भितिहरवा गांधी आश्रम नेताओं के लिए खुद के उत्थान का केंद्र, नीतीश भी मत्था टेकने से करते हैं परहेज !

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भितिहरवा गांधी आश्रम नेताओं के लिए खुद के उत्थान का केंद्र, नीतीश भी मत्था टेकने से करते हैं परहेज !

पश्चिम चंपारण : किसी ने सच कहा है कि सियासत मौका और वक्त देखकर सबकुछ का प्रयोग अपने हित में करने से नहीं हिचकती। पश्चिम चंपारण का भितिहरवा इसका जीता-जागता उदाहरण है। रणनीतिकार से राजनीतिज्ञ बने प्रशांत किशोर ने भितिहरवा से अपनी जन सुराज यात्रा शुरू की है। उसके बाद चर्चा होने लगी कि आखिर नेता भितिहरवा गांधी आश्रम में मत्था टेककर सिर्फ अपना सियासी स्वार्थ सिद्धी करते हैं। नेता खुद का उत्थान तो कर लेते हैं। भितिहरवा को उपेक्षा का दंश झेलने के लिए छोड़ देते हैं।

भितिहरवा का हमेशा सियासी इस्तेमाल
राजनीतिक हस्तियों के लिए भितिहरवा उनके सियासी उत्थान का केंद्र माना जाता है। इसलिए, नेता अपने राजनीतिक कैरियर को सियासी ऊंचाई देने के लिए भितिहरवा पहुंचते हैं। वहां गांधी आश्रम में मत्था टेकते हैं। सिद्धांत बघारते हैं। यात्रा शुरू करते हैं। कई तरह की घोषणाएं करते हैं। लेकिन, गांधी के उन मूल सिद्धांतों को भूल जाते हैं। जिसकी बुनियाद पर उन्होंने भितिहरवा से संघर्ष की नई कहानी लिख डाली। राजनीतिज्ञों को ये बिल्कुल पता नहीं होता कि गांधी जब पश्चिम चंपारण पहुंचे, तो उन्हें सबसे ज्यादा उपेक्षित भितिहरवा दिखा। जहां उन्होंने अपना आश्रम स्थापित किया।

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गांधी के आदर्श भूल गए नेता
भितिहरवा में दलितों की संख्या अधिक थी। महात्मा गांधी ने मुसहर जाति की आबादी के बीच जाकर कस्तूरबा स्कूल की स्थापना की। दलितों के उत्थान और जागरूकता के लिए कई अभियान चलाए। स्वच्छता को लेकर लोगों को जागरूक किया। वहीं इलाके के ओडीएफ घोषित होने के बाद भी स्थिति बद से बदतर है। स्वच्छता का आभाव है। कस्तुरबा मध्य विद्यालय की स्थिति दयनीय है। समय-समय पर जितने भी लोग भितिहरवा आए, वे बदलते वक्त के साथ सत्ता के शीर्ष तक पहुंचे। लेकिन, भितिहरवा का कल्याण नहीं हुआ।

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मुख्यमंत्री नीतीश भी नहीं जाते मत्था टेकने
स्थानीय लोगों के मुताबिक भितिहरवा आश्रम जाने से बिहार के सीएम नीतीश कुमार भी परहेज करते हैं। स्थानीय समाजसेवी बताते हैं कि नीतीश कुमार गांधी को अपना आदर्श मानते हैं, लेकिन आश्रम जाने से बचते हैं। नीतीश कुमार ने गांधी के सहयोगी रहे राजकुमार शुक्ल की मूर्ति का अनावरण भी रिमोट कंट्रोल से किया था। हालांकि, स्थानीय लोगों में नेताओं को लेकर चर्चा जैसी भी हो। भितिहरवा आज भी विकास की आस में नेताओं की राह देख रहा है। गांधी आश्रम पर मत्था टेकने के बाद कई नेता सियासी शीर्ष पर पहुंचे, लेकिन उसके बाद पीछे मुड़कर कभी भी भितिहरवा की सुध लेने की कोशिश नहीं की।

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