मार्च में MCD चुनाव होते तब भी हार तय थी, अब और भी बुरी तरह हारेगी BJP: मनीष सिसोदिया

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मार्च में MCD चुनाव होते तब भी हार तय थी, अब और भी बुरी तरह हारेगी BJP: मनीष सिसोदिया

आम आदमी पार्टी में अरविंद केजरीवाल के बाद दूसरा सबसे कद्दावर नेता अगर कोई है, तो वह पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया हैं। इस बार अरविंद केजरीवाल के गुजरात विधानसभा चुनाव में व्यस्त रहने की वजह से एमसीडी चुनाव में कैंपेनिंग का पूरा जिम्मा उन्होंने संभाला। अब जब चुनाव प्रचार खत्म होने को है, तो इस अवसर पर मनीष सिसोदिया ने एक खास बातचीत में प्रशांत सोनी को बताया कि यह चुनाव उनके लिए कितना अलग और चुनौतीपूर्ण रहा और एमसीडी में अगर आम आदमी पार्टी को बहुमत मिला, तो शहर में क्या बदलाव दिखेंगे। पढ़ें इस बातचीत के अंशः

आज चुनाव प्रचार खत्म होने जा रहा है। आपने इतने दिनों तक जो कैंपेनिंग की, उसका सारांश आपकी नजर में क्या है?
मुझे लगता है कि एमसीडी का चुनाव इस बार दिल्ली की जनता लड़ रही है और कूड़े के इश्यू से दुखी होकर लड़ रही है। 15 साल से लोग देख रहे हैं कि कैसे बीजेपी शासित एमसीडी ने उनका जीना दूभर कर दिया है। सुबह-सुबह नहा धोकर लोग अपने काम पर जाने के लिए जैसे ही घर से निकलते हैं, कहीं कूड़े पर तो कहीं सड़क पर फैले मल-मूत्र पर उनका पैर पड़ता है और फिर पूरे दिन के लिए लोगों का मूड खराब हो जाता है। लोग चाहते हैं कि हम देश की राजधानी में रहते हैं, कम से कम यहां तो हमें साफ सुथरा माहौल मिले। दूसरा, लोगों ने हमारे काम देखे हैं और उन्हें भरोसा है कि ये लोग जो कहते हैं, वो करके भी दिखाते हैं। लोगों को यह भरोसा है कि अगर अरविंद केजरीवाल को एमसीडी की जिम्मेदारी देंगे, तो एमसीडी के कामों में भी सुधार आएगा।

एमसीडी चुनाव में प्रचार का जिम्मा पूरी तरह आपके कंधों पर रहा। निजी तौर पर यह आपके लिए कितना चुनौतीपूर्ण रहा और क्या लर्निंग रही आपकी?
मेरे लिए भी यह एक नई लर्निंग रही कि जब पार्टी के और सीनियर लीडर्स चारों तरफ बिजी हों, तो उस वक्त कैसे आप और ज्यादा जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभाते हैं। हालांकि, मैं जहां भी गया, वहां मुझे यही लगा कि लोग तो इस बार पहले से तैयार हैं और कहीं ऐसा कुछ खला नहीं कि अगर सीएम आएंगे, तभी कुछ होगा। इसकी एक वजह यह भी है कि सीएम साहब का काम सब जगह बोलता है। केजरीवाल जी की जो इमेज है सबके लाड़ले बेटे और भाई की, उसकी वजह से कहीं भी उनकी कमी नहीं खली।

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एमसीडी चुनाव अगर मार्च में ही हो जाते या गुजरात चुनाव के साथ नहीं होते, तो क्या आपके लिए और बेहतर स्थिति होती?
नहीं, तब भी स्थति यही होती, जो अभी है। पहले भी बीजेपी का हारना तय था और ये अब भी हारेंगे। बल्कि 7 महीने चुनाव टालकर इन्होंने अपने लिए स्थिति और बिगाड़ ली है। इस दौरान दिल्ली की स्थिति और खराब हो गई। दर्जनों आरडब्लूए ने हमें बताया कि कैसे उनको मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था और सारे काम रुक गए थे। तो हमारे लिए तो कुछ नहीं बदला है, लेकिन इनकी हालत और खराब होने वाली है।

