकनीक के बिना फेंक ही नहीं सकते। यानी वह खुद भी जानते थे कि सिर्फ ताकत से काम नहीं होगा, जुगत लगानी होगी। और इसका जो मेल हुआ, उसने उनके गले में सोने का मेडल पहना दिया।

महान धावक मिल्खा सिंह 1960 रोम ओलिंपिक में सेकंड के 100वें हिस्से से मेडल से चूक गए थे। उनका सपना था कि उनके जीते-जी कोई भारतीय ट्रैक ऐंड फील्ड में ओलिंपिक मेडल जीते। हाल ही में मिल्खा सिंह का कोरोना के चलते निधन हो गया। नीरज ने अपनी जीत मिल्खा सिंह को समर्पित की। उन्होंने कहा, ‘मिल्खा सिंह स्टेडियम में राष्ट्रगान सुनना चाहते थे। वह अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनका सपना पूरा हो गया है।’

मिल्खा सिंह के बेटे और महान गोल्फर जीव मिल्खा सिंह ने भी ट्वीट किया, ‘नीरज चोपड़ा ने क्या कमाल का प्रदर्शन किया है। डैड की बरसों से यही इच्छा थी। उनका सपना आखिरकार पूरा हो गया है। जब मैं यह ट्वीट करते हुए रो रहा हूं और मुझे यकीन है कि यह सपना पूरा होने पर डैड भी ऊपर रो रहे होंगे।

2016 के वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में 86.48 मीटर भाला फेंककर खिताब जीता था। और तोक्यो में उन्होंने 87.58 मीटर भाला फेंका। पूरे इवेंट में कोई दूसरा ऐथलीट 87 मीटर का आंकड़ा नहीं छू सका।



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