जब अंग्रेजों का रेलवे ट्रेक उड़ाने वाले नाबालिग को देख जेल में सब थे सन्न, ब्रिटिश हुकूमत के उड़े थे होश

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जब अंग्रेजों का रेलवे ट्रेक उड़ाने वाले नाबालिग को देख जेल में सब थे सन्न, ब्रिटिश हुकूमत के उड़े थे होश

जब अंग्रेजों का रेलवे ट्रेक उड़ाने वाले नाबालिग को देख जेल में सब थे सन्न, ब्रिटिश हुकूमत के उड़े थे होश

राम त्रिपाठी, नई दिल्लीः ‘हमने आजादी की लड़ाई देश और भावी पीढ़ी को कुछ देने के लिए लड़ी थी। अपने लालच में किसी से कुछ मांगने या पाने के लिए नहीं… मेहनत करो, संघर्ष करो और पाओ।’ यह कहना है 1943-44 के ‘वजीराबाद (अब पाकिस्तान में) रेलवे ट्रैक पल्खू रिवर बम कॉन्सपिरेसी केस’ के मुख्य साजिशकर्ता ओम प्रकाश की। युवा अवस्था में देश की आजादी की लड़ाई में जुड़े स्वतंत्रता सेनानी ओम प्रकाश ने कभी हार नहीं मानी और न ही खुद को विवश और बेसहारा माना है। यहां तक कि 97 साल के इस सेनानी से 13 साल पहले मौत ने उनका इकलौता बेटा जय प्रकाश छीन लिया था। इसके बावजूद इन्होंने अपनी सक्रियता नहीं खोई, लेकिन 3 साल पहले घर में फिसलकर गिर जाने से उनके ब्रेन में चोट आई है। उसी दौरान कोविड की चपेट में आने से डॉक्टरों की सलाह पर घर में आराम कर रहे हैं। उन्होंने अपने इलाज के लिए किसी भी सरकार से कोई अपील तक नहीं की है।

छात्र जीवन में ही जंग-ए-आजादी में हुए शामिल

महज 16-17 साल की उम्र में स्वतंत्रता सेनानियों की जमात में शामिल हुए कॉलेज स्टूडेंट ओम प्रकाश ने रेलवे लाइन को उड़ाने की योजना अपने साथियों के साथ तैयार की थी। वह अपने घर के आसपास रहने वाले स्वतंत्रता सेनानियों से प्रभावित थे। स्कूल के समय में आजादी के पर्चे बांटने का काम भी वे चोरी-छुपे करते थे। वजीराबाद में हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करके जम्मू कॉलेज में बीए में एडमिशन लिया था। फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट और कॉलेज की हॉकी टीम के कैप्टन ओम प्रकाश ने हॉकी की स्टिक छोड़कर आजादी का झंडा और डंडा थाम लिया था। कोलकाता के एक व्यक्ति से बम बनाना सीखा था। ब्रिटिश सरकार के खिलाफ बगावत का ऐलान करते हुए रेल ट्रैक उड़ा दिया था।

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जन आक्रोश के डर से ब्रिटिश हुकूमत ने बदला केस

बम विस्फोट कर ओम प्रकाश फरार हो गए। पंजाब की सीआईडी पुलिस ने पंजाब से बिहार के सासाराम और फिर दिल्ली में उनकी तलाश की। स्वतंत्रता सेनानी को पुलिस ने गुजरावालां रेलवे स्टेशन के पास गिरफ्तार कर लिया था। युवा स्वतंत्रता सेनानी की गिरफ्तारी की सूचना पूरे राज्य में तेजी से फैल गई थी। ऐसे में आंदोलन भड़कने की आशंका पैदा हो गई थी। हालात देखते हुए पंजाब के उस समय के गवर्नर सिकंदर बख्त ने स्वतंत्रता सेनानी ओम प्रकाश के खिलाफ सरकार से बगावत यानी राजद्रोह का मुकदमा वापस लेकर रेलगाड़ी से सरकारी खजाना लूटने का दोषी बना दिया था। राजद्रोह का मुकदमा चलता तो दोषी को लंबी सजा तय थी। अगर ऐसा होता तो ब्रिटिश हुकूमत को बड़े आंदोलन का सामना करना पड़ सकता था, जो हिंसक भी हो सकता था। खैर, खजाना लूटने की बात भी लोगों को हजम नहीं हुई थी, क्योंकि उनके पिता ब्रिटिश कंपनी में नौकरी करते थे।

