महाराष्ट्र राजनीति: जयंत पाटिल ने BJP में आने का ऑफर ठुकराया तो पीछे लगा दी ईडी, सामना संपादकीय में बड़ा आरोप

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महाराष्ट्र राजनीति: जयंत पाटिल ने BJP में आने का ऑफर ठुकराया तो पीछे लगा दी ईडी, सामना संपादकीय में बड़ा आरोप

महाराष्ट्र राजनीति: जयंत पाटिल ने BJP में आने का ऑफर ठुकराया तो पीछे लगा दी ईडी, सामना संपादकीय में बड़ा आरोप

मुंबई:उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के मुखपत्र सामना संपादकीय में जयंत पाटिल के बहाने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा गया है। दरअसल सोमवार को एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल को ईडी ने अपने दफ्तर तलब किया था। संपादकीय में लिखा गया है कि शिवसेना के 40 विधायक ईडी और सीबीआई के डर से चूहों की तरह भागे। उनमें से कइयों पर जांच के समन और गिरफ्तारी के वारंट थे। उनके पाला बदलते ही बीजेपी ने उन्हें ईडी से अभय दे दिया, लेकिन जो बीजेपी की कुटिल साजिश का शिकार नहीं हुए। उनमें छगन भुजबल, अनिल देशमुख, नवाब मलिक, संजय राऊत जैसे नेता ईडी कार्रवाई की बलि चढ़ गए। जयंत पाटील ने भी बीजेपी की गुलामी स्वीकार करने से इनकार कर दिया। जिसके बाद ईडी ने उन्हें तुरंत तलब किया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि जयंत पाटील पर एनसीपी के कुछ विधायकों के साथ बीजेपी में शामिल होने का दबाव था। जब जयंत पाटील ने बीजेपी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया तो ईडी ने तुरंत उन्हें तलब किया और उनसे साढ़े नौ घंटे तक पूछताछ की। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है।

ईडी ने कई लोगों के साथ ऐसा किया है। फिलहाल हालात ऐसे हैं कि नवाब मलिक के खिलाफ अपराध भी झूठे साबित होंगे। मलिक ने सबूत के साथ समीर वानखेड़े पर भ्रष्टाचार, रंगदारी, आतंक आदि के आरोप लगाए। शाहरुख खान के बेटे आर्यन को ‘कॉर्डेलिया’ क्रूज मामले में ‘ड्रग्स’ रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। सुशांत सिंह राजपूत मामले में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को भी इसी तरह फंसाया गया था। इस तरह से कई बेगुनाहों की बलि ली गई। वानखेड़े के दरबार और कारभार का अब खुलासा हुआ है। वानखेड़े मामले में बीजेपी के कई नेताओं के हाथ सने हुए हैं और उनकी भी जांच होनी चाहिए।

बीजेपी नेता के घर होती थी वानखेड़े की बैठक
सामना संपादकीय में लिखा गया है कि खार में एक छुटभैये बीजेपी नेता के घर वानखेड़े और उनकी टोली की बैठकें और लेन-देन का व्यवहार होता था। कहा जाता है कि कई बार उस जगह पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता चाय-पान‌ के लिए आते-जाते थे। वानखेड़े का मामला सीधा-साधा नहीं है। इस मामले में बीजेपी पूरी तरह से डूबी हुई है। लेकिन जयंत पाटील की जांच करने वाली एजेंसी क्या इस बीजेपी गैंग की जांच करेगी? अनिल देशमुख को झूठे मामले में फंसाने के लिए परमबीर सिंह का इस्तेमाल किया गया।

मुकेश अंबानी के घर के सामने विस्फोटक रखने, मनसुख हिरेन की हत्या करने जैसी साजिशों में सीधे तौर पर जिनकी सहभागिता थी। उस परमबीर सिंह को शिंदे-फडणवीस की सरकार ने अब फिर से सेवा में शामिल कर लिया है। राज्य के पूर्व गृहमंत्री देशमुख पर आरोप लगाकर उन्हें जेल भेजने के लिए परमबीर को वर्तमान सरकार ने पुरस्कृत किया है। कल यह सरकार और केंद्रीय एजेंसी सचिन वझे और प्रदीप शर्मा को भी क्लीन चिट दे देगी। इस सरकार का कोई भरोसा नहीं है।

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