नीतीश का राज, जेल से लालू को शहाबुद्दीन का कॉल और अब हिना शहाब की RJD से छुट्टी, कनेक्शन है क्या ?

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नीतीश का राज, जेल से लालू को शहाबुद्दीन का कॉल और अब हिना शहाब की RJD से छुट्टी, कनेक्शन है क्या ?

पटना : ‘आपका एसपी खतम है भाई। सबको हटाइए, नहीं तो एक दिन दंगे करवा देंगे।’ ये 6 साल पुरानी राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) और मोहम्मद शहाबुद्दीन (Mohammad Shahabuddin) के बीच मोबाइल से हुई बातचीत का अंश है। उस वक्त शहाबुद्दीन जेल में बंद थे। बातचीत का ऑडियो बाहर आने के बाद बिहार में सियासी तूफान खड़ा हो गया। सूबे में सरकार एनडीए की थी। नीतीश सरकार ने जांच के आदेश दे दिये। शिकायत राज्यपाल तक पहुंच गई। ऐसा नहीं है कि लालू यादव ने कभी भी शहाबुद्दीन से अपने रिश्ते को छुपाया। इतना ही नहीं 13 अगस्त 2017 को एक रैली को संबोधित करते हुे लालू ने स्वीकार किया कि हां, उन्होंने शहाबुद्दीन से बातचीत की थी। लालू ने सफाई देते हुए कहा कि शहाबुद्दीन से जो बातचीत हुई, उसमें कुछ भी गलत नहीं था। लालू ने नीतीश सरकार पर सवाल उठाते हुए, यहां तक कहा कि क्या शहाबुद्दीन को फोन पर ये कहा था कि जेल के गेट खोल दिए जाएं और उसे जेल से निकाल दिया जाए?

जेल से आया था लालू को फोन
उस सार्वजनिक मंच से लालू ने नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि जब उनकी बात जेल में बंद उनके पार्टी के नेता और अपराधी अनंत सिंह से हो सकती है। उन्होंने अगर शहाबुद्दीन से बात कर ली, तो इतना हंगामा होने का क्या मतलब है? अब आपके मन में सवाल उठेगा कि आखिर हम शहाबुद्दीन और लालू यादव के बीच हुई फोन पर बातचीत का जिक्र क्यों कर रहे हैं? दरअसल, हुआ ये है कि कभी शहाबुद्दीन के साथ गलबहियां वाली राजनीतिक रिश्ते में बंधे लालू यादव और उनकी पार्टी ने डॉन के पूरे कुनबे को अपने से अलग कर लिया है। लालू यादव ने हाल में राष्ट्रीय कार्यकारिणी और पार्लियामेंट्री बोर्ड का गठन किया। लालू ने इस दौरान कहीं भी शहाबुद्दीन के कुनबे को जगह नहीं दी। जबकि, पिछली बार संगठन के दोनों प्रभाग में शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब को जगह मिली थी। सवाल उठना लाजिमी है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि शहाबुद्दीन का परिवार अब लालू से पूरी तरह अलग हो गया?

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राजद से अलग हुआ डॉन का कुनबा
शहाबुद्दीन के लालू परिवार से प्रगाढ़ रिश्ते रहे। सियासी जानकार मानते हैं कि लालू ने राजनीति की रपटीली राहों में सियासी समस्याओं से निपटने के लिए शहाबुद्दीन से महज एक समझौता वाला रिश्ता रखा। अब, जब शहाबुद्दीन नहीं रहे। लालू धीरे-धीरे पार्टी की कमान तेजस्वी के हाथों में सौंपते जा रहे हैं, वैसी परिस्थिति में पार्टी के बड़े फैसलों पर लालू की मर्जी नहीं चलती। तेजस्वी यादव फैसले लेते हैं। जानकार बताते हैं कि फिलहाल, बिहार में महागठबंधन की सरकार है। तेजस्वी हर कदम पर नीतीश कुमार के साथ हैं। इतना ही नहीं, तेजस्वी शुरू से शहाबुद्दीन के परिवार को लेकर अनकंफर्टेबल फील करते रहे हैं। गोपालगंज चुनाव में राजद को मिली हार के बाद तेजस्वी यादव ने शहाबुद्दीन के कुनबे से किनारा करना ही उचित समझा। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि ये नीतीश इफेक्ट भी हो सकता है। शहाबुद्दीन नीतीश कुमार को परिस्थितियों का मुख्यमंत्री बताते रहे हैं। तेजस्वी को ये लगता होगा कि यदि शहाबुद्दीन के परिवार को एक्टिव किया गया, तो इसका सीधा इफेक्ट नीतीश कुमार से उनके रिश्ते पर पड़ेगा।

