पूर्वांचल, दिल्ली-देहरादून और अब बुंदेलखंड एक्सप्रेस, दिखने लगा योगी-मोदी के डबल इंजन का असर

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पूर्वांचल, दिल्ली-देहरादून और अब बुंदेलखंड एक्सप्रेस, दिखने लगा योगी-मोदी के डबल इंजन का असर

लखनऊ: एक्सप्रेसवे हमेशा विकास के लिए बूस्टर डोज होते हैं। कनेक्टिविटी विकास को रफ्तार देते हैं। सड़कों को लेकर एक वाक्य खूब प्रचलित है, अमेरिका ने सड़कों को नहीं बनाया, सड़कों ने अमेरिका को बनाया। मतलब, अमेरिका में विकास की राह वहां की बेहतरीन रोड कनेक्टिविटी से होकर आगे बढ़ती गई। रोड कनेक्टिविटी को बढ़ाने पर देश के साथ-साथ यूपी में खासा जोर दिया जा रहा है। इसमें एक्सप्रेसवे सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं। जब भी आप किसी भी प्रोडक्ट का उत्पादन करते हैं, तो पहली प्राथमिकता जल्द से जल्द बाजार तक पहुंचाने की होती है। बाजार तक सामग्रियों को पहुंचाने के लिए अवरोधमुक्त सड़कों का होना सबसे अधिक जरूरी होता है। ऐसी सड़कें, जिस पर वाहनों की रफ्तार एक समान रहे और जाम से मुक्त हों। एक्सप्रेसवे इसमें सबसे अधिक सहायक होती हैं।

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे कुछ इसी प्रकार की सुविधाओं के साथ उद्घाटन को तैयार है। केंद्र में पीएम नरेंद्र मोदी और प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद से एक्सप्रेस पर तेजी से काम शुरू हुआ है। पिछले एक साल के भीतर दूसरे एक्सप्रेसवे का उद्घाटन होने जा रहा है। योगी सरकार के कार्यकाल में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर काम जमीन पर शुरू हुआ। उससे पहले यह कागजों तक सीमित था। यूपी चुनाव 2022 से ऐन पहले इसका उद्घाटन हुआ। वहीं, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे हो या फिर गंगा एक्सप्रेसवे, इन योजनाओं पर काम तेजी से चल रहा है।

8 माह पहले काम पूरा कराने में सफलता
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पूरी तरह से योगी सरकार के कार्यकाल में घोषित और निर्मित एक्सप्रेसवे है। बुंदेलखंड को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए मार्च 2017 में सत्ता संभालने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने अप्रैल 2017 में एक्सप्रेसवे के निर्माण की घोषणा की। अगस्त 2017 में आगरा लखनऊ-एक्सप्रेसवे से बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को कनेक्ट करने प्लान को लाया गया। काम शुरू होने के 28 माह में काम को पूरा कराने में सफलता मिली। 8 माह पहले योजना को तैयार कर लिया गया। इस एक्सप्रेसवे के निर्माण की समय-सारणी को ऐसे समझ सकते हैं।

ऐसे पूरा हुआ निर्माण कार्य:

