बिहार : मोकामा में अनंत का जादू या तेजस्वी का, उपचुनाव का डेटा देखकर इतनी खुश क्यों बीजेपी? जानिए

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बिहार : मोकामा में अनंत का जादू या तेजस्वी का, उपचुनाव का डेटा देखकर इतनी खुश क्यों बीजेपी? जानिए

बिहार विधानसभा की तीन सीटों पर हुए उपचुनाव में सत्तारूढ़ महागठबंधन को दो सीट पर हार का सामना करना पड़ा। वहीं, उपचुनाव में दो सीटों पर जीत हासिल करने वाली बीजेपी का कहना है कि बिहार की जनता ने आने वाले चुनाव का संकेत दे दिया है। जब से नीतीश कुमार ने बीजेपी का साथ छोड़ा, तब से ही भारतीय जनता पार्टी हमलावर है।

 

अनंत सिंह और नीतीश कुमार (फाइल)
नील कमल, पटना : बिहार विधानसभा के तीन सीटों पर हुए उपचुनाव में दो पर बीजेपी ने जीत दर्ज की। अब सीटों गंवाने वाली सत्तारूढ़ महागठबंधन की ओर से बीजेपी को नसीहतें मिल रही है। सत्ताधारी दल के नेता कह रहे हैं कि मोकामा में मिली हार पर बीजेपी क्यों नहीं बोल रही? अब बीजेपी नेताओं ने जवाब दिया है। विपक्षी पार्टी का कहना है कि मोकामा में आरजेडी या महागठबंधन की जीत नहीं बल्कि ये जीत, अनंत सिंह की है। मोकामा विधानसभा उपचुनाव में जेडीयू के कार्यकर्ता और नेता बीजेपी के साथ काम कर रहे थे। अपने वोटरों को बीजेपी के पक्ष में मतदान करने के लिए उत्साहित कर रहे थे।

क्या उपचुनाव ने बता दिया 2025 चुनाव का ट्रेंड?

बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद विधानसभा की तीन सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी अपने प्रदर्शन से काफी खुश हैं। प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल का कहना है कि इस उपचुनाव में बीजेपी अकेले दम पर चुनाव लड़ रही थी। जबकि महागठबंधन के उम्मीदवार को जिताने के लिए सात दल के साथ सरकारी अमला भी लगा हुआ था। बावजूद इसके गोपालगंज और कुढ़नी में बीजेपी की जीत हुई। मोकामा में बीजेपी का वोट परसेंटेज का बढ़ा। बीजेपी के लिए शुभ संकेत है। तीनों सीट पर हुए उपचुनाव में सबसे बुरा हाल जेडीयू का हुआ। नीतीश कुमार का महागठबंधन की सरकार बनाने का फैसला जनता को पसंद नहीं आया। नीतीश कुमार के फैसले की वजह से जेडीयू के कार्यकर्ता भी बीजेपी के पक्ष में आ चुके हैं। आने वाले चुनाव में जनता इसी तरह से महागठबंधन के सभी दलों को करारा जवाब देगी। जनता का मूड बता रहा है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 40 सीट और 2025 के विधानसभा चुनाव में अपने दम पर बिहार में सरकार बनाएगी।

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‘अनंत सिंह की जीत को अपनी जीत न बताएं’

बीजेपी के पूर्व विधायक और प्रदेश प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि तेजस्वी यादव मोकामा में मिली आरजेडी की जीत को अपनी जीत ना समझें। मोकामा विधानसभा सीट पर नीलम देवी की जीत निश्चित तौर पर बाहुबली पूर्व विधायक अनंत सिंह की जीत है। प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि जेडीयू के कार्यकर्ताओं ने मोकामा सीट पर भी आरजेडी को हराने के लिए पूरी ताकत लगा दी। मोकामा में भी आरजेडी की हार हो जाती लेकिन मतदान के दिन अनंत सिंह की वजह से जनता ने उनके पक्ष में मतदान कर जीत दिलाई। इसलिए मोकामा में भी आरजेडी को हार का ही सामना करना पड़ा है क्योंकि अनंत सिंह की जगह कोई दूसरा उम्मीदवार होता तो निश्चित तौर पर बीजेपी उम्मीदवार को वहां जीत मिलती।

