बिजली कंपनियों के 2.5 लाख करोड़ रुपये बकाया का भुगतान करें राज्यः मोदी

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बिजली कंपनियों के 2.5 लाख करोड़ रुपये बकाया का भुगतान करें राज्यः मोदी

नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिजली कंपनियों के करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये बकाये का भुगतान करने का राज्यों से अनुरोध करते हुए शनिवार को कहा कि देश की प्रगति में अहम भूमिका निभाने वाले ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती देना जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने एक कार्यक्रम में कहा कि अगले 25 वर्षों में देश की प्रगति को रफ्तार देने में ऊर्जा एवं बिजली क्षेत्रों को बड़ी भूमिका निभानी है। उन्होंने कहा, ‘‘ऊर्जा क्षेत्र का मजबूत होना कारोबारी सुगमता के साथ-साथ जीवनयापन की सुगमता के लिए भी जरूरी है।’’

प्रधानमंत्री ने ‘उज्ज्वल भारत उज्ज्वल भविष्य’ कार्यक्रम के समापन समारोह में बिजली उत्पादन एवं वितरण क्षेत्र की कंपनियों के समक्ष मौजूद चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी एक बड़ी राशि राज्यों के पास बकाया है। उन्होंने राज्यों से इस बकाया राशि का भुगतान जल्द-से-जल्द करने को कहा।

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उन्होंने कहा, ‘‘यह राजनीति का नहीं बल्कि राष्ट्रनीति एवं राष्ट्र-निर्माण से जुड़ा हुआ मुद्दा है। बिजली देश के विकास के लिए अनिवार्य है।’’

उन्होंने कहा कि कई राज्यों पर इन बिजली कंपनियों का एक लाख करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। इसके अलावा विभिन्न सरकारी विभागों एवं स्थानीय निकायों की भी इन बिजली वितरण कंपनियों पर 60,000 करोड़ रुपये से अधिक देनदारी बाकी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य सरकारों ने अभी तक बिजली कंपनियों को 75,000 करोड़ रुपये की अपनी सब्सिडी प्रतिबद्धता भी पूरी नहीं की है। राज्यों की तरफ से उपभोक्ताओं को दी जाने वाली रियायती बिजली के एवज में यह सब्सिडी राशि दी जानी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में बिजली वितरण कंपनियों का नुकसान दहाई अंकों में है जबकि विकसित देशों में यह इकाई अंक में होता है।

उन्होंने कहा कि बिजली की किल्लत का दौर अब अतीत की बात हो गई है और बीते आठ वर्षों में करीब 1.70 लाख मेगावाट बिजली की अतिरिक्त क्षमता का सृजन हुआ है।

उन्होंने कहा, ‘‘आज के समय में ‘एक देश एक पावरग्रिड’ देश की ताकत बन चुका है। पूरे देश में बिजली आपूर्ति के लिए करीब 1.70 लाख सर्किट किलोमीटर लंबी पारेषण लाइन बिछाई गई हैं। इसके अलावा सौभाग्य योजना के तहत करीब तीन करोड़ बिजली कनेक्शन दिए गए हैं।’’

उन्होंने देश की प्रगति में बिजली एवं ऊर्जा क्षेत्रों को अहम बताते हुए कहा कि भारत सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता के मामले में दुनिया के चार-पांच अग्रणी देशों में से एक है। इसके अलावा भारत में दुनिया के कुछ बड़े सौर ऊर्जा संयंत्र भी स्थापित किए गए हैं।

इस अवसर पर उन्होंने 5,200 करोड़ रुपये मूल्य की कई हरित ऊर्जा परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। राजस्थान के नोख में 735 मेगावाट की सौर परियोजना लगाई जाएगी जबकि लेह और गुजरात में हरित हाइड्रोजन परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी।

उन्होंने तेलंगाना के रामागुंडम में 100 मेगावाट क्षमता की फ्लोटिंग (जल क्षेत्र में स्थित) सौर परियोजना और केरल के कयामकुलम में 92 मेगावाट क्षमता की फ्लोटिंग सौर परियोजना का उद्घाटन भी किया।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सौर रूफटॉप पोर्टल की शुरुआत भी की जो आवासीय इमारतों की छतों पर सौर इकाइयां लगाने में मदद करेगा।

इसके अलावा उन्होंने ‘नवीनीकृत वितरण क्षेत्र योजना’ भी पेश की जिसमें वितरण कंपनियों की परिचालन सक्षमता एवं वित्तीय वहनीयता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। इस योजना के तहत पांच साल के लिए तीन लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

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