बिहार नगर निकाय चुनाव: पहले वाले नामांकन पर ही लड़ेंगे प्रत्याशी, सिंबल भी वही रहेंगे; जानें नए नियम

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बिहार नगर निकाय चुनाव: पहले वाले नामांकन पर ही लड़ेंगे प्रत्याशी, सिंबल भी वही रहेंगे; जानें नए नियम

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बिहार में नगर निकाय चुनाव के लिए 18 दिसंबर को पहले चरण और 28 दिसंबर को दूसरे चरण के लिए मतदान होगा। पहले चरण की मतगणना 20 दिसंबर को और दूसरे चरण के वोटों की गिनती 30 दिसंबर को होगी। बुधवार को राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव मुकेश कुमार सिन्हा ने इस संबंध में सभी जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए। खास बात ये है कि सभी निकायों में प्रत्याशी पहले वाले नामांकन पर ही लड़ेंगे। चुनाव आयोग ने उन्हें जो सिंबल आवंटित किए, वो भी पहले की तरह बरकरार रहेंगे।

राज्य निर्वाचन आयोग ने पटना हाईकोर्ट के 4 अक्टूबर को आए आदेश के बाद चुनाव प्रक्रिया और तैयारी में संशोधन की जरूरत को देखते हुए अक्टूबर में निकाय चुनाव की वोटिंग को स्थगित कर दिया था। पहले 10 और 20 अक्टूबर को मतदान होना था। अब वोटिंग की नई तारीख जारी की गई है।

पटना हाईकोर्ट ने निकाय चुनाव में पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को गलत करार दिया था। इस आदेश के बाद बिहार सरकार ने अति पिछड़ा आरक्षण की समीक्षा के लिए एक डेडिकेटेड कमीशन गठित किया। इसकी रिपोर्ट नगर विकास एवं आवास, बिहार द्वारा बुधवार को राज्य निर्वाचन आयोग को उपलब्ध कराई गई। इसके बाद वोटिंग की नई तारीखों की घोषणा की गई।

नगर निकाय चुनाव के नियम

1- पूर्व में आम चुनाव के लिए अधिसूचित 224 नगरपालिकाओं का निर्वाचन कराया जाए। इस बाबत आयोग ने 9 सितंबर, 2022 को जारी पत्र भी भेजा है। मतदान की निर्धारित अवधि एवं मतगणना का समय पूर्ववत रहेंगे। 

2- पहले एवं दूसरे चरण के चुनाव के लिए सभी संबंधित नगरपालिका के सभी पदों के लिए किए गए नामांकन, नामांकन पत्रों की जांच एवं नामांकन वापसी के बाद चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को प्रपत्र-14 (ख) में आवंटित चुनाव चिह्न के अनुसार चुनाव कराया जाएगा। 

3- सभी संबंधित निर्वाचन लड़ने वाले उम्मीदवारों को निर्वाची पदाधिकारी के माध्यम से चुनाव कार्यक्रम के संबंध में लिखित रूप से तामिल कराना सुनिश्चित किया जाएगा।  

4- निकाय चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग समय-समय पर विभिन्न पत्रों के जरिए निर्देश देगा, जो प्रभावी रहेंगे। 

5- नगरपालिका निर्वाचन के लिए अधिसूचना जारी होने की तारीख से आयोग आदर्श आचार संहिता प्रभावी है, सभी नगर निकायों में मतगणना पूरी होने और नतीजे घोषित होने के बाद आचार संहिता अपने आप खत्म हो जाएगी।

अति पिछड़ा आयोग ने एक वार्ड के 50 परिवारों का किया सर्वेक्षण

अति पिछड़ा आयोग ने सर्वेक्षण की जिम्मेदारी एएन सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान को सौंपी गई थी। संस्थान द्वारा कराए गए सर्वेक्षण के तहत प्रत्येक वार्ड में 50 परिवार चिह्नित किए गए। परिवार के सदस्यों से उनकी आर्थिक, सामाजिक रूप से सक्रियता, परिवार के कितने लोग साक्षर हैं या उच्च शिक्षा ग्रहण किए हैं, परिवार में कोई व्यक्ति त्रिस्तरीय पंचायत, नगर निकाय या कोई अन्य राजनैतिक रूप से पदधारक है या नहीं, इसकी भी जानकारी ली गई है।

सर्वेक्षण के लिए नगर निगम क्षेत्र में सात वार्ड चयनित किए गए। नगर परिषद क्षेत्र में पांच वार्ड और नगर पंचायत क्षेत्र में तीन वार्ड चयनित किए गए। राज्य में कुल 1050 चयनित वार्डों में सर्वेक्षण किया गया है। इनमें पटना जिले के 68 वार्ड शामिल हैं। इसी आधार पर अति पिछड़ा आरक्षण की समीक्षा की गई है।

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