बतौर पत्रकार, सोशल वर्कर और मंत्री आप दिल्ली में इतना घूमे हैं। अब जब आप प्रचार के लिए गली-मोहल्लों में गए, तो इतने सालों में क्या सबसे बड़ा बदलाव आपको नजर आया?
पहले दिल्ली में जो डिवेलपमेंट का मॉडल चल रहा था कि वो यह था कि कुछ फ्लाईओवर बना दो और पहले से चमकते कुछ इलाकों को और चमका दो, लेकिन वो दिल्ली आम जनता का मॉडल नहीं था। लेकिन 2015 के बाद से जो काम होना शुरू हुआ, उससे दिल्ली में वास्तविक बदलाव आया। नरेला, बुराड़ी, बवाना जैसे इलाकों में सीवर लाइनें और पानी की पाइपलाइन डालने से, सड़कें बनने से लोगों के जीवन में बदलाव आया। सीएम ने अनधिकृत कॉलोनियों में जो ढेर सारे काम करवाए, जिससे बहुत फर्क पड़ा। हमने डीसेंट्रालाइज्ड डिवेलपेमेंट किया, जिससे हर जगह के लोगों को अब यह लगने लगा है कि हमारे यहां भी विकास हुआ है।

आरडब्लूए को ‘मिनी पार्षद’ का दर्जा देने की घोषणा के पीछे क्या विचार रहा? इसे सब जगह कैसे लागू करेंगे?
15 साल में बीजेपी तो एमसीडी में पूरी तरह फेल रही। जो थोड़े बहुत काम किसी गली-मोहल्ले या कॉलोनी में हुए, वो आरडब्लूए ने ही करवाए। एक तरह से आरडब्लूए पहले ही ‘मिनी पार्षद’ के रूप में स्थापित हो चुकी हैं, केवल उन्हें कानूनी दर्जा दिया जाना बाकी था। हमने उन्हें वो दर्जा देने की घोषणा की है। स्थानीय लोग भी अपनी समस्याओं को लेकर पार्षद या विधायक तक भले ही ना पहुंच सकें, लेकिन आरडब्लूए तक उनकी पहुंच जरूर रहती है। हम जब उनको कानूनी दर्ज देंगे, तो आरडब्लूए भी खुद को सशक्त महसूस करेंगी और पूरी अथॉरिटी के साथ अधिकारियों से बात करके इलाके के छोटे-मोटे काम करवा सकेंगी।

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चुनाव में आपका फोकस पूरी तरह लोकल मुद्दों पर है, जबकि आपकी प्रतिद्वंद्वी पार्टी प्रतीकों की राजनीति करती है। आपको क्या लगता है, लोगों पर इसका कुछ असर पड़ेगा?
धीरे-धीरे अब लोगों को भी यह समझ आ रहा है कि प्रतीक हमारे लिए बहुत सम्मान की चीज है, लेकिन उनका वास्तविक मान सम्मान तभी है, जब नीचे के स्तर पर देश विकसित होगा। अगर हम अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और आम लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं तक नहीं दे सकते, तो फिर हम कैसा राष्ट्र बनाएंगे और कैसे राष्ट्रप्रेमी कहलाएंगे। गुजरात में शिक्षा मंत्री के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों की हालत देखकर तो मैं दंग रह गया था। मैं इतने बुरे हाल की उम्मीद नहीं कर रहा था, जितना वहां दिखाई दिया।

चुनाव से पहले आपको भी रोकने की बहुत कोशिशें हुईं, आपके खिलाफ केस दर्ज किया गया, आपके यहां रेड की गई, लेकिन चार्जशीट में नाम नहीं आया। इसका क्या कारण लगता है आपको?
सच्चाई का साथ तो भगवान भी देते हैं। इन्होंने इतने षड़यंत्र रचे, मेरे खिलाफ झूठी एफआईआर लिखवाई, मुझे आरोपी नंबर 1 बनाया, रोज टीवी पर बैठकर मुझे गालियां दी, मेरे घर रेड करवाई। इस सबकी वजह से मुझे, मेरी पार्टी को और मेरे परिवार को बहुत प्रताड़ित होना पड़ा। मेरे बेटे तक को कई सवालों का सामना करना पड़ा, लेकिन लोग सब देख रहे थे कि ये किसलिए हो रहा है। आखिर में वही हुआ और इनको कुछ नहीं मिला। जिसको ये लोग ‘किंगपिन’ बता रहे थे, उसके खिलाफ 4 महीने में ये इतने से सबूत भी नहीं जुटा पाए कि चार्जशीट में उसका नाम डालते।

पर वो तो कह रहे हैं कि हमने अभी कोई क्लीन चीट नहीं दी है और आगे और चार्ज शीट भी दायर कर सकते हैं?
उन्हें केवल मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और रेड कराने की जल्दी थी, ताकि मैं और मेरी पार्टी प्रताड़ित हो। अब ये तो सिद्ध हो गया है कि अभी तक की जांच में उन्हें मेरे खिलाफ कुछ नहीं मिला है। आगे अगर कुछ होगा, तो हम उसका भी डटकर सामना करेंगे।

