फर्राटा भरने के लिए तैयार है बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, विकास की दौड़ में पीछे छूटे इलाकों को यूं मिलेगी रफ्तार

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फर्राटा भरने के लिए तैयार है बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, विकास की दौड़ में पीछे छूटे इलाकों को यूं मिलेगी रफ्तार

बांदा/जालौन: विकास की दौड़ में पीछे छूट गए बुंदेलखंड (Bundelkhand) के इलाके को अब पंख लगने जा रहा है। पिछड़ेपन का दंश झेल रहे बुंदेलखंड को अगले सप्ताह से विकास की रफ्तार मिल जाएगी। सुदूर चित्रकूट से देश की राजधानी नई दिल्ली तक का सफर करीब 7 से 8 घंटे में पूरा हो सकेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) चित्रकूट से इटावा को जोड़ने वाले बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे (Bundelkhand Expressway) का लोकार्पण 12 जुलाई को करेंगे। यह एक्सप्रेसवे क्यों अहम है, समझिए हर एक बात।

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का शिलान्यास पीएम नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2020 में चित्रकूट जनपद के भरतकूप से किया था। बोर्ड बैठक में बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे परियोजना में चेंज ऑफ स्कोप के तहत करवाए जा रहे कार्यों के लिए बोर्ड ने मंजूरी मिली। UPEIDA के सीईओ अवनीश कुमार अवस्थी की अध्यक्षता में हुई यूपीडा की 75वीं बोर्ड बैठक में इसकी जानकारी दी गई। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का काम तकरीबन पूरा हो गया है। अब प्रधानमंत्री इसका लोकार्पण करेंगे।

Bundelkhand Expressway: 296 km के एक्सप्रेसवे से दौड़ेगी विकास की रफ्तार, अगले सप्ताह देश को समर्पित होगा बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से लाभ
एक्सप्रेसवे के निर्माण से बुंदेलखंड क्षेत्र को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे और यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए तेज और सुगम यातायात कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा। बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास की राह विकसित होगी। एक्सप्रेसवे के नियंत्रित होने से ईंधन की खपत में महत्वपूर्ण बचत और प्रदूषण पर नियंत्रण भी संभव होगा। परियोजना के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र आर्थिक और सामाजिक रूप से विकसित होगा साथ ही कृषि, वाणिज्य, पर्यटन और औद्योगिक आय में भी वृद्धि होगी।

एक्सप्रेसवे

एक्सप्रेसवे

विभिन्न निर्माण इकाइयों, विकास केंद्रों और कृषि उत्पादक क्षेत्रों को राष्ट्रीय राजधानी से जोड़ने के लिए, एक्सप्रेसवे के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में स्थापित, एक औद्योगिक गलियारा विकसित किया जाएगा जो क्षेत्र के ओमनी दिशात्मक विकास में सहायता करेगा। एक्सप्रेसवे के समीप औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान एवं चिकित्सा संस्थान आदि की स्थापना के भी अवसर प्राप्त होंगे। एक्सप्रेसवे हथकरघा उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, भंडारण, बाजार और दूध आधारित उद्योगों की स्थापना के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा।

10 पॉइंट्स में समझिए हर एक बात-

1. इटावा जिले में यमुना एक्सप्रेसवे पर कुदरैल गांव से शुरू होकर यह बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे चित्रकूट के भरतकूप तक जाएगा। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, ओरैया और इटावा जिलों को लाभ मिलेगा। बुंदेलखंड का जुड़ाव यमुना एक्सप्रेस-वे, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से होगा।

2. 14849.09 करोड़ की लागत से बनने वाला यह एक्सप्रेसवे अति पिछड़े बुंदेलखंड के पूरे इलाके को सड़क मार्ग के जरिए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से जोड़ेगा। दूसरे जिलों तक पहुंच आसान होगी।

3. बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, औरैया, इटावा जिलों से होकर गुजरेगा। यह आगरा एक्सप्रेसवे से इटावा के पास कुदरैल गांव से शुरू होगा और चित्रकूट तक बनेगा।

4. करीब 296 किलोमीटर लंबा बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे 6 लेन का होगा, लेकिन फिलहाल पक्की सड़क सिर्फ 4 लेन की होगी। इनकी चौड़ाई 110 मीटर होगी। 2 लेन बाद में विस्तारित किए जाएंगे। पैदल चलने वाले राहगीरों और पशुओं के लिए अंडरपास भी बनाया जाएगा।

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का एरियल शॉट

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का एरियल शॉट

5. 8 नदियां बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से होकर गुजरेगा। यह एक्सप्रेसवे बागेन, केन, श्यामा, चन्दावल, बिरमा, यमुना, बेतवा और सेंगर नदियों के ऊपर से गुजरेगा।

6. बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के निर्माण में कुल 4 रेलवे ओवर ब्रिज, 14 लंबे पुल, 6 टोल प्लाजा, 7 रैम्प प्लाजा, 266 छोटे पुल, 18 फ्लाई ओवर बनाए गए हैं।

7. पहले चित्रकूट से कानपुर और फिर इटावा, आगरा के रास्ते दिल्ली जाना पड़ता था। इस सफर में 12 से 14 घंटे तक का वक्त लगता था और सफर की दूरी करीब 700 किलोमीटर थी। लेकिन बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे बनने के बाद अब ये दूरी सिर्फ 626 किलोमीटर रह जाएगी।

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8.
एक्सप्रेस-वे पर दौड़ने वाले वाहनों को टोल टैक्स भी अदा करना होगा। यूपीडा के मुताबिक, पूरे 296 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे में 13 स्थानों पर टोल टैक्स लिया जाएगा।

9. बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे में शामिल बुंदेलखंड के पांच जनपदों सहित सभी सातों जिलों के 200 से भी ज्यादा गांवों के लोग लाभान्वित होंगे। इसमें बुंदेलखंड के 150 से ज्यादा गांव भी शामिल हैं।

10. भविष्य में गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे, प्रयागराज एक्सप्रेस-वे के पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ने पर पूरे प्रदेश में एक्सप्रेस-वे फर्राटेदार और सुगम सफर का साधन बनेंगे।

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