मुझे खुद कई बार टिकट नहीं मिला, BJP में बवाल और बागियों से ये क्यों बोल पड़े प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी

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मुझे खुद कई बार टिकट नहीं मिला, BJP में बवाल और बागियों से ये क्यों बोल पड़े प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी

मुझे खुद कई बार टिकट नहीं मिला, BJP में बवाल और बागियों से ये क्यों बोल पड़े प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी

UP Nagar Nikay Chunav 2023: उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल लगभग तैयार हो गए है। हालांकि टिकट न मिलने से कार्यकर्ता बगावत कर रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा संख्या बीजेपी की है। इसी के चलते प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को पार्टी कार्यकर्ताओं का विरोध झेलना पड़ा।

 

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी

हाइलाइट्स

  • बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने सुनाई अपना आपबीती
  • कहा- मुझे भी नहीं मिला था कई बार टिकट
  • टिकट कटने के बाद भी काम में जुटे रहे
गाजियाबाद: नगर निकाय चुनाव में प्रचार के मामले में सबसे आगे चल रही है। बीजेपी में टिकट बंटवारे को लेकर मचा बवाल खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी आरडीसी में मेयर प्रत्याशी सुनीता दयाल के चुनाव कार्यालय का उद्घाटन करने आए। इस दौरान उन्हें भी टिकट वितरण से नाराज कार्यकर्ताओं और नेताओं की नाराजगी झेलनी पड़ी। कई नेताओं ने आरोप लगाया कि वॉर्ड के टिकट वितरण में जमकर गड़बड़ी और भ्रष्टाचार हुआ है। नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट दिए गए, जबकि कई साल से पार्टी को मजबूत करने में जुटे कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई थी। दूसरी तरफ प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने बताया कि उन्हें भी कई बार टिकट नहीं मिला।

हालांकि बाद में प्रदेश अध्यक्ष ने नाराज कार्यकर्ताओं को आश्वस्त किया कि पार्टी में उनका मान सम्मान और प्रभाव किसी भी सूरत में कम नहीं होने देंगे। बेशक कुछ लोग मजबूत दावेदार थे लेकिन पार्टी के निर्णय स्वीकार करना चाहिए। एक टिकट कटने से किसी का राजनीतिक अस्तित्व खत्म नहीं होता, भविष्य में समर्पित कार्यकर्ता का पूरा ध्यान रखा जाएगा। बता दें कि टिकट वितरण के दिन तो कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच मारपीट तक के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने दिया अपना उदाहरण

मेयर प्रत्याशी के चुनाव कार्यालय के उद्घाटन के बाद भूपेंद्र चौधरी ने कहा की जिस प्रकार से आम लोगों में पार्टी की विश्वसनीयता और लोकप्रियता बढ़ी है इस कारण चुनाव लड़ने वालों का अधिक होना स्वाभाविक है। इसके बावजूद टिकट तो एक को ही मिलेगा। इसलिए जिन्हें टिकट नहीं मिला, उनके काम की अनदेखी संगठन कभी नहीं करेगा। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ लोग मजबूत दावेदार होते हुए भी छूट जाते हैं। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि वह दो बार चुनाव हारे, कई बार पार्टी से टिकट भी नहीं मिला लेकिन वह पार्टी के लिए कार्य करते रहे। चुनाव हारने के बावजूद पांच साल से अधिक समय तक तक प्रदेश सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर बनाए गए। कई अन्य पदों रहने के बाद अब प्रदेशाध्यक्ष हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल चुनाव लड़ने से ही कोई पार्टी में बड़ा नेता नही होता, बल्कि संगठन के प्रति जिम्मेदारी से कार्य करने पर ही पार्टी नेतृत्व उन्हें मौका देता है।

अनुशासनहीनता पर कार्रवाई की भी कही बात

भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि अब टिकट न मिलने से जिन कार्यकर्ताओं की नाराजगी थी, वह दूर हो जानी चाहिए। उन्होंने आश्वस्त किया कि जिन लोगों ने भी पार्टी हित को नजरअंदाज कर अनुशासनहीनता की है, उन पर भी कार्रवाई होगी। पार्टी में लोकतंत्र है, बीजेपी को छोड़कर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सभी प्राइवेट कंपनी की तरह काम करती है। उन्होंने सपा का उदाहरण देते हुए का प्रदेश में कई बार सरकार बनने वाले वाली पार्टी के 32 साल के इतिहास में केवल 2 अध्यक्ष बने, वह भी एक परिवार के, जबकि बीजेपी ने 1992 से अब तक 10 राष्ट्रीय अध्यक्ष दिए हैं।

और सब्र का बांध टूट गया महिला नेता का

पार्टी के चुनाव कार्यालय के उद्घाटन के बाद जिस समय प्रदेश अध्यक्ष कार्यकर्ताओं और नेताओं को अनुशासन और चुनाव में बंपर जीत हासिल करने के टिप्स दे रहे थे, इसी दौरान वहां मौजूद वॉर्ड 10 की महिला नेता का सब्र का बांध टूट गया। उन्होंने कहा कि पार्टी में महिलाओं और समर्पित कार्यकर्ताओं का मान सम्मान होना बंद हो गया है। वॉर्ड 10 में उनके समेत कई समर्पित कार्यकर्ता टिकट का दावा कर रही थीं, लेकिन टिकट में भाई भतीजावाद और भ्रष्टाचार कर क्षेत्रीय संगठन के एक पदाधिकारी की पत्नी को टिकट दे दिया गया। जब इस महिला कार्यकर्ता के आरोप के संबंध में प्रदेश अध्यक्ष से पूछा तो उन्होंने केवल इतना ही कहा की पार्टी में सब जल्द सब कुछ सामान्य हो जाएगा। बीजेपी प्रत्याशी रेकॉर्ड मतों से चुनाव जीतेंगे।

कुछ बागी माने तो कुछ अड़े

बीजेपी में 50 से अधिक वार्डों में टिकट बंटवारे को लेकर चल रही रार के कारण 40 से अधिक वॉर्डों से पार्टी के कार्यकर्ता बागी के रूप में खड़े हो गए थे। हालांकि पार्टी नेतृत्व के कहने पर सांसद और विधायकों से लेकर वरिष्ठ नेता तक अपने-अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर बागियों को बैठाने का प्रयास कर रहे हैं। गुरुवार को 25 बागियों ने वॉर्ड से अपने नाम वापस ले लिए थे, जबकि पांच बागी उम्मीदवारों ने पार्टी प्रत्याशियों को समर्थन देने की बात कही है, जबकि शेष में बागी अभी अड़े हुए हैं। इनमें प्रमुख रूप से राजनगर, कौशांबी और वैशाली समेत कई वॉर्ड के कैंडिडेट्स शामिल हैं।

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