मैनपुरी उपचुनाव 2022 : 2017 में कहा – डिंपल नहीं लड़ेंगी चुनाव, 2022 में मैनपुरी जीतने के लिए अखिलेश का यू-टर्न | Mainpuri By Election 2022 Akhilesh took u turn to select dimple yadav | Patrika News

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मैनपुरी उपचुनाव 2022 : 2017 में कहा – डिंपल नहीं लड़ेंगी चुनाव, 2022 में मैनपुरी जीतने के लिए अखिलेश का यू-टर्न | Mainpuri By Election 2022 Akhilesh took u turn to select dimple yadav | Patrika News

इसके पीछे अतीत की एक सियासी मजबूरी है जिस पर आज उनको ऐसा पॉलिटिकल यू-टर्न लेना पड़ा। आइए विस्तार से जानते हैं। 5 साल पहले कहा था – अब डिंपल नहीं लड़ेंगी चुनाव

साल 2017 की बात है। वो दिन था रविवार का और जगह उत्तर प्रदेश का लखनऊ नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ का रायपुर था। आखिलेश ने उस साल हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से हाथ मिलाकर बुरी हार का सामना किया था।

उन पर सबसे बड़ा आरोप परिवारवाद का लगा जिससे निजात पाने का एक मात्र मास्टरस्ट्रोक उन्होंने अपनी पत्नी और तत्कालीन कन्नौज सांसद डिंपल यादव को चुनावी राजनीति से दूर रख कर किया हालांकि उन्होंने इतना बड़ा एलान करने से पहले डिंपल से पूछा भी था या नहीं यह बात कभी सामने नहीं आ पाई।

उस समय आखिलेश ने एयरपोर्ट पर पत्रकारों के सवाल के जवाब में सपा में परिवारवाद से इंकार किया था। उन्होंने कहा था कि यदि हमारी पार्टी में परिवारवाद है तो मेरी पत्नी डिंपल यादव अब कोई चुनाव नहीं लड़ेंगी।

आखिर 2022 में अखिलेश ने क्यों लिया ऐसा यू-टर्न ? ये रही वजहें 2014 लोकसभा चुनाव में मैनपुरी सीट से तेज प्रताप यादव जीते थे। ऐसे में सीधी बात थी कि नेता जी मुलायम की विरासत संभालने का जिम्मा उन्हें ही सौंपा जाता। हालांकि डिंपल का चुनावी मैदान में उतरना चौंकाने वाला फैसला ज़रूर है लेकिन इसके पीछे कुछ बड़ी वजहें भी हैं।

पहली वजह तो ये कि डिंपल यादव का चुनाव लड़ने से सपा ससुर मुलायम की विरासत संभालने वाली बहु डिंपल का सियासी मैसेज अपने वोटर्स के बीच देना चाहती है। दूसरी वजह, डिंपल यादव पहली बार उपचुनाव में वह निर्विरोध चुनी गईं थी और 2014 में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को हराया था। ऐसे में उनके भाजपा को हराने और उपचुआव जीतने, दोनों का अनुभव है जिससे सपा की राह आसान होती है।

तीसरी वजह ये कि डिंपल यादव के जीतने से दिल्ली की राजनीति में अखिलेश को अहम साझीदार भी मिलेगा जो उनके परिवार की सदस्य से बेहतर और कोई हो नहीं सकता। चौथी वजह ये कि पार्टी में महिला चेहरा के तौर पर डिंपल का नाम ही दिखता है और इससे सपा महिला वोट बैंक को टारगेट करने की फिराक में है।

गोला उपचुनाव हारने के बाद अब मैनपुरी उपचुनाव में अखिलेश अपनी पिता विरासत बचाने के लिए शायद अपनी जिंदगी का सबसे अहम चुनाव लड़ रहे हैं।ऐसे में वह कोई भी सियासी गलती या रिस्क लेने के मूड में नहीं है। मैनपुरी में किसी भी हाल में जीत हासिल करना उनका मकसद है इसलिए उन्होंने परिवारवाद के खिलाफ अपने पुराने सियासी स्टैंड पर इतना बड़ा यू-टर्न ले लिया है।



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