नौटंकी शैली में मंचित हुई लाला हरदौल की कथा

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नौटंकी शैली में मंचित हुई लाला हरदौल की कथा

लोकनाट्य पर केंद्रित पहचान समारोह में नाटक का मंचन, संवाद और अभियन के माध्यम से व्यक्त की जाती है कथा

भोपाल। जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी प्रदेश की आंचलिक बोलियों में लोकनाट्यों पर केन्द्रित तीन दिवसीय पहचान समारोह का आयोजन कर रही है। समारोह में दूसरे दिन नौटंकी शैली में लाला हरदौल की कथा को मंच पर प्रस्तुत किया। प्रस्तुति का निर्देशन ग्वालियर के अकबर खां ने किया। नौटंकी शैली में कविता और साधारण बोलचाल की भाषा का मिश्रण होता है। पात्र आपस में बातें करते हैं लेकिन गहरी भावनाओं और संदेशों को अक्सर तुकबंदी के माध्यम से प्रकट करते हैं। इसमें कलाकार संवाद और अभिनय के जरिए कथा को व्यक्त करते हैं। प्रस्तुति में लाला हरदौल का जीवन, प्रेम, त्याग, समर्पण और ब्रह्मचर्य को दिखाया गया।

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शादी करने से मना कर देते हैं लाला हरदौल
कथा लाला हरदौल के चरित्र पर आधारित थी। प्रस्तुति की शुरुआत लाला हरदौल और उनकी भाभी मां के संवाद से होती है। लाला हरदौल की भाभी चंपारानी देवर हरदौल से कहती हैं कि लाला हरदौल आप विवाह कर लें जिससे नगर और तुम्हारी भाभी मां प्रसन्न हो जाएंगी, लेकिन हरदौल शादी करने से मना कर देते हैं। वे कहते हैं कि मैं हमेशा ब्रह्मचारी रहूंगा और भगवान का भजन करूंगा। यह बात उनके बड़े भाई महाराजा जुझारू सिंह को पता चलती है। वे भी महल आकर लाला हरदौल को विवाह करने के लिए कहते हैं लेकिन वे विवाह न करने की बात पर अडिग रहते हैं। एक दिन महाराज जुझारू सिंह लाला हरदौल को प्रजा का महामंत्री बना देते हैं और कहते हैं अब से राज कार्य के साथ ब्रह्मचर्य जीवन आसानी से बिता सकेंगे।

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भाभी की पवित्रता सिद्ध करने पी लेते हैं जहर
यह बात सभा के पूर्व महामंत्री को पता चलती है। वह दोनों भाइयों के बीच फूट डालने का काम करता है। वह महाराजा के पास आकर कहता है कि लाला हरदौल ब्रम्हचर्य जीवन नहीं बिता रहे हैं बल्कि उनका भाभी के संग प्रेम प्रसंग में हैं। यह बात सुनते ही राजा गुस्से से महल आते हैं और अपनी पत्नी पर आरोप लगाते हुए कहते हैं कि यदि तुम्हें पतिव्रता को सिद्ध करना है तो तुम्हें हरदौल को मारना पड़ेगा। उसके भोजन में जहर मिलाना होगा। तभी वे इस महल में कदम रखेंगे और महारानी को पत्नी के रूप में स्वीकार करेंगे। अंत में दिखाया कि भाभी परेशान रो रही होती है जिसे देख लाला हरदौल पूछते हैं कि माता भाभी तुम क्यों आंसू बहा रही हो, रोती हुई भाभी जवाब देती हैं कि हरदौल तुम्हारे और हमारे संबंध को किसी ने गलत तरीके से समाज में प्रस्तुत कर दिया है जिसके चलते महाराज ने मुझे कई चुनौतियां दी हैं। महारानी जहर वाली बात हरदौल को बता देती हैं। तभी पास में रखे जहर मिले भोजन को लाला हरदौल अपने हाथ से उठाकर खा लेते हैं और उनके प्राण वहीं शरीर से छूट जाते हैं।



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