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महाराष्ट्र: कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग पर रिपोर्ट तैयार, जल्द एक्शन ले सकती है आलाकमान

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महाराष्ट्र: कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग पर रिपोर्ट तैयार, जल्द एक्शन ले सकती है आलाकमान

मुंबई: हाल ही में हुए विधान परिषद चुनाव (Legislative Council Election) में कांग्रेसी विधायकों की क्रॉस वोटिंग (Cross Voting) की जांच के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक बन कर मुंबई (Mumbai) आए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोहन प्रकाश (Mohan Prakash) बुधवार को वापस दिल्ली लौट गए हैं। महाराष्ट्र कांग्रेस (Maharashtra Congress) में हुई क्रॉस वोटिंग पर उन्होंने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है और जल्द ही वह कांग्रेस आलाकमान को रिपोर्ट सौंपने वाले हैं। इस रिपोर्ट में क्रॉस वोटिंग करने वाले सात कांग्रेसी विधायकों की पहचान भी की गई है। सूत्रों के अनुसार विधान परिषद चुनाव में पहली वरीयता के कांग्रेसी उम्मीदवार चंद्रकांत हंडोरे की हार के कारणों की मीमांसा और नेताओं की जिम्मेदारी को लेकर भी रिपोर्ट में विस्तार से उल्लेख किया गया है।

मोहन प्रकाश ने यह रिपोर्ट महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस और मुंबई रीजनल कांग्रेस के तमाम नेताओं से बातचीत करने के बाद तैयार की है। सूत्रों का कहना है कि इस रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि चंद्रकांत हंडोरे की हार की कहानी पार्टी के भीतर ही लिखी गई।

भीतरघात का शिकार हुए हंडोरे
पार्टी के भीतर हंडोरे को हराने की कहानी उसी वक्त आकार लेने लगी थी, जब हंडोरे और दूसरे उम्मीदवार भाई जगताप के लिए 22 वोट का कोटा निर्धारित करने की बात उठी थी। हालांकि, विधान परिषद चुनाव के लिए दिल्ली से प्रभारी बनकर आए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने इस मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद हंडोरे के लिए 29 वोट और जगताप के लिए पहली वरीयता के 15 वोट निर्धारित किए गए थे। भाई जगताप को अपनी जीत के लिए 12 अन्य विधायकों का समर्थन बाहर से जुटाना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसका भी उल्लेख है कि जगताप ने अपनी जीत के लिए बनाई रणनीति की जानकारी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को नहीं दी थी।

रिपोर्ट में कांग्रेस विधायक दल के नेता बालासाहेब थोरात और पूर्व मंत्री अशोक चव्हाण की भूमिका पर भी टिप्पणी की गई है। कांग्रेस विधायक दल के नेता के रूप में थोरात ने ही हंडोरे के लिए पहली वरीयता के वोट देने वाले विधायकों को नामित किया था। वहीं, अशोक चव्हाण की भूमिका को लेकर भी रिपोर्ट में टिप्पणियां की गई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पार्टी को इस पूरे प्रकरण को चंद्रकांत हंडोरे की हार के रूप में नहीं पार्टी की हार के रूप में देखने की जरूरत है।

हंडोरे की जीत सुनिश्चित थी
मोहन प्रकाश ने मुंबई में जिन नेताओं से चर्चा की उनमें से एक ने कहा कि हमने पार्टी पर्यवेक्षक को बताया है कि दरअसल यह मामला दलित बनाम मराठा है। हंडोरे दलित थे और उनकी जीत सुनिश्चित थी, क्योंकि उनकी जीत के पार्टी के पास पर्याप्त संख्या बल था, इसके बाद भी पार्टी के मराठा नेताओं के कारण कांग्रेस को शर्मिंदा होना पड़ा। अगर दूसरा उम्मीदवार जिताने की क्षमता नहीं थी, तो दूसरा उम्मीदवार दिया ही नहीं जाना चाहिए था।

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लिखित में लिया गया जवाब
केंद्रीय पर्यवेक्षक मोहन प्रकाश ने पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से लिखित में उनके जवाब लिए हैं। अलाव इसके विधायकों और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के बयान भी लिपिबद्ध किए गए हैं। इसके लिए मोहन प्रकाश अपने साथ दिल्ली से एआईसीसी के एक व्यक्ति को साथ लाए थे, जिसने सभी के बयान रिकॉर्ड किए।

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