युद्ध विराम हो लक्ष्‍य

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युद्ध विराम हो लक्ष्‍य

यूक्रेन पर रूसी हमले के एक महीने से ऊपर हो जाने के बाद शनिवार को जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन पोलैंड में यूक्रेनी शरणार्थियों से मिले, तो दुनिया के ज्यादातर देशों की भावनाएं उनके साथ थीं। मगर जो राष्ट्रपति बाइडन ने वहां कहा, उसके बाद उनके समर्थकों के लिए भी उनके रुख के साथ खड़े रहना पहले के मुकाबले थोड़ा मुश्किल हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी इस यूरोप यात्रा के दौरान न केवल रूसी राष्ट्रपति पुतिन को कसाई बताया, बल्कि भावुकतापूर्ण अंदाज में यह भी कहा, ‘हे भगवान, यह आदमी सत्ता में बना नहीं रह सकता।’

रूसी प्रवक्ता ने बिना देर किए इसका जवाब भी दे दिया, ‘अमेरिकी राष्ट्रपति या अमेरिका के लोग यह तय नहीं करेंगे कि रूस में कौन सत्ता में बना रह सकता है और कौन नहीं।’ अमेरिकी सरकार के लिए भी इस बयान ने असुविधाजनक स्थिति पैदा कर दी थी। अभी बाइडन अमेरिकी फोर्स वन विमान पर सवार होकर वापसी यात्रा शुरू करते, उससे पहले ही उनके सहायकों की ओर से स्पष्टीकरण आने लगे कि राष्ट्रपति मॉस्को में तत्काल सत्ता परिवर्तन की अपील नहीं कर रहे थे। बहरहाल, बात राष्ट्रपति बाइडन के मुंह से निकल चुकी है। अब स्पष्टीकरणों के जरिए उसे वापस नहीं लिया जा सकता।

वैसे, बाइडन ने यह बात कहकर पुतिन का रुख ही मजबूत किया कि अमेरिका दूसरे देशों के अंदरूनी मामलों में दखलंदाजी करता आया है और कई बार उसने सत्ता परिवर्तन के लिए उन पर हमले भी किए हैं। यूं तो बाइडन ने जो कहा, युद्ध जैसे हालात में इस तरह की भावनाएं उत्पन्न होना अस्वाभाविक नहीं है। बहुत संभव है कि रूस के भी सत्तारूढ़ हलकों में यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की को लेकर ऐसी ही भावनाएं हों। लेकिन संप्रभुता संपन्न देशों के बीच मामले इस तरह की भावनाओं के आधार पर नहीं निपटाए जाते। ये भावनाएं विवाद को सुलझाने की दृष्टि नहीं देतीं, सिर्फ उस बचकानी जिद को जन्म देती हैं जो युद्ध के बेवजह लंबा खिंचते जाने का कारण बनती है।

Russia Ukraine War : क्या रूस-यूक्रेन युद्ध से दुनिया में बदल जाएगा तेल का खेल?

ध्यान रहे, यूक्रेन के खिलाफ रूस की यह कथित सैन्य कार्रवाई जब शुरू हुई थी, तब कई विशेषज्ञों को लगता था कि इसके अंजाम तक पहुंचने के लिए दो दिन का वक्त काफी होगा। मगर एक महीने से ज्यादा हो जाने के बाद स्थिति यह है कि अकल्पनीय नुकसान झेलकर भी यूक्रेन तना हुआ है और रूस को एटमी हथियारों का इस्तेमाल करने की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष धमकी देनी पड़ रही है। इस बीच, रूस को भी कम नुकसान नहीं हुआ है। सप्लाई लाइन बाधित होने से वहां के भी कई शहरों में जरूरी सामानों की किल्लत की खबरें आ रही हैं। जाहिर है, युद्ध जितना लंबा खिंचेगा दोनों तरफ नुकसान बढ़ते जाएंगे। ऐसे में बेहतर यही होगा कि यह युद्ध रुक जाए। इसकी और कीमत दोनों देशों के आम लोगों को न चुकानी पड़े।



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