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निगले पहाड़… खा गए बजरी, सोती रही सरकार | Illegal mining on the rise in Rajasthan | Patrika News

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निगले पहाड़… खा गए बजरी, सोती रही सरकार | Illegal mining on the rise in Rajasthan | Patrika News

प्रदेश में बजरी का अवैध खनन भारी मात्रा में जो रहा है। 11 जिले ऐसे हैं, जहां नदी में कई जगह अवैध खनन किया जा रहा है। बजरी के साथ ही फेल्सपार, क्वार्टज, मेसनरी स्टोन, सेंड स्टोन, जिप्सम, आयरन अयस्क, मार्बल, लाइम स्टोन, गारनेट का बड़ी मात्रा में अवैध खनन हो रहा है। सरकार, पुलिस, खान विभाग समेत सभी सम्बिन्धत विभागों को इसकी जानकारी भी है, लेकिन अवैध खनन पर रोक लगाने में सरकार पूरी तरह से नाकामयाब साबित हो रही है। इसी का परिणाम है कि सरकार को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि लोगों की जान को खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। राजस्थान में अवैध खनन एक नासूर बीमारी बन गया है।

किस जिले में किसका अवैध खनन बजरी- टोंक, सवाईमाधोपुर, भीलवाड़ा,धौलपुर, चितौड़गढ,बाड़मेर, जोधपुर, नागौर, जालोर, पाली, झुंझुनूं।
क्वार्टज, फेल्सपार- अजमेर, भीलवाड़ा, राजसमंद, चित्तौड़गढ, सीकर, टाेंक, डूंगरपुर मेसनरी स्टोन- अलवर, भरतपुर, जयपुर, सीकर, झुंझुनूं, कोटा
सेंड स्टोन- भीलवाड़ा, बूंदी, धौलपुर, करौली, भरतपुर, जोधपुर

जिप्सम- बीकानेर, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर
आयरन अयस्क- सीकर, जयपुर मार्बल,खंडा- बूंदी, जैसलमेर, अलवर लाइम स्टोन- नागौरगारनेट-भीलवाड़ा जिलेवार किस क्षेत्र में हो रहा ज्यादा अवैध खनन – टोंक जिले में बनास नदी, देवली और गुलगांव, लादी।
– जयपुर में दूदू, सांगानेर, कोटपूतली।

– दौसा में सैंथल, सिकराय।
– झुंझुनूं में खेतड़ी कांकरिया, सिहोड़ नयानगर, रामकुमारपुरा, बुहाना, कालोटा। – अलवर में मुंडली, सैंथली, नारायणपुर, नागल, सुमेर, बलदेवगढ़, गोरधनपुरा।
-भरतपुर- पहाड़ी नगर क्षेत्र, रूपवास। – धौलपुर में चंबल नदी घडि़याल प्रतिबंधित क्षेत्र, सरमथुरा।
– करौली में मंडरायल, सपोटरा, बनास नदी

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– सवाईमाधोपुर में बनास नदी
– बीकानेर में खाजुवाला, बज्जू । – हनुमानगढ़ में पुरबसर, पल्लू, न्योलखी, बरमसर, लाखेरा, मायरा, बड़ौपल, जिगासरी छोटी, रातुसर
– श्रीगंगानगर में किशनपरा, गुड़ली, ठेठार, फूलेवाला, देसली – जैसलमेर में मूलसागर, अमरसागर, एयरफोर्स एरिया, मोहनगढ़, चिन्नु, नाचना।
– चूरू में रणधीसर, बीदासर, गोपालपुरा, बालेरा, मानपुरा, चाड़वास।

-जोधपुर में शेरगढ, बालेसर, लूणी नदी।
– पाली में लूणी नदी, रोहट, जैतारण । – बाड़मेर में पचपदरा, सिणधरी, गुड़ामालानी, बायतु ।
– जालोर में चितलवाड़ा, रानीवाड़ा, जसवंतपुरा, भीनमाल, आहार, समदड़ी, बागाेड़ा – सिरोही में पिंडवाड़ा, आबूरोड, रेवदर।
– भीलवाड़ा में कोटड़ी, आसिंद, सहाड़ा, बनेड़ा।

– चित्तौड़गढ में भदेसर, कपासन, भूपालसागर, राशमी।
– कोटा में शहरी क्षेत्र की वनभूमि, चंबल घडि़याल प्रतिबंधित क्षेत्र, पार्वती नदी। – बूंदी में धनेश्वर, डाबी, पिपलदा, बुधपुरा,
– बारां में अंता, मांगरोल, छबड़ा, छीपाबड़ौद। – झालावाड़ में मनोहरथाना, झालरापाटन, अकलेरा।
– अजमेर में सावर, किशनगढ़, अराई, ब्यावर।

– नागौर में धनापा, भेड क्षेत्र।
– उदयपुर में जयसमंद कैचमेंट, सलूम्बर, भींडर। – बांसवाड़ा में सज्जनगढ़, कुशलगढ, कडाणा।
चार साल में 5000 करोड़ के राजस्व का नुकसान! खान विभाग ने राजस्व के लिए जो टारगेट तय किया था, अवैध खनन ने उसे भी जोरदार झटका दिया है। सूत्रों के अनुसार 2017 से लेकर 2020 तक खान विभाग तय राजस्व टारगेट से 5 हजार करोड़ कम राजस्व प्राप्त कर सका है। 2021 में राजस्व का जो लक्ष्य रखा गया, वह भी खानों की निलामी से पूरा करना पड़ा।

अवैध खनन-स्टॉक पर कार्रवाई प्रदेश में वर्ष 2018 से लेकर 2021 के बीच अवैध खनन और अवैध स्टॉक के 46 हजार से ज्यादा मामले सामने आए। इनमें विभाग ने 4 हजार 142 मुकदमे दर्ज करवाए गए। 47 हजार से ज्यादा वाहन, औजार, मशीेंन जब्त की गई और करीब 322 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया।



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