प्रशांत किशोर से मिले पप्पू यादव, लोकसभा चुनाव के बीच बिहार का सियासी पारा हाई

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प्रशांत किशोर से मिले पप्पू यादव, लोकसभा चुनाव के बीच बिहार का सियासी पारा हाई

प्रशांत किशोर से मिले पप्पू यादव, लोकसभा चुनाव के बीच बिहार का सियासी पारा हाई

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बिहार की पूर्णिया लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़े पप्पू यादव ने शुक्रवार को चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से मुलाकात की। इस मीटिंग के बाद बिहार का सियासी पारा गर्मा गया है। चुनावी माहौल के बीच दोनों नेताओं के मिलने से राजनीतिक गलियारे में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि, अभी तक दोनों नेताओं की ओर से मीटिंग के एजेंडे के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। हालांकि, चर्चा है कि पप्पू यादव और पीके के बीच बिहार के मौजूदा राजनीतिक परिदृष्य और 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर मंत्रणा हुई है। 

पप्पू यादव ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अपनी जन अधिकार पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया था। वे कांग्रेस के टिकट पर पूर्णिया से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन आरजेडी ने यह सीट अपने पास रख दी और विधायक बीमा भारती को कैंडिडेट बना दिया। इसके बाद पप्पू यादव निर्दलीय मैदान में उतर गए। हालांकि, इस चुनाव में वह कमाल कर पाएंगे या नहीं, यह तो 4 जून को नतीजे आने के बाद ही साफ हो पाएगा। 

पप्पू यादव की बगावत के बावजूद कांग्रेस ने उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की। पूर्णिया में वोटिंग होने के बाद पप्पू यादव खुद को राहुल गांधी की पार्टी का सच्चा सिपाही बताते हुए कांग्रेस के लिए प्रचार में जुटे हैं। शुक्रवार को भी उन्होंने पटना साहिब में कांग्रेस प्रत्याशी अंशुल अभिजीत के समर्थन में प्रचार के लिए कार्यकर्ताओं की बैठक ली। 

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वहीं, जनसुराज अभियान के प्रणेता प्रशांत किशोर लोकसभा चुनाव में कुछ खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। पहले चर्चा थी कि वह बिहार की कुछ सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार सकते हैं या फिर निर्दलीय कैंडिडेट को समर्थन दे सकते हैं। हालांकि, उनका पूरी तरह फोकस 2025 के विधानसभा चुनाव पर है। वे बिहार चुनाव से पहले जनसुराज को राजनीतिक दल में बदलकर मैदान में उतर सकते हैं।

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साल 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पप्पू यादव ने प्रशांत किशोर को साथ आने का निमंत्रण दिया था। उस समय पप्पू यादव जन अधिकार पार्टी के अध्यक्ष थे और किसी भी गठबंधन में शामिल नहीं थे। उन्होंने कहा था कि बिहार की जनता नया गठबंधन चाहती है। पीके, कन्हैया कुमार जैसे नई सोच के नेता इसमें शामिल होने चाहिए। हालांकि, बाद में कन्हैया कुमार कांग्रेस में शामिल हो गए और पप्पू यादव ने भी अपनी पार्टी जाप का विलय लोकसभा चुनाव 2024 से पहले कांग्रेस में कर दिया था।

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