भारत में कैसा है अफगानी म्‍यूजिक का असर, राष्‍ट्रीय वाद्य यंत्र ‘रबाब’ को बचाने की कोशिश

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भारत में कैसा है अफगानी म्‍यूजिक का असर, राष्‍ट्रीय वाद्य यंत्र ‘रबाब’ को बचाने की कोशिश

अफगानिस्‍तान इन दिनों अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। तालिबान लगातार वहां पर हिंसा कर सभी इलाकों पर कब्‍जा कर रहा है। अफरा-तफरी के बीच दहशत का माहौल है। आज भले ही अफगानिस्‍तान की स्थिति बेहद खराब हो लेकिन एक वक्‍त था जब वहां का आर्ट, लिटरेचर, म्यूजिक और सिनेमा खूब पॉप्‍युलर हुआ करता था। बॉलिवुड फिल्‍में हाउसफुल होती थीं तो भारतीय स्‍टार्स हर अफगानी के दिल में बसते थे। हालांकि, अब भी सोशल मीडिया के जरिए उसकी झलक देखने को मिल जाती है। यूं तो हारमोनियम, तबला, गिटार, पियानो, बांसुरी जैसे वाद्य यंत्रों के बारे में आपने खूब सुना और जाना होगा लेकिन क्‍या आपको मालूम है कि अफगानिस्‍तान का सबसे मशहूर वाद्य यंत्र कौन सा है जिससे निकली धुन सीधे दिलों को टकराती है और फिजाओं में सिर्फ संगीत और बस संगीत घुल जाता है। आज हम आपको इसी के बारे में बता रहे हैं…

दरअसल, जिस वाद्य यंत्र की हम बात कर रहे हैं, उसे रबाब (Rubab) कहते हैं जो अफगानिस्‍तान का नैशनल म्‍यूजिक इंस्‍ट्रुमेंट है। इसका इस्‍तेमाल कई हिंदी फिल्‍मों में भी हुआ है। रबाब की उत्‍पत्ति 7वीं सदी में हुई और इसकी जड़ें मध्‍य अफगानिस्‍तान में मिलती हैं। इसका जिक्र फारसी किताबों में और कई सूफी कवियों ने अपनी कविताओं में किया है। इसे ‘यंत्रों का शेर’ भी कहा जाता है। क्‍लासिकल अफगान संगीत में रबाब सबसे जरूरी इंस्‍ट्रुमेंट होता है। इसे ‘काबुली रबाब’ भी कहते हैं। काबुली रबाब दिखने में भारतीय रबाब से जरा सा अलग होता है। यह उत्‍तर भारतीय यंत्र सरोद का पूर्वज है और रबाब को मुख्‍य तौर पर अफगान, पश्‍तून, ताजिक, कश्‍मीरी और फारसी क्‍लासिकल म्‍यूजिशन्‍स बजाते हैं।

कैसे बनता है रबाब?

‘रबाब’ डबल चैंबर्ड lute है और इसकी बॉडी लकड़ी के सिंगल पीस से बनी होती है। ऊपरी हिस्‍सा बाउलनुमा होता है जो साउंड चैंबर प्रोवाइड करता है। इसमें तीन मेलोडी स्ट्रिंग्‍स (तार), दो या तीन ड्रोन स्ट्रिंग्‍स और 15 सिम्‍पैथेटिक स्‍ट्रिंग्‍स होती हैं। बता दें, स्ट्रिंग वाइबरेटिंग एलिमेंट होती हैं जो साउंड प्रड्यूस करती हैं। यह वाद्य यंत्र शहतूत के पेड़ के तने और बकरी की खाल से तैयार होता है जबकि स्ट्रिंग्‍स बकरियों की आंत से बनती हैं।

सिखों द्वारा इस्‍तेमाल किया गया पहला इंस्‍ट्रुमेंट
बहुत से लोगों को यह बात नहीं मालूम होगी कि रबाब सिखों द्वारा यूज किया गया पहला इंस्‍ट्रुमेंट था। इसे भाई मर्दाना ने यूज किया था जो कि गुरु नानक के साथी थे। जब भी कोई शबद गुरु नानक को पता चलता, वह उसे गाते और भाई मर्दाना उसे रबाब पर बजाते थे। वह ‘रबाबी’ रूप में जाने जाते थे। रबाब को बजाने की परंपरा ‘नामधारी’ जैसे सिखों ने जारी रखी।

