बिहार में जातिगत गणना का 20 फीसदी काम शेष, जानिए कब तक होगा पूरा

5
बिहार में जातिगत गणना का 20 फीसदी काम शेष, जानिए कब तक होगा पूरा

बिहार में जातिगत गणना का 20 फीसदी काम शेष, जानिए कब तक होगा पूरा

ऐप पर पढ़ें

Caste Census in Bihar News: बिहार में जाति आधारित गणना का कार्य करीब 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसके ऑफलाइन कार्य हो चुके हैं। डाटा इंट्री का कार्य ऑनलाइन किया जाना शेष है। जातीय गणना का करीब 20 फीसदी काम ही बचा हुआ है। पटना हाईकोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद जाति आधारित गणना के पुनः शुरू होने से इसे करीब 10 दिनों में पूरा कर लिए जाने की संभावना है। 

बिहार में जातीय गणना की मांग पिछले कई साल से हो रही थी। राज्य सरकार 18 फरवरी 2019 और 27 फरवरी 2020 को बिहार विधानसभा एवं विधान परिषद में जातीय गणना कराने को लेकर प्रस्ताव पारित करा चुकी थी। वर्ष 2021 के अगस्त में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव समेत सभी पार्टियों के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी और बिहार सहित देशभर में जातीय जनगणना कराने की मांग की थी।

हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा जाति आधारित जनगणना कराने से इंकार किए जाने पर बिहार में जातीय गणना कराने की कवायद शुरू की गई। इसको लेकर 2 जून 2022 को राज्य मंत्रि परिषद में मंजूरी मिली थी। इसके साथ ही, राज्य में जातीय गणना को लेकर प्रशिक्षण एवं गणना से जुड़े तमाम कार्य शुरू हो गए थे।

जातीय गणना के पहले चरण का कार्य 7 जनवरी 2023 से शुरू हुआ था। करीब 5.18 लाख से अधिक कर्मी 2 करोड़ 58 लाख 90 हजार 497 परिवारों तक पहुंचे। पहले चरण में 7 से 21 जनवरी तक सभी आवासीय परिसर की गिनती की गयी। वहां रहने वाले परिवार के मुखिया का नाम अंकित किया गया। साथ ही परिवार में रहने वाले सदस्यों की सभी जानकारी रजिस्टर में एकत्र की गई।

15 अप्रैल से 15 मई तक दूसरे चरण की गणना होनी थी

राज्य में दूसरे चरण की जाति आधारित गणना की प्रक्रिया 15 अप्रैल से शुरू हुई। इसे 15 मई तक संचालित किया जाना था। इस गणना के लिए पूरे राज्य में 5 लाख 19 हजार कर्मचारी लगाए गए। प्रारंभ में 15 दिनों तक मकानों पर संख्या अंकित करने का काम किया गया। संख्या अंकित करने के बाद गणना कार्य में लगाए गए कर्मियों ने वार्ड स्तर पर परिवारों की गिनती की।

इसके बाद मामला हाईकोर्ट व सर्वोच्च न्यायालय में चला गया। 4 मई को पटना उच्च न्यायालय ने जातीय गणना पर रोक लगा दी थी। तब तक करीब 80 प्रतिशत गणना संबंधी कार्य पूरे कर लिए गए थे। इस जातीय गणना पर अब तक करीब 500 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

बिहार की और खबर देखने के लिए यहाँ क्लिक करे – Delhi News