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आपने कूड़े के तीन पहाड़ों को खत्म करने का वादा किया है? इसके लिए आपका एक्शन प्लान क्या है?
सीएम साहब ने इसका पूरा ब्लू प्रिंट देखा हुआ है। अभी बीजेपी वाले जिस स्पीड से काम कर रहे थे, उसमें तो कूड़े के इन पहाड़ों को खत्म करने में 100 साल से भी ज्यादा समय लग जाएगा, लेकिन हम 4-5 साल के अंदर ही इनको खत्म करेंगे। इसके तीन प्रमुख स्टेप्स होंगे। सबसे पहले सफाई कर्मचारियों को समय पर तनख्वाह देकर उन्हें मोटिवेट किया जाएगा, ताकि वो अच्छा काम करें। दूसरा, ग्राउंड लेवल पर कूड़े के कलेक्शन और सेगरिगेशन के पूरे सिस्टम को ठीक किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक कूड़े का पहले ही निपटारा हो सके। उसके बाद जो कूड़ा लैंडफिल साइट पर अभी है, उसका तेजी से ट्रीटमेंट करने के लिए नई विश्वस्तरीय तकनीकों को अपनाएंगे।

पहले से भारी घाटे में चल रही एमसीडी की आर्थिक स्थिति को आप कैसे सुधारेंगे?
मैं यह मानने को तैयार नहीं हूं कि एमसीडी के पास पैसों की कमी है। एमसीडी को जितना फंड 2015 से पहले मिलता था, उससे ज्यादा फंड हमने दिया है। ये सब रिकॉर्ड पर है। 2015 से पहले तक इनको लोन की किश्त और इंट्रेस्ट काटकर फंड दिया जाता था, मगर हमने वो भी काटना बंद कर दिया, ताकि इनको फंड की दिक्कत ना हो। जैसे-जैसे दिल्ली सरकार का बजट बढ़ा, तो बाय डिफॉल्ट इनको भी ज्यादा फंड मिलता चला गया। इन्होंने उन पैसों का क्या किया, ये हमें नहीं पता।

एमसीडी के एकीकरण से कितना फायदा होगा? क्या इससे निगम की वित्तीय स्थिति को सुधारने में मदद मिलेगी?
आम जनता को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि एमसीडी तीन है या एक, लोगों को तो केवल अपने इलाके में काम चाहिए, साफ सफाई चाहिए, अच्छे पार्क और सड़कें चाहिए। ये कौन करेगा, इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता। तीन निगम थे, तब भी लोग यही चाहते थे और अब एक एमसीडी होगी, तो उसमें भी लोग यही चाहेंगे।

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आपने अपने संठगन के कई लोगों और काफी सारे शिक्षित युवाओं को भी टिकट दिए हैं। इससे कितना फायदा होगा?
पढ़े लिखे युवा पार्षदों की मौजदूगी से एमसीडी की फंक्शनिंग में बहुत बदलाव आएगा और नए जोश के साथ काम होता दिखाई देगा। हमने अपने संगठन से जुड़े करीब 186 लोगों को टिकट दिए हैं। महिलाओं को भी तय कोटे से ज्यादा टिकट दिए हैं। हमने अपने वॉर्ड अध्यक्ष, विधानसभा अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष, युवा अध्यक्षों को भी मौका मिला है। इससे एक नई लीडरशिप डिवेपल होगी।

पर नए और युवा पार्षदों में अनुभव की कमी भी होगी, उसकी भरपाई कैसे करेंगे? क्या उन्हें कोई ट्रेनिंग दिलाएंगे?
बिल्कुल, जिस तरह हमने दिल्ली और पंजाब में अपने विधायकों की ट्रेनिंग करवाई, वैसे ही हम अपने पार्षदों की भी ट्रेनिंग करवाएंगे। बल्कि हमारी योजना है कि जिस तरह हमने दिल्ली सरकार में टीचर्स की नैशनल और इंटरनैशनल लेवल की ट्रेनिंग करवाई है, वैसे ही एमसीडी के सफाई कर्मचारियों, अफसरों और प्रमुख विभागों के अधिकारियों को भी ट्रेनिंग के लिए बाहर भेजेंगे।

एकीकृत एमसीडी में पहली मेयर कोई महिला बने, तो कैसा रहेगा?
इस बारे में मैं क्या सोचता हूं, यह मायने नहीं रखता। पार्टी संगठन के लोग और हमारे चुने हुए पार्षद मिलकर तय करेंगे कि मेयर कौन बनेगा। इस मामले में इमोशनल होने से ज्यादा टेक्नीकल होने की जरूरत है। निजी तौर पर मुझे यह लगता है कि पहला मेयर वो हो, जो एमसीडी से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने की दिशा में लीड कर सके, फिर चाहे वो कोई महिला हो या पुरुष।

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