ये हैं मशहूर रबाब प्‍लेयर्स
रबाब से धुन निकालने में उस्‍ताद मोहम्‍मद ओमर (काबुल, अफगानिस्‍तान), उस्‍ताद रहीम खुशनवाज (हेरात, अफगानिस्‍तान), उस्‍ताद हुमायूं सखी (काबुल, अफगानिस्‍तान), उस्‍ताद रमीन सकीजदा (अफगानिस्‍तान), उस्‍ताद सादिक समीर (अफगानिस्‍तान), उस्‍ताद शाहजेब खान (नौशेरा पाकिस्‍तान), उस्‍ताद वकार (पेशावर, पाकिस्‍तान), जॉन बैली (प्रफेसर, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन), खालिद अरमान (काबुल, अफगानिस्‍तान), दाउद खान (काबुल, अफगानिस्‍तान) माहिर रहे हैं। इनमें से उस्‍ताद मोहम्‍मद ओमर और उस्‍ताद रहीम खुशनवाज अब इस दुनिया में नहीं हैं।

बॉलिवुड में अफगान और म्‍यूजिक
हिंदी गानों और फिल्‍मों की बात करें तो फिल्‍म जंजीर के गाने मशहूर गाने ‘यारी है ईमान मेरा’ में रबाब ही बजा है। दिवंगत ऐक्‍टर प्राण पर फिल्‍माए गए इस गाने में वह इस यंत्र के साथ ही नजर आते हैं। वहीं, फिल्‍म शोले के गाने ‘महबूबा महबूबा’ में भी रबाब का इस्‍तेमाल किया गया है। गाने में इसे ऐक्‍टर जलाल आगा बजाते हुए दिखाई देते हैं। 1980 में आई उस समय की सबसे महंगी फिल्‍म अब्‍दुल्‍लाह के गाने ‘ऐ खुदा हर फैसला तेरा मुझे मंजूर है’ में भी रबाब की मौजूदगी है। रबाब की बात हो और 1985 में आई मल्‍टीस्‍टारर फिल्‍म गुलामी के गाने ‘जिहाले-ए-मिस्‍किन’ का जिक्र न हो तो कहानी अधूरी है। 2015 की फिल्‍म फैंटम के गाने ‘अफगान जलेबी’ में भी अफगानी म्‍यूजिक का टच है। इसके अलावा फिरोज खान-हेमा मालिनी स्‍टारर ‘धर्मात्‍मा’, अमिताभ बच्‍चन-श्रीदेवी-डैनी स्‍टारर ‘खुदा गवाह’, जॉन अब्राहम-अरशद वारसी स्‍टारर ‘काबुल एक्‍सप्रेस’ जैसी फिल्‍मों की शूटिंग अफगानिस्‍तान में ही हुई है। ‘धर्मात्‍मा’ पहली फिल्‍म थी जो अफगानिस्‍तान में फिल्‍माई गई। इसके म्‍यूजिक में अफगानी और वेस्‍टर्न फ्यूजन था। ‘खुद गवाह’ काबुल में 10 हफ्तों तक हाउसफुल रही थी। अमिताभ बच्‍चन की वहां जबरदस्‍त पॉप्‍युलैरिटी है। इन फिल्‍मों में अफगानी कल्‍चर और म्‍यूजिक की झलक देखने को मिलती है।

Pran In Zanjeer

Jalal Agha In Sholay

Amitabh Bachchan In Khuda Gawah

Amitabh Bachchan In Khuda Gawah

अब भारत में क्‍या है स्‍थिति?
मौजूदा दौर में लोग इस पारंपरिक वाद्य यंत्र को भूल गए हैं। हालांकि, कुछ ऐसे भी लोग हैं जो इसे फिर से जीवित करके युवा पीढ़ी को उसकी ओर आकर्षित करना चाहते हैं। मुख्‍य तौर पर रबाब बजाने वाले म्‍यूजिशन्‍स जम्‍मू और कश्‍मीर में मिलते हैं। श्रीनगर के सबसे युवा रबाब आर्टिस्‍ट अदनान मंजूर, घाटी के ट्रडिशनल म्‍यूजिक को सोशल मीडिया के जरिए ग्‍लोबल प्‍लैटफॉर्म दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। 21 साल के अदनान उन युवाओं के लिए इंस्पिरेशन बन गए हैं जो रबाब बजाना चाहते हैं। अदनान ने नवभारत टाइम्‍स ऑनलाइन से खास बातचीत में बताया कि उन्‍होंने 15 साल की उम्र में रबाब बजाना शुरू किया था लेकिन बचपन में गिटार सीखने के बाद फिर उनका रबाब के लिए प्‍यार बढ़ता ही चला गया।

