मोतिहारी के मदरसे में देशविरोधी प्लानिंग में जुटा था मौलवी असगर अली, NIA की टीम ने पटना ले गई

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मोतिहारी के मदरसे में देशविरोधी प्लानिंग में जुटा था मौलवी असगर अली, NIA की टीम ने पटना ले गई

मोतिहारी: बिहार के मोतिहारी जिले के ढाका के मदरसा में NIA ने बड़ी कार्रवाई की है। यहां से NIA ने मौलाना असगर अली को अरेस्ट कर अपने साथ ले गई है। बताया जा रहा है कि असगर अली को फिलहाल पटना ले जाया गया है, जहां उससे पूछताछ होगी। NIA की टीम ने बुधवार को मोतिहारी के पचपकड़ी रोड स्थित जामिया मारिया मिशवा मदरसे में छापेकारी की। वहां से 3 लोगों को हिरासत में ढाका थाने ले जाया गया, जहां उनसे पूछताछ की गई। पूछताछ के बाद दो लोगों को वहीं से रिहा कर दिया गया। उसके बाद असगर अली को लेकर टीम पटना रवाना हो गई है। छापेमारी के दौरान PFI से जुड़े दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। हालांकि NIA के अधिकारी पूरी कार्रवाई पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

अजगर अली के बारे में बताया जा रहा है कि वह ढाका थाना क्षेत्र के रामगढ़वा इलाके का रहने वाला है। वह जामिया मारिया मिशवा मदरसे टीचर है। वह ढाका के बड़ी मस्जिद के नायक इमाम मोहम्मद निशार के कमरे में ही रहता था। इस कार्रवाई में स्थानीय थाने की मदद ली गई है। छापेमारी के दौरान मदरसे से भड़काऊ किताबें बरामद की गई हैं। इसके अलावा एक बक्सा भी जब्त किया गया है, जिसमें कई प्रतिबंधित दस्तावेज हैं।

PFI में रियाज का भी नाम
उधर, सूत्रों का कहना है कि PFI से संबंध रखने में मोहम्मद रियाज का नाम भी उजागर हुआ है। बताया जा रहा है कि अतहर की गिरफ्तारी के दौरान रियाज ने फोन कॉल किया था। साल 2017 में अतहर को पटना के पीरबहोर थाने की पुलिस ने अरेस्ट किया था। उस दौरान अतहर पर जाकिर नाईक की गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी के आरोप लगे थे। रियाज के बारे में बताया जा रहा है कि वह पटना का ही रहने वाला है। बताया जा रहा है कि जब PFI के सक्रिय सदस्य अतहर की गिरफ्तारी हुई थी तब रियाज ने अरमान मलिक को कॉल किया था। फोन कॉल में अतहर को तत्काल थाने से निकालने को लेकर बात हुई थी।

PFI को कहां से हो रही है फंडिंग, NIA जांच में जुटी
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से कथित संबंध रखने और भारत-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की योजना बनाने के लिए बिहार पुलिस द्वारा हाल ही में तीन व्यक्तियों की गिरफ्तारी के बाद सामने आए आतंकवादी मॉड्यूल के मद्देनजर धनशोधन की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
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झारखंड के एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी मोहम्मद जलाउद्दीन और अतहर परवेज को 13 जुलाई को राज्य की राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ इलाके से गिरफ्तार किया गया था, जबकि नूरुद्दीन जंगी को तीन दिन बाद उत्तर प्रदेश एटीएस ने बिहार पुलिस के अनुरोध पर लखनऊ से गिरफ्तार किया था। पटना पुलिस ने कहा था, ‘वे (जलाउद्दीन और परवेज) स्थानीय लोगों को तलवार और चाकुओं का इस्तेमाल करना सिखा रहे थे और उन्हें सांप्रदायिक हिंसा के लिए उकसा रहे थे। उनके पीएफआई से भी संबंध हैं।’
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उन्होंने बताया कि उनके पास से इस्लामी चरमपंथ से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए हैं। उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने कहा था कि नूरुद्दीन ने पूछताछ के दौरान कबूल किया है कि वह 2015 में पीएफआई के दरभंगा जिलाध्यक्ष के संपर्क में आया था और तब से संगठन से जुड़ा हुआ है। अधिकारियों ने कहा कि ईडी ने पटना पुलिस की इस प्राथमिकी का संज्ञान लिया है और पीएफआई, उसके सदस्यों और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ की जा रही व्यापक जांच में इसे समाहित किया गया है।

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