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ओम प्रकाश का जन्म अलीगढ़ (यूपी) में हुआ था। उनका घर दिल्ली के रोहतक रोड में था। ओम प्रकाश के 4 भाई और 7 बहनें थीं। उनका परिवार संपन्न माना जाता था। पिता का तबादला उत्तर भारत में कई स्थानों पर हुआ था। पिता के तबादलों के कारण उनकी पढ़ाई वजीराबाद से लेकर जम्मू तक हुई थी। आजादी की लड़ाई में शामिल होने पर उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई छोड़ दी थी।

अब भी आंदोलित कर देती हैं पुरानी यादें

वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी ओम प्रकाश को मुल्तान, न्यू सेंट्रल जेल की यादें अभी भी आंदोलित कर देती हैं। जेल के अधिकारी नाबालिग उम्र के ओम प्रकाश को देखकर दंग रह गए थे। जेल में बिताए 13 महीने में भी वह शांत नहीं बैठे थे। जेल में पहले से बंद स्वतंत्रता सेनानियों के बीच उन्होंने तेजी से अपना नेटवर्क बनाया था। उन्हें व अन्य स्वतंत्रता सेनानियों को सूचना मिली थी कि ओल्ड सेंट्रल जेल में बंद कॉमरेड राम किशन बीमार हैं। उन्हें उचित चिकित्सा और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। कैदियों का दैनिक भत्ता भी बहुत कम है। स्वतंत्रता सेनानियों ने कॉमरेड राम किशन के इलाज और उन्हें न्यू जेल में लाने के लिए जेल में ही आंदोलन छेड़ दिया था। जेल अधिकारियों को कॉमरेड राम किशन को नई जेल में लाना ही पड़ा था। कॉमरेड राम किशन और युवा ओम प्रकाश के बीच काफी नजदीकियां आ गई थीं। आजादी के बाद राम किशन पंजाब के मुख्यमंत्री बने थे।

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देश को आजादी मिलने के बाद ओम प्रकाश का प्रेम रानी से विवाह हुआ था। उनके एक बेटा और एक बेटी हुए। बेटा जय प्रकाश काम के सिलसिले में पटना चले गए थे। वह कभी अपने बेटे, तो कभी बेटी पोमिला के पास रहते हैं। बेटे जय प्रकाश की मौत के बाद उनकी बहु बिंदु, पोता अभिषेक और उसकी पत्नी प्रज्ञा की सेवा से वे बहुत खुश हैं। दिल्ली में रहने वाले उनके दामाद रमेश कुमार बाटा दिल्ली में स्वतंत्रता सेनानियों के हर कार्यक्रम में उनके साथ रहते हैं। वही उनको कार्यक्रमों में ले जाते रहे हैं। ओम प्रकाश के तीन भाई और बहनें दिल्ली में ही रहते हैं।

भारत सरकार से ताम्रपत्र प्राप्त और स्वतंत्रता सेनानियों की समिति के सदस्य ओम प्रकाश का मानना है कि देश में बहुत अच्छे कार्य हो रहे हैं और भविष्य अच्छा है। उन्हें किसी से कोई शिकायत नहीं है। उनका युवा पीढ़ी को संदेश है कि देश से प्यार करो। कड़ी मेहनत करो और प्रगति करो। स्वस्थ और खुश रहो।

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