बिहार में शराब भगवान की तरह .. पढ़िए गिरिराज सिंह ने ऐसा क्यों कहा?

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बिहार में शराब भगवान की तरह .. पढ़िए गिरिराज सिंह ने ऐसा क्यों कहा?

पटना : बिहार के छपरा में जहरीली शराब पीने से 30 लोगों की मौत के बाद राज्य में एक बार फिर बहस शुरू हो गई है कि क्या शराबबंदी सफल है? बिहार विधानसभा में शराबबंदी के फेल्योर होने और छपरा में हुई घटना को लेकर सवाल पूछने पर सीएम नीतीश कुमार हत्थे से उखड़ गए। उन्होंने सवाल पूछने वाले सदस्यों को सदन के अंदर से भगाने के साथ, बातों ही बातों में बर्बाद करने की बात कह दी। उसके बाद बीजेपी के तमाम छोटे-बड़े नेता नीतीश सरकार पर हमलावर हैं। 2016 से राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू है। बिहार सरकार अवैध शराब तस्करी और उसके सेवन करने वालों पर लगाम लगाने के लिए विशेष उपाय कर चुकी है। जल, नभ और थल में निगरानी की जाती है। नाव से नदी में, ड्रोन से आकाश में और स्वान दस्ते के जरिए जमीन पर शराब तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। उसके बाद भी बिहार में शराबखोरी से मरने वालों का सिलसिला जारी है।

गिरिराज सिंह का नीतीश पर हमला

बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार के हत्थे से उखड़ने के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बड़ा बयान दिया। सबसे पहले गिरिराज ने नीतीश के व्यवहार को लेकर टिप्पणी की और उसके बाद बताया कि कैसे बिहार में शराब भगवान की तरह हो गई है। गिरिराज सिंह ने टिप्पणी करते हुए कहा कि देखिए नीतीश कुमार जी इधर फ्रस्ट्रेशन में हैं। अब इसे फ्रस्ट्रेशन कहेंगे या बुढ़ापे का असर। उनको ये भय सता गया है कहीं मुझे बीच में ही तेजस्वी हटा न दे, इसीलिए कभी कह रहे हैं कि गद्दी सौंप रहा हूं। कभी कुछ कह रहे हैं। ये व्यवहार दस साल पहले नहीं था। गिरिराज सिंह ने उसके बाद सीएम नीतीश के व्यवहार पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दस साल पहले ऐसे नहीं थे। उन्होंने कहा कि बड़ा अशोभनीय व्यवहार बिहार विधानसभा में माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी का हुआ। इसके पहले भी बिहार विधानसभा अध्यक्ष थे विजय सिन्हा एनडीए के, उनके साथ भी जो व्यवहार किया था सदन के अंदर वो अशोभनीय था। अध्यक्ष की गरिमा को तार-तार करने का काम किया। नीतीश कुमार एक तरह से फ्रस्ट्रेशन में हैं।

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‘दस साल में बदल गए नीतीश’

गिरिराज सिंह ने छपरा में जहरीली शराब से हुई 30 लोगों की मौत पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो वो शराब पर हंगामे पर कह रहे हैं, शराब बिहार में वो चीज हो गया है, जैसे भगवान दिखते नहीं, हर जगह होते। नीतीश जी के राज में शराब हर जगह मिलता है, दिखता नहीं है। नीतीश कुमार कह रहे हैं कि बीजेपी के लोग शराब बेचवाते हैं। पहले कहते थे आरजेडी के लोग। भई आपका शासन विफल हो गया है। आपका लॉ एंड ऑर्डर फेल हो गया है। फ्रस्ट्रेशन आ गया है और कुछ नहीं। गिरिराज सिंह ने कहा कि शराब की स्थिति बिहार में भगवान की तरह हो गई है। वो कहीं भी दिखती नहीं है, लेकिन शाम को देखिए तो हर इलाके में दर्जनों लोग झूमते हुए नजर आएंगे। राजधानी पटना के ब्रह्मपुरा और अनिसाबाद के इलाके में रोजाना शराब बेचकर अपनी कमाई करने वाले नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं कि शराब जब भी, जिस वक्त, किसी को कहीं भी चाहिए मुहैया हो जाएगी। सब कुछ सेटिंग है। पिछले 4 सालों से शराब बेचने वाले शख्स ने कहा कि वो एक बार जेल भी गया, लेकिन आने के बाद दोबारा बेचना शुरू कर दिया।

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राजधानी में 24 घंटे मिल रही शराब!

बिहार पुलिस से हाल में रिटायर्ड एक कर्मचारी कहते हैं कि आप सिर्फ 2016 के बाद बिहार पुलिस के अधिकारियों और सिपाहियों की संपत्ति की जांच कर लें, आपको शराबबंदी का असली सच पता चल जाएगा। रिटायर्ड पुलिसकर्मी ने कहा कि शराबबंदी के बाद पुलिस वालों की संपति बेतहाशा बढ़ी है। उन्होंने कहा कि सभी तस्करों ने पैसे तय कर दिये हैं। पुलिस की मिली भगत से शराब की बिक्री हो रही है। जब भी ऊपर से कोई दवाब आता है, तो आनन-फानन में गिरफ्तारी दिखा दी जाती है। शराब माफिया और पुलिस की सांठ-गांठ आराम से चल रहा है। उन्होंने कहा कि पटना में कितने बाइकर्स शराब की होम डिलेवरी कर रहे हैं। कई बार गिरफ्तारी होती है। फिर छूट जाते हैं, उसके बाद फिर से शराब के धंधे से जुड़ जाते हैं।

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शराब अदृश्य भगवान

आपको बता दें कि बिहार में शराबबंदी सच में भगवान की तरह है। दिखती नहीं है, लेकिन बिकती जरूर है। बिहार सरकार के पूर्व मंत्री रहे सुधाकर सिंह ने विधानसभा परिसर में शराब की बोतल मिलने की बात कही थी। उन्होंने बुधवार को कहा कि उसकी जांच रिपोर्ट क्या हुई? क्या आज तक पता चली कि विधानसभा कैंपस में शराब कहां से आई। उन्होंने यहां तक कहा कि सत्ता के संरक्षण में जहरीली शराब का धंधा चल रहा है। स्थिति बहुत विकट है। शराबबंदी सिर्फ कागजों पर है। सुधाकर सिंह राजद के नेता हैं और अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं। सुधाकर सिंह से पहले महागठबंधन के सहयोगियों ने भी सवाल खड़ा करते हुए कहा था कि कुढ़नी उपचुनाव में हार भी शराबबंदी की वजह से हुई है। सरकार को अपने निर्णय पर विचार करना चाहिए। फिलहाल, शराबबंदी अदृश्य भगवान की तरह है। जो दिखती नहीं, लेकिन बिकती जरूर है।

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