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  • नवंबर 2017 : डीपीआर तैयार करने के लिए रूट सर्वेक्षण का कार्य शुरू किया गया।
  • जून 2018 : फंड की कमी के कारण यूपी सरकार ने केंद्र सरकार से बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे बनाने का अनुरोध किया।
  • नवंबर 2018 : यूपी सरकार ने भूमि अधिग्रहण के लिए 640 करोड़ रुपये जारी किए।
  • दिसंबर 2018 : भूमि अधिग्रहण का कार्य शुरू किया गया। भूमि अधिग्रहण को 2 महीने में पूरा करने की योजना है। 80 फीसदी आवश्यक भूमि के अधिग्रहण के बाद निर्माण कार्य शुरू करने की घोषणा की गई।
  • फरवरी 2019 : डीपीआर तैयार और आवश्यक भूमि का 27 फीसदी अधिग्रहण पूरा किया गया।
  • मई 2019 : आवश्यक भूमि का 60 फीसदी अधिग्रहण कर लिया गया है। लोकसभा चुनाव को लेकर प्रक्रिया में बाधा आई।
  • जून 2019 : आवश्यक भूमि का 79 फीसदी अधिग्रहण कार्य पूरा हुआ।
  • जुलाई 2019: बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के लिए 1,150 करोड़ रुपये का बजट बूस्टर दिया गया।
  • अगस्त 2019: आवश्यक भूमि का 90 फीसदी अधिग्रहण पूरा किया गया। निर्माण कार्य अक्टूबर 2019 में शुरू करने की तैयारी की गई।
  • अक्टूबर 2019: एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य को 6 पैकेज में बांटा गया। इसके निर्माण के लिए 4 प्राइवेट फर्म को शॉर्टलिस्ट किया गया।
  • जनवरी 2020 : सभी 6 पैकेजों का निर्माण कार्य ठेकेदारों द्वारा शुरू किया गया।
  • फरवरी 2020: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 फरवरी 2020 को चित्रकूट में एक्सप्रेसवे की नींव रखी। उस समय 95 फीसदी भूमि का अधिग्रहण पूरा किया गया। 2 फीसदी मिट्‌टी का काम भी हो चुका था।
  • मार्च 2020: कोविड-19 के कारण सड़क निर्माण कार्य को रोका गया।
  • अप्रैल 2020: कोविड-19 के कारण रुके कार्य को शुरू कराया गया। 6 में से 3 पैकेज में काम शुरू हुआ।
  • जून 2020 : 7 जिलों के 182 गांवों से होकर गुजरने वाले बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के लिए 15 जून तक आवश्यक भूमि के 3654 हेक्टेयर (95.32 फीसदी) में से 3483 हेक्टेयर का अधिग्रहण पूरा कराया गया।
  • अगस्त 2020 : 14 फीसदी निर्माण कार्य निर्धारित समय से पहले पूरा हुआ।
  • मई 2021 : 90 फीसदी जमीन से संबंधित कार्य और 60 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हुआ। 31 मई तक कुल 818 स्ट्रक्चर में से 581 पूरी कराई गई।
  • अगस्त 2021 : 31 अगस्त तक 71 फीसदी निर्माण कार्य और कुल 880 संरचनाओं में से 704 पूरा कराया गया।
  • सितंबर 2021 : इटावा से जालौन तक एक्सप्रेसवे का खंड लगभग पूरा करा लिया गया।
  • अक्टूबर 2021 : यूपीडा ने एक्सप्रेसवे के 73 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य को पूरा कराने का दावा किया।
  • जनवरी 2022 : 881 संरचनाओं में से 100 फीसदी अर्थ वर्क और 820 संरचनाओं का निर्माण कार्य करा लिया। एक्सप्रेसवे का कुल 83.30 फीसदी निर्माण कार्य पूर्ण।
  • अप्रैल 2022 : 92.58 फीसदी निर्माण कार्य पूर्ण और 881 संरचनाओं में से 866 को पूरा कराया गया।
  • मई 2022 : 94 फीसदी से अधिक निर्माण कार्य पूर्ण।
  • जून 2022 : 96 फीसदी से अधिक निर्माण कार्य पूर्ण। उद्घाटन की तैयारियां शुरू।
  • जुलाई 2022 : 98 फीसदी से अधिक निर्माण कार्य पूर्ण। 16 जुलाई को पीएम नरेंद्र मोदी एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे।

एक नजर में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे

  • बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे विकास के साथ-साथ पर्यटन के भी मार्ग खोलेगा।
  • बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का 100 फीसदी काम पूरा कराया गया।
  • फरवरी-2023 में पूरा होने वाला काम 8 महीने पहले ही जुलाई में ही पूरा करा लिया गया।
  • बारिश के पानी के संचयन के लिए हर 500 मीटर पर पिट बनाए जा रहे हैं।
  • हरियाली के लिए 7 लाख पौधे रोपे जाएंगे।
  • 296 किलोमीटर लंबाई का है बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे।
  • 7 जिलों को कवर करेगा बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे।
  • 14,850 करोड़ रुपये आई है निर्माण की लागत।
  • 4 लेन का बनाया गया है बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे।
  • 2 लेन का भविष्य में हो सकेगा विस्तार।

इन छह पैकेज में पूरा कराया गया काम

  • चित्रकूट के गोंडा से बांदा के महोखर : 50.5 किलोमीटर
  • बांदा के महोखर से महोबा के काओहरी : 50.3 किलोमीटर
  • महोबा के काओहरी से हमीरपुर के बरोली खरका : 49 किलोमीटर
  • हमीरपुर के बरोली खरका से जालौन के सालाबाद : 51 किलोमीटर
  • जालौन के सालाबाद से औरैया के बखरिया : 50 किलोमीटर
  • औरैया के बखरिया से इटावा के कुदरैल : 45.3 किलोमीटर

ट्रेन से पहले सड़क मार्ग से पहुंच सकेंगे चित्रकूट
चित्रकूट से दिल्ली पहुंचने के लिए अभी आपको संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में 10-11 घंटे का सफर करना पड़ता है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से अब दिल्ली पहुंचने में केवल 6 से 6:30 घंटे लगेंगे। चित्रकूट से शुरू होकर इटावा तक जाने वाले इस 296 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे का 100 फीसदी काम बुधवार को पूरा हो गया। 16 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जालौन के कैथेरी गांव में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का उद्‌घाटन करेंगे। वह यहां जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

पीएम मोदी ने किया था शिलान्यास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी-2020 में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया था। इस परियोजना को फरवरी 2023 में पूरा होना था, लेकिन काम 8 महीने पहले ही पूरा हो गया। बीते कुछ दिनों में मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव गृह एक्सप्रेसवे के काम और प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा कर चुके हैं। 6 हिस्सों में बने एक्सप्रेसवे के निर्माण पर 14,850 करोड़ रुपये का खर्च आया है। बुंदेलखंड की उम्मीदों को परवान चढ़ाने वाली यह 4-लेन रोड चित्रकूट (एनएच-35), बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, औरैया और इटावा से गुजरेगी। इटावा में एक्सप्रेसवे कुदरैल के पास यह लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे से मिल जाएगी।

