महाराष्‍ट्र: ऊपर-ऊपर डैमेज कंट्रोल, भीतर जारी सिर फुटव्वल, आखिर क्या हुआ था मंगलवार को जानिए

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महाराष्‍ट्र: ऊपर-ऊपर डैमेज कंट्रोल, भीतर जारी सिर फुटव्वल, आखिर क्या हुआ था मंगलवार को जानिए

महाराष्‍ट्र: ऊपर-ऊपर डैमेज कंट्रोल, भीतर जारी सिर फुटव्वल, आखिर क्या हुआ था मंगलवार को जानिए

मुंबई: शिवसेना (शिंदे) की तरफ से बुधवार को अखबारों में एक नया विज्ञापन जारी कर मंगलवार को दिए गए विज्ञापन से हुए डैमेज को कंट्रोल करने की कोशिश तो की गई, लेकिन भीतर ही भीतर बीजेपी और शिंदे गुट के नेताओं में आपसी सिर फुटव्वल जारी रही। इधर, बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को भी शिंदे के साथ मंच साझा करने से कन्नी काट ली। फडणवीस दिन भर सह्याद्रि गेस्ट हाउस में सरकारी बैठकें करते रहे, परंतु शाम को मंत्रालय के पास स्थित यशवंतराव चव्हाण सभागृह में आयोजित राज्य सड़क परिवहन महामंडल के अमृत महोत्सव कार्यक्रम में नहीं गए। इससे पहले मंगलवार को भी उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ कोल्हापुर में आयोजित सरकारी कार्यक्रम ‘सरकार आपके द्वार’ में जाने का कार्यक्रम रद्द कर दिया था।

बुधवार को सत्ता में सहयोगी बीजेपी और विपक्ष के लगातार हमले के बाद शिंदे सेना बैकफुट पर आ गई। उसने डैमेज कंट्रोल करने के लिए जो नया विज्ञापन जारी किया, उसमें मोदी-शाह, बालासाहेब-आनंद दिघे के साथ-साथ शिंदे-फडणवीस के फोटो और दोनों पार्टियों के चुनाव चिह्न भी छापे गए। नए विज्ञापन में दावा किया गया है कि 84 प्रतिशत मतदाताओं को लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व ने देश को विकास की दृष्टि दी है और 62 प्रतिशत मानते हैं कि ‘डबल इंजन’ की सरकार राज्य में विकास कार्य तेजी से कर रही हैं। मंगलवार के विज्ञापन में सर्वे का कोई सोर्स नहीं दिया गया था, लेकिन बुधवार को बताया गया कि इसका सोर्स एक टीवी चैनल है।

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आखिर क्या हुआ था मंगलवार को
मंगलवार को शिवसेना (शिंदे) की तरफ से राज्यभर के अखबारों में विज्ञापन देकर एक सर्वे के हवाले से यह दावा किया था कि मुख्यमंत्री पद के लिए एकनाथ शिंदे की तुलना में देवेंद्र फडणवीस राज्य की जनता में कम लोकप्रिय हैं। इस विज्ञापन में ‘राष्ट्र में मोदी, महाराष्ट्र में शिंदे’ का नया नारा देकर और सिर्फ मोदी-शिंदे की तस्वीर छापकर फडणवीस को पूरी तरह दरकिनार किया गया था। इतना ही नहीं, इस विज्ञापन में बालासाहेब ठाकरे का फोटो भी नहीं था।

‘विज्ञापनों पर खर्च किसने किया’
शिंदे की शिवसेना और बीजेपी के बीच चल रहे विज्ञापन विवाद पर विधानसभा में नेता विपक्ष अजित पवार ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शिवसेना के मंत्री कह रहे हैं कि पार्टी के किसी शुभचिंतक ने यह विज्ञापन दिया है। सभी को मालूम है कि यब कितना बड़ा खर्च है। आखिर राज्य की जनता को पता तो चले कि इतना खर्च करने वाला शुभचिंतक कौन है? उन्होंने कहा कि शिंदे सेना का नया विज्ञापन पिछले विज्ञापन की गलती दुरुस्त करने का प्रयास है।

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‘मेंढक, हाथी नहीं बन सकता’
शिंदे सेना के डैमेज कंट्रोल के बाद भी बुधवार को बीजेपी के सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने मंगलवार के विज्ञापन को लेकर मुख्यमंत्री शिंदे की तुलना मेंढक से कर दी। उन्होंने टिप्पणी की, ‘मेंढक कितना भी फूल जाए, हाथी नहीं बन सकता।’

‘… तो बीजेपी की क्या औकात’
बीजेपी सांसद डॉ. अनिल बोंडे द्वारा शिंदे की तुलना मेंढक से किए जाने के बाद शिंदे समर्थक विधायक संजय गायकवाड ने जवाब दिया, ‘एकनाथ शिंदे बाघ हैं। उनके 50 बाघों की बदौलत ही बीजेपी के विधायकों को मंत्री पद मिला है।’

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