बड़ा फैसला : चुनाव के बीच नया टैक्स, अगस्त से बढ़ सकता है बोझ | big breaking news | Patrika News

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बड़ा फैसला : चुनाव के बीच नया टैक्स, अगस्त से बढ़ सकता है बोझ | big breaking news | Patrika News

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पत्रिका ब्रेकिंग : – सरकार ने गांवों में बाजार फीस लागू करना तय किया, 31 जुलाई तक इसके लिए लिस्टिंग
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भोपाल

Published: July 04, 2022 08:35:23 pm

जितेन्द्र चौरसिया, भोपाल। प्रदेश में निकाय और पंचायत चुनाव के बीच ही राज्य सरकार ने बड़ा फैसला किया है। सरकार ने गांवों में बाजार फीस नाम से नया टैक्स लागू करना तय किया है। यह टैक्स गांव के दायरे में बिकने के लिए रखने वाले हर उत्पाद पर लगाया जाएगा। इसके लिए सभी कलेक्टर्स को ग्राम पंचायतों के जरिए ग्रामीण क्षेत्र के हाट बाजार, दुकानें, मॉल, शापिंग काम्पलेक्स सहित हर छोटे-बड़े कमर्शियल स्थल की सूची तैयार करने के लिए कहा गया है। इसकी डैडलाइन 31 जुलाई रखी गई है। सभी कलेक्टर्स को इसकी पूरी तैयारी करके बाजार फीस लागू करने के लिए आदेश दे दिए गए हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र में प्रॉपटी टैक्स का दायरा भी बढ़ाना तय किया गया है। फिलहाल चुनाव चल रहे हैं, लेकिन अगले महीने से इस टैक्स का बोझ बढ सकता है।
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ये है मामला-
दरअसल, ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने सभी जिलों के कलेक्टर्स को आदेश दिए हैं कि प्रदेश की ग्राम पंचायतों में बाजार फीस नहीं लागू की गई है। जबकि, यह अनिवार्य है। मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 में ग्राम सभाओं व पंचायतों को अनिवार्य व वैकल्पिक फीस लगाने के अधिकार दिए गए हैं। इसमें बाजार फीस शामिल है। लेकिन, ग्राम पंचायतों में यह लगाई नहीं गई है। इसलिए इसे लागू किया जाए। इसके लिए 31 जुलाई तक ग्राम पंचायतें सर्वे करके ऐसे स्थान-व्यापारी की सूची बना लें जिन पर यह लागू की जानी है। ग्रामीण विकास विभाग ने सभी जिलों को दो प्रोफार्म भी भेजे हैं, जिनमें इस पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट बनना है। इसमें कहां कितनी फीस लगाई जानी है सहित पूरा विस्तृत ब्यौरा ग्राम पंचायतों को दर्ज करना होगा। सरकार ने पंचायत समनवय अधिकारी को संबंधित पंचायत और खंड पंचायत अधिकारी को संबंधित जनपद की फीस निर्धारण व वसूली की जिम्मेदारी देने के भी आदेश दिए हैं।
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किन पर लगेगा यह नया टैक्स-
यह नया टैक्स उन व्यक्तियों पर लगेगा जो ग्राम पंचायत या उसके नियंत्रण वाले बाजार या स्थान या भवन-अन्य में बेचने के लिए अपना कोई माल-उत्पाद रखते हैं। इसमें सभी स्थानीय बाजार, दुकानें, शोरूम, माल्स, हाट बाजार व अन्य व्यावसायिक स्थान आ जाएंगे। हाट बाजार में सार्वजनिक सूचना-वसूली भी हो सकेगी। इतना ही नहीं ग्राम पंचायतों के स्तर पर ही बाजार फीस का निर्धारण व वसूली होगी।
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आनलाइन रखना होगा पूरा डाटा-