किसानों को होगा फायदा
जानकारों के अनुसार, बुंदेलखंड में मटर का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। एक्सप्रेस-वे के जरिए फसल को समय से दूसरे शहरों में पहुंचाया जा सकेगा। झांसी और चित्रकूट जैसी जगहों पर पर्यटकों की संख्या में भी इजाफे का अनुमान लगाया जा रहा है। बारिश के पानी के संचयन के लिए एक्सप्रेस-वे पर हर 500 मीटर की दूरी पर पिट बनाए जा रहे हैं। हरियाली के लिए 7 लाख पौधे रोपे जाएंगे। आसपास के गांवों के स्वयं सहायता समूहों की मदद से औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा एक्सप्रेस-वे के दोनों तरफ पांच किलोमीटर की दूरी में आने वाले स्कूलों में 2-2 स्मार्ट क्लासेज भी बनाई गई हैं, ताकि बच्चे बदलते वक्त के साथ कदमताल कर सकें।

ये हुआ काम
एक्सप्रेसवे बाग, केन, श्यामा, चंदावल, यमुना, बेतवा और सेंगुर नदियों से गुजरा है। 296 किलोमीटर की लंबाई में 4 रेलवे ओरवरब्रिज, 14 बड़े पुल, 286 छोटे पुल, 19 फ्लाईओवर और 224 अंडरपास बनाए गए हैं। इतनी दूरी में 6 टोल-प्लाजा मिलेंगे। 13 पॉइंट्स से एक्सप्रेस-वे पर चढ़ा-उतरा जा सकेगा। फिलहाल 4 लेन एक्सप्रेस-वे का भविष्य में 2 लेन विस्तार कर 6 लेन बनाया जा सकेगा। यह पूरी तरह एक्सेस-कंट्रोल्ड होगा। 4 जगहों पर पेट्रोल पंप और 4 जगहों पर जनसुविधाएं विकसित की जाएंगी।

डिफेंस कॉरिडोर का होगा निर्माण
चित्रकूट में डिफेंस कॉरिडोर के लिए 103 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है। झांसी में 183 हेक्टेयर जमीन पर डिफेंस कॉरिडोर की पहली एंकर यूनिट (भारत डायनमिक्स लिमिटेड) की आधारशिला पीएम ने नवंबर-2021 में रखी थी। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के सभी टॉल प्लाजा और रैंप प्लाजा में बुंदेलखंड की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासतों की झलक देखने को मिलेगी। यूपीडा पैकेज-1 के सहायक अभियंता एस के यादव ने बताया कि दीवारों पर बुंदेलखंडी कला संस्कृति और धार्मिक ऐतिहासिक महत्त्व के चित्र उकेरे जा रहे हैं। लोगों को मशहूर रनगढ़ दुर्ग, कालिंजर, भूरागढ़, झांसी का किला समेत कई ऐतिहासिक इमारतों और यहां के वीरों को चित्र देखने को मिलेंगे।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर काम हुआ तेज
दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे का अधिकतर भाग यूपी में आता है। इसके लिए तैयारियों को तेज किया गया है। दिसंबर 2020 में इस एक्सप्रेसवे के निर्माण का कार्य मार्च 2021 में शुरू होना था। लेकिन, पर्यावरण विभाग की मंजूरी मिलने में देरी के बाद इस एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य लटका। 210 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य को मार्च 2024 में पूरा कराए जाने की योजना है। पूर्वांचल एक्सप्रेस का निर्माण गाजीपुर से लखनऊ के चांद सराय गांव तक किया गया है। 340.8 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे की परियोजना पिछली सरकार के दौरान बनी, लेकिन निर्माझा कार्य अक्टूबर 2018 से शुरू हुआ। 16 नवंबर 2021 को पीएम नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया। ये एक्सप्रेसवे यूपी के विकास की रफ्तार को तेज करने वाले साबित होने वाले हैं।

यूपी के एक्सप्रेसवे

  • बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे : 296 किलोमीटर लंबा
  • पूर्वांचल एक्सप्रेसवे : 340.8 किलोमीटर लंबा
  • यमुना एक्सप्रेसवे : 165 किलोमीटर लंबा
  • नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे : 25 किलोमीटर
  • आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे : 302 किलोमीटर
  • दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे : 96 किलोमीटर

प्रदेश में प्रस्तावित एक्सप्रेसवे

  • गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे : 91 किलोमीटर लंबा
  • गंगा एक्सप्रेसवे : 594 किलोमीटर लंबा
  • लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे : 63 किलोमीटर लंबा
  • गाजियाबाद-कानपुर एक्सप्रेसवे : 380 किलोमीटर लंबा
  • गोरखपुर-सिलिगुड़ी एक्सप्रेसवे : 519 किलोमीटर लंबा
  • दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे : 210 किलोमीटर लंबा
  • गाजीपुर-बलिया-मांझीघाट एक्सप्रेसवे : 117 किलोमीटर लंबा

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