दो ‘नाथ’ के फेर में फंसेगी एकनाथ सरकार? दो विकल्प… शिंदे गुट का विलय हो, या दो धड़ों में टूटे शिवसेना

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दो ‘नाथ’ के फेर में फंसेगी एकनाथ सरकार? दो विकल्प… शिंदे गुट का विलय हो, या दो धड़ों में टूटे शिवसेना

मुंबईः महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे से बगावत करके एकनाथ शिंदे ने बीजेपी के सहयोग से नई सरकार भले बना ली हो लेकिन अभी उनकी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। रविवार को महाराष्ट्र विधानसभा के विशेष सत्र में स्पीकर का चुनाव होना है। इस चुनाव के लिए शिवसेना के दोनों गुटों की ओर से व्हिप जारी होना है। एक ओर उद्धव ठाकरे गुट के व्हिप सुनील प्रभु हैं। वहीं बागी शिंदे गुट ने अपना व्हिप भरत गोगावले को बनाया है। ऐसे में सवाल है कि स्पीकर के चुनाव के लिए शिवसेना के विधायक किसका व्हिप मानेंगे? यह सवाल बहुत पेचीदा है क्योंकि इसके परिणाम में व्हिप के खिलाफ जाने वाले विधायकों की सदस्यता जाने का खतरा है।

क्या हैं नियम
दरअसल, एकनाथ शिंदे गुट के चीफ व्हिप भरत गोगावले जो फरमान जारी करेंगे, उसे शिवसेना के सभी 55 विधायकों को मानना पड़ेगा। इस दौरान अगर उद्धव ठाकरे गुट के 16 विधायक व्हिप का विरोध करते हैं तो उनकी सदस्यता रद्द की जा सकती है। हालांकि, उद्धव ठाकरे के गुट का कहना है कि असली शिवसेना के चीफ व्हिप सुनील प्रभु हैं और वह जो भी व्हिप जारी करेंगे उसे बागियों समेत सभी शिवसेना विधायकों को मानना पड़ेगा। सुनील का व्हिप न मानने पर एकनाथ शिंदे के पक्ष के 39 विधायकों की सदस्यता जा सकती है।

क्या है कानून
इस बारे में संवैधानिक कानून है कि अगर किसी दल में फूट पड़ जाए और दो तिहाई विधायक बागी हो जाएं, तब भी उनको एक अलग दल के रूप में मान्यता नहीं मिलती। वैधता के लिए उन्हें किसी अन्य दल में अपना विलय करना पड़ता है। अगर ऐसा नहीं होता है तो बागी विधायकों की सदस्यता रद्द की जा सकती है। एक रास्ता यह है कि जिस पार्टी से विधायक बागी हुए हैं, उस पार्टी को दो धड़ों में बांट दिया जाए। यह बंटवारा जमीनी स्तर से लेकर उच्च स्तर तक हो। शिवसेना में हालांकि अब तक यह नहीं हुआ है। विधायकों के अलावा शिवसेना के सांसदों और नगर निकाय के प्रतिनिधि अभी भी उद्धव गुट के साथ हैं। ऐसे में केवल 39 विधायकों वाले शिंदे गुट को ठाकरे के चीफ व्हिप के फरमान के खिलाफ जाना भारी पड़ सकता है।

क्या फंसेगा पेच
रविवार को स्पेशल सेशन के दौरान जब स्पीकर का चुनाव होगा तब दोनों गुट अपने-अपने व्हिप जारी करेंगे। ऐसे में संभावना है कि अगर शिंदे गुट के विधायक ठाकरे के चीफ व्हिप के व्हिप का उल्लंघन करते हैं तो उद्धव ठाकरे बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करवाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। यह दूसरे पक्ष के साथ भी हो सकता है। मतलब कि अगर उद्धव गुट के विधायक शिंदे गुट का व्हिप नहीं मानते तो 16 विधायकों की सदस्यता रद्द कराने के लिए एकनाथ शिंदे कोर्ट जा सकते हैं।

बता दें कि रविवार को महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होना है। इससे एक दिन पहले शनिवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार ने कहा कि अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बावजूद विधानसभा उपाध्यक्ष नरहरि जिरवाल कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में अपना कर्तव्य निभा सकते हैं। शिवसेना के एकनाथ शिंदे खेमे ने जिरवाल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दिया था।

महाराष्ट्र विधानसभा का दो-दिवसीय विशेष सत्र रविवार से शुरू होगा। इस दौरान नए अध्यक्ष का चुनाव होगा और एकनाथ शिंदे-नीत नवगठित सरकार को विश्वास मत का सामना करना पड़ेगा। विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला शिवसेना विधायक राजन साल्वी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक राहुल नार्वेकर के बीच है।

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