जैकी श्रॉफ बोले- मेरा बेटा टाइगर हीरो बन गया है तो क्या मैं फिल्मों में किसिंग सीन ना करूं?

137


जैकी श्रॉफ बोले- मेरा बेटा टाइगर हीरो बन गया है तो क्या मैं फिल्मों में किसिंग सीन ना करूं?

पिछले चार दशकों में तकरीबन हर तरह की भूमिका में घुल-मिल जाने वाले जग्गू दादा उर्फ जैकी श्रॉफ (Jackie Shroff) इन दिनों चर्चा में हैं। ओटीटी पर रिलीज होने वाली अपनी नई फिल्म ‘द इंटरव्यू: नाइट ऑफ 26/11’ (The Interview: Night of 26/11 ) को लेकर वह सुर्ख‍ियां बटोर रहे हैं। जैकी इस फिल्म में वॉर जर्नलिस्ट के रूप में स्टाइलिस्ट भूमिका में नजर आएंगे। अपने बिंदास अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले जैकी श्रॉफ जिनते मंझे हुए ऐक्‍टर हैं, उससे कहीं ज्‍यादा बेहरीन इंसान और पिता भी हैं। ‘नवभारत टाइम्‍स’ से खास बातचीत में जैकी श्रॉफ ने अपनी फिल्म, बेटे टाइगर, अपनी मां, पुराने दोस्त और कोरोना की बदहाली पर जज्बाती होकर मुंबइया स्टाइल में बात की। जब उनसे फिल्‍म में किसिंग सीन (Jackie Shroff Kissing Scene) को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्‍होंने दिलचस्‍प जवाब दिया। जैकी दा ने कहा, ‘बेटा टाइगर (Tiger Shroff) हीरो बन गया है तो क्‍या मैं फिल्‍मों में किसिंग सीन ना करूं?’

आप द इंटरव्यू नाइट ऑफ 26/11 जैसी फिल्म करने को क्यों प्रेरित हुए?
– मेरे पिताजी भी एक जमाने में जर्नलिस्ट हुआ करते थे। वो ब्लिट्ज और पी के करंजे साहब के टेब्लॉयड में वे के एच श्रॉफ के नाम से लिखते थे। जब मुझे इस भूमिका का प्रस्ताव मिला, तो मुझे लगा कि चलो मुझे अपने बाप की तरह जर्नलिस्ट बनने का मौका भी मिल गया। हालांकि मेरा किरदार एक वॉर जर्नलिस्ट है। इस वॉर जर्नलिस्ट को स्टार का इंटरव्यू लेने का दबाव डाला जाता है और फिर कहानी टर्न और ट्विस्ट लेकर मर्डर मिस्ट्री में तब्दील हो जाती है। एक रात की कहानी में बहुत कुछ होता है। फिर मैंने देखा कि इसके निर्देशक लॉरेंस पोस्तमा बड़े धुरंधर हैं। वे मैल्कम मैक्डॉवल जैसे हॉलिवुड के बड़े एक्टर को भी डायरेक्ट कर चुके हैं। जब वो ये कहानी मेरे पास लेकर आए, तो मुझे लगा कि आंख बंद करके ये फिल्म करनी चाहिए। ये डच फिल्म का अडॉप्टेशन है।

एक तरफ आपने एक्टर बेटे टाइगर श्रॉफ एक्शन-रोमांटिक रोल्स में नजर आते हैं और दूसरी तरफ आप इस फिल्म में किसिंग दृश्य करते नजर आ रहे हैं, तो क्या किसी तरह की कोई हिचकिचाहट थी? इस तरह के अंतरंग दृश्य करने में?
– नहीं किसी तरह की कोई हिचकिचाहट नहीं थी। मैं एक अदाकार हूं। टाइगर भले मेरा समकालीन एक्टर नहीं है, मगर वो अगर कोई रोल करता है, तो मुझे भी अपना ग्राउंड पकड़कर रखना पड़ेगा। मैं ये सोच कर अदाकार के रूप में अलग तरह की भूमिका को जाने नहीं दूंगा कि मेरा बेटा जवान हो गया है। मेरा जूता उसे आने लगा है। उसका जैकेट मैं पहनने हूं। भले अब वो मेरा जूता पहन रहा है, मगर हम दोनों कॉम्पटीटर तो हैं ही। माशाल्लाह उसने इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई है, इज्जत दिलाई है। लोग अब मुझे टाइगर श्रॉफ के नाम से जानने लगे हैं, तो बात ही कुछ और हो गई है। टाइगर से मुझे भी हौसला मिलता है और उसको भी अच्छा लगता है कि उसका बाप आज भी इतना फुर्तीला है। डैडी ने अभी तक हार नहीं मानी है।

आप अपने बेटे टाइगर को इंडस्ट्री के तौर-तरीकों या अभिनय पर कोई टिप्स देते हैं?
– नहीं। घर पर हमारी फिल्मों से संबंधित कोई बात नहीं होती। उसका स्वभाव ऐसा है कि वो खुद अकेले बैठकर पढता है। अपने रोल की तैयारी करता है। वह स्कूल के दिनों से ही ऐसा है। हम लोग अक्सर स्प्रिचुएलिटी और पेड़-पौधों से जुड़ी बातें करते हैं। हां, परदे पर उसके एक्शन दृश्यों को लेकर मैं भगवान से प्रार्थना जरूर करता हूं।

