महंगाई पर मंडराया ‘अल नीनो’ का खतरा, चावल, चीनी, दाल, सब्जी के बढ़ते दाम ने बढ़ाई टेंशन

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महंगाई पर मंडराया ‘अल नीनो’ का खतरा, चावल, चीनी, दाल, सब्जी के बढ़ते दाम ने बढ़ाई टेंशन

महंगाई पर मंडराया ‘अल नीनो’ का खतरा, चावल, चीनी, दाल, सब्जी के बढ़ते दाम ने बढ़ाई टेंशन

नई दिल्ली: अल नीनो का खाद्य चीजों के उत्पादन पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए सरकार पूरी तरह से जुट गई है। अल नीनो से चावल, चीनी, दाल समेत मौसमी सब्जियां लौकी, भिंडी, करेला, टिंडा और ग्वार फली के साथ प्याज का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में खाद्य चीजों की कीमतों और महंगाई पर कंट्रोल करने को लेकर रणनीति पर काम शुरू हो गया है। सरकार को सबसे अधिक इस बात का डर है कि अगर खाद्य चीजों की कीमतें फिर से बढ़ने लगीं तो रिटेल महंगाई दर फिर बढ़ सकती है। इससे इकॉनमी को रफ्तार देने का काम बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा इसका असर सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर पड़ना लाजिमी है। चुनावी साल में सरकार महंगाई को लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहती।सूत्रों के अनुसार कृषि और खाद्य मंत्रालय ने यह अनुमान लगाना शुरू कर दिया है कि अल नीनो से किन-किन खाद्य वस्तुओं का उत्पादन और सप्लाई कम हो सकता है। इसकी भरपाई के लिए क्या-क्या कदम उठाये जा सकते हैं। इन उपायों पर चर्चा शुरू हो चुकी है ताकि जरूरत के हिसाब से कदम उठाए जा सकें।

कुछ भी हो सकता है

इंडियन चैंबर ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर के चेयरमैन डॉ. एम. जे. खान का कहना है कि अल नीनो दरअसल पृथ्वी को गरम करने वाली मौसमी घटना है। इससे बारिश कम होगी, सूखा भी आ सकता है। मौसम में बदलाव होगा। ऐसे में खरीफ फसलों का उत्पादन कम होने की पूरी आशंका है। चावल, चीनी और दालों के उत्पादन पर भारी असर पड़ सकता है। ऐसे में इसका निदान निकालना आसान नहीं है। डिमांड और सप्लाई के अंतर को अगर हम कम कर पाएं तो निश्चित तौर पर कीमतें काफी हद तक स्थिर रह सकती हैं। मगर यह काम इतना आसान नहीं है। आपको यह देखना होगा कि आपके पास इस अंतर को कम करने के लिए कितने सोर्स हैं। किस तरह से आप इसे कम कर सकते हैं। स्थिति निश्चित तौर पर गंभीर है। अब यह देखना होगा कि अल नीनो का असर एग्रीकल्चर पर कितना होता है।

सरकार की मजबूरी

चीनी, चावल और दालों की कीमतों को लेकर एक्सपर्ट पहले ही चेतावनी दे चुके हैं। इंडियन शुगर मिल्स असोसिएशन (ISMA) ने पहले ही चीनी के उत्पादन का अनुमान घटा दिया है। ISMA ने 2022-23 के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान 3.40 करोड़ टन से घटाकर 3.28 करोड़ टन कर दिया है। इसके अनुसार भारत के अलावा थाईलैंड, चीन, पाकिस्तान में चीनी का उत्पादन घटा है। इधर एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुनिया भर में चीनी का उत्पादन कम होने से इसका आयात भी काफी महंगा हो सकता है। ऐसे में अगर देश में चीनी की डिमांड बढ़ी तथा सप्लाई कम हुई तो चीनी के दामों में तेजी आ सकती है। चावल को लेकर स्थिति भी ठीक नहीं है। बुवाई में कमी हुई तथा अल नीनो का असर देखने को मिला तो चावल के थोक और रिटेल दामों में बढ़ोतरी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। कमोडिटी मार्केट के एक्सपर्ट एस. के. सुरेश का कहना है कि अल नीनो के असर से अगर मॉनसून की चाल में गड़बड़ी हुई तो चावल के दाम बढ़ सकते हैं। फिलहाल चावल की औसत रिटेल कीमत 40 रुपये है। इसके अलावा मौसमी सब्जियों का उत्पादन कम हुआ तो फिर अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्थिति क्या होगी।

चने की दाल की बढ़ती जमाखोरी पर सरकार अलर्ट

दालों की कीमतों पर काबू करने के लिए सरकार ने अरहर और उड़द की दालों पर स्टॉक लिमिट लागू कर दी है। मगर अब चने की दाल की जमाखोरी से सरकार की परेशानी बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार सरकार अब चने की दाल की जमाखोरी करने वालों के खिलाफ कड़े एक्शन लेने की तैयारी में है। सरकार ने राज्यों से इस बारे में बातचीत शुरू कर दी है। सरकार चाहती है कि लोग इस दाल का अधिक इस्तेमाल करें जिससे की दूसरे दालों पर खपत का दबाव कम हो। इसके लिए सरकार लोगों में चने की दाल के इस्तेमाल को प्रचारित करेगी। एक सीनियर अफसर ने कहा कि इस वक्त चने की दाल की कीमत 75 से 80 रुपये प्रति किलो पर चल रही है। मार्केट में इसकी डिमांड और उपलब्धता को लेकर कोई दिक्कत नहीं है। वैसे चने की डिमांड अरहर और उड़द की दालों से कम है। मगर डर इस बात का है कि चने की दाल की जमाखोरी बढ़ी तो इसके दाम भी 100 रुपये प्रति किलो पर पहुंच सकती है। इसी बात को लेकर सरकार चिंतित है। सूत्रों के अनुसार अरहर और उड़द की दालों पर स्टॉक लिमिट लागू होने के बाद थोक व्यापारियों ने अब चने की दाल पर ज्यादा मुनाफा काटना शुरू कर दिया है। सप्लाई कम करने के लिए चने की जमाखोरी बढ़ गई है।

राज्य गेहूं के स्टॉक का खुलासा करें : केंद्र

गेहूं पर स्टॉक लिमिट लगाने के बाद केंद्र सरकार ने मंगलवार को राज्य सरकारों को गेहूं स्टॉक सीमा आदेश का पालन सुनिश्चित करने और स्टॉक का खुलासा करने का निर्देश दिया। केंद्र के अनुसार इससे गेहूं की जमाखोरी रुकेगी तथा सही तरीके से गेहूं की सप्लाई मार्केट में हो पाएगी। राज्य के खाद्य सचिवों के साथ बैठक में खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने राज्य सरकारों से कहा कि वे गलत तरीकों की जांच करने और गेहूं की उपलब्धता में पारदर्शिता लाने के लिए थोक विक्रेताओं/व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं के पास मौजूद गेहूं के स्टॉक का खुलासा करें।

खाद्य मंत्रालय की ओर से एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि सरकार खाद्य चीजों की जमाखोरी और अटकलों को रोकना चाहती है। खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल (evegoils.nic.in) पर डेटा भरने में आसानी के लिए स्टॉक जमा करने के संबंध में एक यूजर मैनुअल भी राज्य सरकारों के साथ साझा किया गया है। यदि उनके पास स्टॉक निर्धारित सीमा से अधिक है, तो उन्हें इस अधिसूचना के जारी होने के 30 दिनों के भीतर इसे निर्धारित स्टॉक सीमा तक लाना होगा।

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