ग्राम पंचायतों को बाजार फीस व सम्पत्ति कर संबंधित पूरा डाटा आनलाइन भी करना होगा। बाजार फीस का निर्धारण, वसूली, बकाया और अन्य सभी रिपोर्ट अनिवार्य रूप से आनलाइन अपलोड करना होगी। इसकी हर महीने समीक्षा होगी। इसके बाद ग्राम पंचायतों की रैंकिंग भी तैयार की जाएगी। जिन पंचायतों में वसूली बेहतर होगी उन्हें उत्कृष्ट भी घोषित किया जाएगा।
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क्यों पड़ी जरुरत-
दरअसल, सरकार लंबे समय से आर्थिक मोर्चे पर कठिनाईयों से जूझ रही है। इसके तहत लगातार आमदनी बढ़ाने के रास्ते खोजे जा रहे हैं। कोरोना के बाद ही आर्थिक चुनौती बढ़ी है। ऐसे में ग्रामीण विकास विभाग में नियमों को खंगालने के दौरान इस बाजार फीस की जानकारी सामने आई। कुछ ग्राम पंचायतों में यह वसूल भी की जा रही है, लेकिन 90 फीसदी से ज्यादा में यह वसूल नहीं होती है। वहीं कुछ जगह यह सिर्फ हाट बाजार में अव्यवस्थित रूप से वसूली तक सीमित है। इस कारण इसे वसूलना तय किया गया है। इसमें ग्रामीण सेवाओं व इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास व विस्तार के लिए फीस वसूली जरूरी मानी गई है।
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बॉक्स…
सम्पत्ति कर का दायरा भी बढ़ाना तय-
दूसरी ओर प्रदेश के गांवों में सम्पत्ति कर का दायरा भी बढ़ाना तय किया है। इसे तहत भी ग्रामीण विकास विभाग ने सभी जिलों को आदेश जारी कर दिए हैं। इसमें अब 6000 रुपए से ज्यादा मूल्य की कोई भी प्रॉपटी हो तो उस पर टैक्स लगेगा। इसके अलावा निगम-मंडल-बोर्ड की सभी सम्पत्तियां जो ग्रामीण क्षेत्र के दायरे में हैं, उन पर भी सम्पत्ति कर वसूला जाएगा। अभी तक अधिकतर जगह इन्हें छूट थी। अब ग्रामीण क्षेत्र के सम्पत्ति कर निर्धारण को पूरी तरह से रिफार्म किया जाएगा। इसमें भी अगस्त से क्रियान्वयन शुरू कर दिया जाएगा।
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समय इसलिए संवेदनशील, कलेक्टर्स उलझे-
इस समय पंचायत व निकाय चुनाव चल रहे हैं। अभी पंचायत चुनाव की वोटिंग के दो चरण हो चुके हैं, जबकि तीसरा चरण 8 जुलाई को होना है। इसके बाद 14 व 15 जुलाई को पंचायत चुनाव का फायनल परिणाम घोषित होना है। वहीं निकाय चुनाव की दो चरणों में वोटिंग होना है। ये दोनों चरण अभी बाकी है। निकाय चुनाव का परिणाम 17 व 18 जुलाई को आएगा। इस लिहाज से पूरा जून व जुलाई का महीना किसी भी प्रकार के नए टैक्स या फीस को लागू करने की प्रक्रिया अपनाने के लिए बेहद संवेदनशील वक्त है। बावजूद इसके सभी जिलों के कलेक्टर्स को इसके आदेश दिए गए हैं। इससे कुछ जिलों के कलेक्टर्स असंमजस में भी है। इसलिए कलेक्टर्स ने फिलहाल इस आदेश का क्रियान्वयन होल्ड कर रखा है। ताकि, 18 जुलाई को परिणाम के बाद ही इस पर मैदानी काम हो। मामले में ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव से सम्पर्क के प्रयास किए गए, लेकिन वे चर्चा के लिए उपलब्ध नहीं हो सके।
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फैक्ट फाइल-
– 23 हजार ग्राम पंचायतें प्रदेश में
– 52527 गांव प्रदेश में अभी मौजूद
– 52 जिले अभी मध्यप्रदेश में
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