आपकी यह फिल्म ओटीटी रिलीज है। जबकि ‘बेल बॉटम’ ने महाराष्ट्र में थिएटर न खुलने के बावजूद सिनेमा हॉल का रुख किया। आप कोरोना काल में थिएटरों की स्थिति पर क्या कहेंगे?
– आज ओटीटी एक मजबूत पर्याय बनकर उभरा है। आने वाले दिनों में ऐसे कई प्लैटफॉर्म आएंगे और इससे धंधा बढ़ेगा ही। मुझे लगता है कि महाराष्ट्र में भी थिएटर को खुलने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा अब। जहां तक सिनेमा हॉल और ओटीटी की बात है, तो चादर पर फिल्म देखना और रुमाल पर फिल्म देखने में जमीन-आसमान का अंतर है। सूर्यवंशी को देखना है, तो वो चादर याने सिनेमा हॉल में ही अच्छी लगेगी। वो ग्रेंजर, एक्शन और बड़ी स्टारकास्ट को देखने का मजा वहीं आएगा। वैसे ओटीटी और दूसरे प्लैटफॉर्म मनोरंजन जगत के लिए बड़ी हेल्प हैं। इसके कारण कई भूले-बिसरे कलाकारों और टेक्निशियंस को काम मिला है। अब जैसे मैंने क्रिमिनल जस्टिस से ओटीटी डेब्यू किया और मुझे मजा आया।

इंडस्ट्री में तकरीबन चार दशक बिताने के बाद आपको क्या बदलाव लगता है?
– अपने में तो मैं कोई बदलाव महसूस नहीं करता। मैं तो आज भी दाल-चावल और भिंडी बनाकर अपने हाथों से खाता हूं। आज भी मुझे अपने पुराने दोस्तों से प्यार है। पेड़-पौधों से मोहब्बत है। दिल की चीजें तो वही हैं। बॉन मेरो कहां से बदलेगा? डीएनए कैसे बदलेगा? पहले तीन बत्ती की चॉल में पैखाने (टॉयलेट) के लिए लाइन लगाता था, ला-पापियो (बांदरा स्थित उनका मौजूदा निवास स्थान) आने के बाद वो नहीं लगाना पड़ता। जुबान मेरी शायद थोड़ी सुधर गई है। हां, मां की कमी हर वक्त खलती है। मैंने अपनी मां को हर खुशी देने की कोशिश की। हम जब तीन बत्ती चार रास्ता की चॉल में रहते थे, तब मां रात को खांसती भी थीं, तो पता चल जाता था। मगर ला पापयो जैसे शानदार ड्यूप्लेक्स में शिफ्ट हुए तो मेरा और मां का कमरा अगल-बगल में था। एक रात वह अचानक हार्ट अटैक से चल बसीं और मुझे पता भी नहीं चला।


पुराने अदाकारों में फिलहाल आप किसके संपर्क में हैं?
– डैनी साहब मेरे बहुत अच्छे मित्र हैं। संजू बाबा से हमेशा मिलता रहता हूं। कभी-कभी अनिल (कपूर) से बात हो जाती है। सनी भैया (सनी देओल) से बातें नहीं हो पाती। बंटी( कुमार गौरव) से खूब बातें होती हैं। मिथुन दा को मैं कभी-कभार खुद फोन कर लेता हूं। राज बब्बर साहब से बहुत मोहब्बत है, तो धरम जी जब भी मिलते हैं, उनके पैर और पीठ दबा लेता हूं। आशाजी (पारेख), वहीदा जी (रहमान) और तनु मां (अभिनेत्री तनूजा) के घर भी कभी-कभी चला जाता हूं। मैं अमृता सिंह के संपर्क में भी हूं। सभी युवा साथी कलाकारों से मेरी अच्छी पटती है। उसके साथ मैं कई बार पार्टियों में जाता हूं। अपने साथी कलाकारों के बच्चों के साथ मैं अक्सर पार्टियां करता हूं। वे सभी मेरे अच्छे दोस्त हैं। वे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते।

कोरोना के मुश्किल दौर में आप लोगों को क्या मेसेज देना चाहेंगे? आपने तो सविता बजाज जैसी कई जरूरतमंद कलाकारों और पत्रकारों को आर्थिक सहायता भी दी?
– हमें यही सिखाया गया है कि किसी की मदद करते हुए आपको उसकी आंख में नहीं देखना है। बस इतना कहना चाहता हूं कि हौसला रखें, अपने काम सेहत और पैसों को कभी ग्रांटेड न लें। बचत की मामले में मुंगी (चींटी) की तरह रवैया अपनाएं। वो कैसे बारिश के दिनों के लिए खाना इकट्ठा करके रखती है। ऐसे मुश्किल समय में जब काम नहीं है, तो आपको घर का किराया भी देना है और दाल रोटी का जुगाड़ भी करना है। फिर बीमारी आ गई, तो आपकी वाट लग जाती है। ऐसे में बचत ही काम आती है। मैंने जूनियर आर्टिस्टों, लावणी डांसर, बैकस्टेज कलाकार, फाइटर्स और बेचारे फ्रीलांस पत्रकारों की बेबसी देखी। बाप रे बाप, मैं बहुत दर्द महसूस करने लगा। ये वक्त भी निकल जाएगा ,प्लेग, हैजा और एड्स जैसी बीमारियों से हम उबरे हैं। सांस पर ध्यान दें और अपने परिवार की अहमियत को समझें।

navbharat times -Super Dancer 4: संगीता बिजलानी ने जैकी श्रॉफ संग मारी एंट्री, दिखाए शानदार मूव्स
navbharat times -VIDEO: फैन ने टाइगर श्रॉफ से पूछा- वर्जिन हो क्या? मिला मजेदार जवाब





Source link