Adnan Manzoor Playing Rubab

Adnan Manzoor Playing Rubab


‘तुम्‍हें दिल्‍लगी’ हुआ खूब पॉप्‍युलर

अदनान के वीडियोज अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हैं जिन पर मिलियन्‍स व्‍यूज हैं। वह रबाब के बारे में बताते हैं, ‘रबाब ट्रडिशनल इंस्‍ट्रुमेंट है। यह गिटार जैसा नहीं है। इसमें हर गाने के हिसाब से अलग-अलग ट्यून फिट करनी पड़ती है। मुझे यह सबकुछ उस्‍ताद इरफान बिलाल से सीखने को मिला। यह जरूर है कि आर्टिस्‍ट के तौर पर हर कश्‍मीरी को संघर्ष करना पड़ता है क्‍योंकि यहां प्‍लैटफॉर्म की कमी है। यही वजह है कि मैंने सोशल मीडिया का इस्‍तेमाल करना शुरू किया। मैंने बॉलिवुड और मेटल म्‍यूजिक के साथ ट्रडिशनल इंस्‍ट्रुमेंट रबाब को शामिल किया है। नुसरत फतेह अली खान के मशहूर गाने ‘तुम्‍हें दिल्‍लगी’ का कवर अब खूब चर्चा में है जिसे मैंने रबाब पर ही प्‍ले किया है।’

https://www.youtube.com/watch?v=o6Bur2v-iLo

लोगों के आते हैं मेल्‍स और मेसेज
कश्‍मीर यूनिवर्सिटी में इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स इंजिनियरिंग के थर्ड ईयर के स्‍टूडेंट मंजूर कहते हैं, ‘पढ़ाई और म्‍यूजिक दोनों को मैनेज करने में थोड़ी मुश्‍किल होती है लेकिन हो जाता है। मेरे पास तो रबाब सिखाने के लिए रोज दो से तीन लोगों के मेल्‍स और मेसेज आते हैं। कोविड को वजह से अभी ऑनलाइन क्‍लासेस लेता हूं। मैं चाहता हूं कि यह परंपरा जारी रहे और अगर मैं इसकी प्रेरणा हूं तो इसकी खुशी है। मुझे लगता है कि कि युवाओं का रूझान ड्रग्‍स के बजाय स्‍पॉर्ट्स और म्‍यूजिक में होना चाहिए। यह कहना गलत नहीं होगा कि अब रबाब का रिवाइवल हो रहा है।’

Adnan Manzoor On Rubab

बॉलिवुड में भी मिले बढ़ावा
अदनान ने बताया कि उन्‍होंने कश्‍मीर में ‘बैटल ऑफ बैंड्स’ नाम से इंस्‍ट्रुमेंट्स का शो हुआ था जिसमें वह विनर थे। इसके अलावा ‘शौर्य’ नाम से एक शो हुआ था जिसे म्‍यूजिक कंपोजर ए आर रहमान और सिंगर सुखविंदर सिंह ने मिलकर ऑर्गनाइज किया था। शो में अदनान की परफॉर्मेंस से सभी इम्‍प्रेस हुए और उन्‍हें मुंबई में प्रोग्राम का कॉन्‍ट्रैक्‍ट मिल गया। कोविड खत्‍म होने के बाद उनके पास कई प्रॉजेक्‍ट्स हैं। इसके अलावा अदनान ने ‘गोल्‍डन वॉइस’ नाम का शो किया जिसमें हिमेश रेशमिया जज थे। उसमें वह सेकंड पोजिशन पर थे। अदनान कहते हैं कि रबाब की पहुंच बॉलिवुड में धीरे-धीरे बढ़ेगी जो पिछले कुछ वर्षों में खो गई थी। बता दें, अदनान के अलावा कुछ और भी म्‍यूजिशन्‍स हैं जो यूट्यूब और अलग-अलग प्‍लैटफॉर्म्‍स पर रबाब बजाते हुए अपने वीडियोज पोस्‍ट करते हैं।



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