मोकामा में बीजेपी का वोट प्रतिशत बढ़ा

मोकामा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में हार के बावजूद बीजेपी खुश है। 2020 में जेडीयू के उम्मीदवार को लगभग 35 हजार वोट से हार हुई थी। अनंत सिंह की पत्नी को 2022 के उपचुनाव में महज 17 हजार वोट से जीत मिली। मोकामा सीट पर RJD उम्मीदवार नीलम देवी को 79,744 वोट मिले, जबकि BJP की सोनम देवी को 62,903 वोट मिले। वोट प्रतिशत की बात की जाए तो नीलम देवी को 53.44 और सोनम देवी को 42.22 प्रतिशत वोट हासिल हुए। 1995 के बाद 2022 के उपचुनाव में अपना उम्मीदवार उतारकर 60 हजार से अधिक वोट हासिल कर बीजेपी खुश है। बीजेपी को ये लगता है कि थोड़ी मेहनत करने पर वो आगामी चुनाव में सीट पर कब्जा करने में कामयाब होगी।

छह चुनाव से बाहुबलियों के कब्जे में मोकामा सीट

मोकामा विधानसभा क्षेत्र पर पिछले 30 साल से बाहुबलियों का ही कब्जा रहा है। पहले अनंत सिंह के बड़े भाई RJD से विधायक हुआ करते थे। इसके बाद सूरजभान सिंह ने वहां से चुनाव जीता था। अब 2005-2022 तक इलाके में अनंत सिंह का ही वर्चस्व कायम है। 2005 के फरवरी और नवंबर में हुए विधानसभा के चुनाव में अनंत सिंह ने JDU के टिकट पर जीत हासिल की। इसके बाद 2010 में भी उन्होंने जेडीयू के टिकट पर ही चुनाव लड़ा और बड़ी जीत हासिल की थी। इन तीनों चुनावों में अनंत सिंह ने 30 हजार से अधिक मतों से अपने विरोधियों को हराया। 2015 के विधानसभा चुनाव के पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से दूरी बढ़ने की वजह से अनंत सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया। 2015 में उन्होंने जेडीयू के उम्मीदवार को 18 हजार से अधिक वोटों से हराया। जबकि 2015 में RJD भी JDU के साथ थी। बावजूद इसके अनंत सिंह ने बड़ी जीत हासिल की। उन्होंने ये साबित किया कि क्षेत्र की जनता पर उनकी पकड़ मजबूत है। 2020 में अनंत सिंह ने आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ा और लगभग 35 हजार वोट से JDU के कैंडिडेट को हराया। 2022 में हुए उपचुनाव में अनंत सिंह के जेल में रहते उनकी पत्नी नीलम सिंह ने 17 हजार से अधिक वोट से बीजेपी के उम्मीदवार को मात दी।

मोकामा का जातीय गणित भी समझ लीजिए

मोकामा विधानसभा क्षेत्र को भूमिहार बहुल क्षेत्र माना जाता है लेकिन इस विधानसभा क्षेत्र में यादवों की भी बहुलता है। इसके अलावे मोकामा में आलोक धानुक, कुर्मी, कोयरी और मुस्लिम मतदाताओं की भी संख्या अच्छी-खासी है। गंगा और किउल नदी के बीच बसा क्षेत्र टाल का इलाका कहलाता है। जिसे दाल का कटोरा भी कहा जाता है। इस क्षेत्र में पिछड़ा, अति पिछड़ा, अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों की भी अच्छी खासी तादाद है। पिछले 30 साल से क्षेत्र के लोगों ने बाहुबली को अच्छी खासी बहुमत के साथ विधानसभा पहुंचाया। लेकिन 2022 के उपचुनाव में पहली बार ऐसा हुआ है कि मतदाताओं ने बाहुबलियों के जीत के अंतर को कम कर दिया।

मोकामा सीट हारने के बाद भी खुश क्यों है बीजेपी?

तीन सीटों पर हुए उपचुनाव में दो पर जीत हासिल करने वाली बीजेपी मोकामा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव भले ही हार गई हो। लेकिन पार्टी इस बात से खुश है कि 27 साल बाद इस विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ने के बावजूद उनके उम्मीदवार को 60 हजार से अधिक वोट मिले। बीजेपी के पूर्व विधायक और प्रदेश प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि इसके पहले NDA के उम्मीदवार को महज 40-45 हजार वोट ही मिला करता था। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने यहां तक कहा कि मोकामा में आरजेडी की जीत नहीं बल्कि ये जीत अनंत सिंह की है। जबकि गोपालगंज और कुढ़नी में बीजेपी ने परचम लहराया।

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