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हिना शहाब ने दिया था बड़ा बयान
बिहार की राजनीति को नजदीक से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद दत्त कहते हैं कि देखिए नीतीश का राज। जेल से शहाबुद्दीन का लालू यादव का फोन और इस बीच हिना शहाब की राजद से छुट्टी। इसका कनेक्शन तलाशने के लिए आपको 26 जून 2022 को शहाबुद्दीन की पत्नी के बयान को देखना होगा। प्रमोद दत्त कहते हैं कि राजद की ओर से जब हिना शहाब को राज्यसभा का टिकट नहीं मिला, तो शहाबुद्दीन के समर्थक लालू यादव के विरोध में मुखर हुए। जब समर्थकों की बात हिना शहाब ने सुनी, तो उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी की जहां तक बात है, अभी वो पूरी तरह से न्यूट्रल हैं। हिना शहाब ने कहा कि वे अभी सक्रिय नहीं हैं। हिना ने ये भी कहा कि वे जनता से मिलने के बाद राजद को लेकर अंतिम निर्णय लेंगी। प्रमोद दत्त कहते हैं कि हिना के इस बयान के मायने समझिए। क्या आपको नहीं लगता कि हिना का ये बयान लालू तक भी पहुंचा होगा? जब लालू तक पहुंचा होगा, तो तेजस्वी का ध्यान भी इस ओर गया होगा? प्रमोद दत्त का कहना है कि ये भी तो हो सकता है कि राजद की ओर से हिना के लिए कुछ दूसरा विकल्प तलाशा जा रहा होगा, तब तक हिना ने बयान देकर जल्दीबाजी कर दी। प्रमोद दत्त मानते हैं कि राजद और शहाबुद्दीन के कुनबे में दरार हिना शहाब के बयान के बाद आनी शुरू हुई है।

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सियासी रिश्ते का अंत
जानकार मानते हैं कि राजद और शहाबुद्दीन के परिवार के बीच दूरी का मुख्य कारण डॉन के निधन के बाद लालू परिवार का ठंडा पड़ जाना भी है। शहाबुद्दीन तिहाड़ में कोरोना से जूझ रहे थे। उस दौरान लालू यादव की ओर से कोई मिलने की पहल नहीं की गई। शहाबुद्दीन परेशान रहे। उसके बाद एक दिन उनके निधन की खबर आई। निधन की खबर सुनने के बाद लालू यादव ने मन ही मन शोक मना लिया। लालू परिवार से सिर्फ बड़बोले तेज प्रताप यादव सिवान पहुंचे। जानकार कहते हैं कि आप तेज प्रताप की राजनीतिक गंभीरता का अंदाजा लगा सकते हैं। उस वक्त शहाबुद्दीन का परिवार लालू के आगमन की प्रतीक्षा कर रहा था। लेकिन, न लालू पहुंचे और न ही तेजस्वी यादव। उसके बाद शहाबुद्दीन के समर्थक नाराज हो गए। समर्थकों ने गोपालगंज उपचुनाव में पुरी तरह चुप्पी साध ली और इस तरह एक सियासी रिश्ते का अंत हुआ।

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