फर्जीवाड़ा:कागजों में तैयार किए 377 करोड़ के कमरे | Fraud: Rooms worth 377 crores prepared in papers | Patrika News

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फर्जीवाड़ा:कागजों में तैयार किए 377 करोड़ के कमरे | Fraud: Rooms worth 377 crores prepared in papers | Patrika News


राज्य सरकार कला शिक्षा के नाम पर केंद्र से करोड़ों रुपए का बजट तो ले रही है, लेकिन सरकारी स्कूलों में इसका जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है। गत 12 वर्षों में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत 377 करोड़ रुपए की लागत से स्कूलों में पांच हजार आर्ट, क्रॉफ्ट और कल्चर रूम बनाए गए हैं, लेकिन कला कक्षों का निर्माण कागजों में ही कर दिया गया।

राजस्थान पत्रिका ने राजधानी के कई स्कूलों की मौका पड़ताल की। शिक्षा विभाग जिन स्कूलों में कला कक्ष बनाने का दावा कर रहा है, वहां कक्ष बने हुए ही नहीं हैं। इतना ही नहीं, स्कूल के शिक्षक और प्रिंसिपल भी ऐसे कक्षों से अनजान थे। वहीं, दूसरे राज्यों में स्थिति विपरीत है। दिल्ली, यूपी सहित कई राज्यों के स्कूलों में केंद्र के बजट से कला कक्ष बनवाए गए हैं। उनमें विद्यार्थियों से कला शिक्षा की पढ़ाई कराई जा रही है।

किस वर्ष कितनी राशि स्वीकृत

वर्ष कला कक्ष लागत

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2010—11 856 42.80

2011—12 2098 104.90

2012—13 0 0

2013—14 262 16.95

2014—15 0 0

2015—16 540 51.57

2016—17 214 20.43

2017—18 94 8.97

2018—19 972 92.82

2019—20 50 5.33

2020—21 0 0

2021—2022 2.96 33.56

● विभाग के अनुसार राजकीय आदर्श बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में आर्ट एंड क्रॉफ्ट रूम बनाया गया। पड़ताल में पाया कि स्कूल में रूम के लिए बजट दिया।

● राजकीय महारानी बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल बनीपार्क में वर्षों पहले कक्ष बनवाया था। अब उसे बच्चों की पढ़ाई के काम लिया जा रहा है। अब कोई दूसरा कक्ष आर्ट रूम बना रखा है।

● जयपुर जिले के बोबास गांव स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में आर्ट एंड क्रॉफ्ट और कल्चर रूम नहीं है।

● बस्सी उपखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत देवगांव, काशीपुरा, कचोलिया स्कूलों में भी आर्ट एंड क्रॉफ्ट और कल्चर रूम नहीं मिले।

प्रदेश में कला शिक्षा की स्थिति अजीब है। सरकारी स्कूलों में कला शिक्षा की न किताब है न ही शिक्षक हैं। स्कूलों में आर्ट रूम भी नहीं है। 2012 तक कक्षा छह, सात और आठ के लिए सृजन नाम से किताब बांटी जाती थी। इसे 2013 तक बंद कर दिया। कक्षा नौ और 10 के लिए पहली बार 2016 में कला कुंज नाम से करीब तीन लाख किताब छपवाई गई थी। लेकिन बांटी नहीं गई। स्कूलों में कला की ग्रेड दी जा रही है।

राज्य के जिन स्कूलों को आर्ट एंड क्राफ्ट रूम के लिए चुना गया था, उनमें हमने निर्धारित बजट से निर्माण कराया हैै। लेकिन उस रूम का उपयोग किस काम में लिया जा रहा है, यह प्रधानाचार्य को तय करना होता है।

रिछपाल सिंह, एसई, सिविल शाखा राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद

राजस्थान पत्रिका टीम मौके पर पहुंची तो प्रिंसिपल और शिक्षक भी ऐसे कक्षों से अनजान नजर आए

सवाल: 12 साल से केंद्र दे रहा बजट, लेकिन स्कूलों में बनाए गए पांच हजार आर्ट रूम हैं कहां?

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