छू लेने दो नाजुक होठों को…अधूरा गाना, जिसे लिखने के बाद लापता हो गए थे साहिर लुधियानवी!

106
छू लेने दो नाजुक होठों को…अधूरा गाना, जिसे लिखने के बाद लापता हो गए थे साहिर लुधियानवी!

छू लेने दो नाजुक होठों को…अधूरा गाना, जिसे लिखने के बाद लापता हो गए थे साहिर लुधियानवी!

‘छू लेने दो नाजुक होठों को, कुछ और नहीं हैं, जाम हैं ये…’ जमाने बीत गए, लेकिन आज भी इस गाने को सुनकर ऐसा लगता है कि नशा घुल गया है। ये गाना हिंदी फिल्म ‘काजल’ का है। करीब 57 साल पहले साल 1965 में ये मूवी रिलीज हुई थी। इस गाने को साहिर लुधियानवी ने लिखा था, रवि जी ने म्यूजिक दिया था और आवाज मोहम्मद रफी की थी। रफी साहब ने कभी शराब को हाथ नहीं लगाया था, लेकिन जिस नशीले अंदाज में ये गाना गाया, वो काबिले तारीफ है। हम आपको इस गाने से जुड़ा एक ऐसा दिलचस्प किस्सा बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में आप शायद ही जानते होंगे। क्या आपको पता है कि ये गाना अधूरा है! जी हां, इसके दो शेर लिखने के बाद साहिर साहब लापता हो गए थे। उन्होंने पूरे देश में अलग-अलग जगहों पर खोजा गया था, लेकिन वो नहीं मिले। इस वजह से मेकर्स को सीन में भी बड़ा बदलाव करना पड़ा था।

गाने के बारे में जानने से पहले, फिल्म काजल के बारे में जान लीजिए। इस मूवी का निर्माण और निर्देशन राम माहेश्वरी ने किया था। कहानी गुलशन नंदा ने लिखी थी, जो उपन्यास माधवी पर आधारित थी। फणि मजूमदार और केदार शर्मा ने डायलॉग लिखे थे। राजकुमार, मीना कुमारी, धर्मेंद्र, हेलन, टुनटुन, मुमताज, पद्मिनी, दुर्गा खोटे और महमूद ने अहम भूमिका निभाई थी। फिल्म की कामयाबी में साहिर लुधियानवी और संगीतकार रवि जी का बहुत बड़ा हाथ था। इसका गाना ‘छू लेने दो नाजुक होठों को…’ बेहद पॉप्युलर हुआ था। आपको जानकर हैरानी होगी कि इसे शुरुआत में गाने के तौर पर बनाया और लिखा ही नहीं गया था। बस ये गाना बन गया। वो भी अधूरा..।

आमिर और सलमान नहीं, मिथुन चक्रवर्ती ने दी थी पहली 100 करोड़ी फिल्म! विदेशों में की थी तगड़ी कमाई
ऐसे हुई थी गाना बनाने की शुरुआत

sahir ludhianvi mohammad rafi

इस गाने को साहिर लुधियानवी ने लिखा था और मोहम्मद रफी ने आवाज दी थी

इस दिलचस्प किस्से के बारे में म्यूजिक डायरेक्टर रवि जी ने खुद बताया है। वो कहते हैं कि प्रोड्यूसर राम माहेश्वरी उनके पास आए थे। उस वक्त साहिर साहब भी वहां बैठे हुए थे। राम माहेश्वरी जी ने सिचुएशन बतानी शुरू की कि कैसे मीना कुमारी को राजकुमार शराब पीने के लिए मजबूर कर रहे हैं। उन्होंने साहिर से कहा कि इसके लिए दो शेर लिख दें और तरन्नुम में कुछ कहें। रवि जी ने आगे बताया, ‘मैंने धुन बनाकर गा दिया, लेकिन तभी मेरे दिमाग में एक और धुन आई। ये धुन साहिर को सुनाई तो उन्हें भी बहुत पसंद आई। साहिर ने कहा, ‘डायरेक्टर साहब को इसका गाना बनाने के लिए कहते हैं।’ फिर डायरेक्टर आए, उन्हें गाना सुनाया गया। हालांकि, उन्होंने बोला कि राजकुमार के मुंह पर गाना अच्छा नहीं लगेगा। कभी किसी ने उनको गाना नहीं दिया है।

जगह-जगह हुई थी साहिर लुधियानवी की खोज

chu lene do nazuk hothon lyrics

साहिर साहब और रफी जी ने साथ कई गाने लिखे और गाए हैं

डायरेक्टर की बात सुनकर रवि जी ने कहा कि अगर गाना अच्छा है तो कोई भी गाए, अच्छा ही लगेगा। वो मान गए, बेदिली से कहा कि दो शेर से ज्यादा मत रखा। इस पर साहिर जी ने हामी भर दी। वो दो शेर लिखकर ले आए। जिस दिन गाना रिकॉर्ड हो रहा था, उसे प्रोड्यूसर और डिस्ट्रीब्यूटर सब सुन रहे थे। हर किसी ने जमकर तारीफ की। जब गाना खत्म हुआ तो डिस्ट्रीब्यूटर ने राम माहेश्वरी से शिकायत करते हुए कहा कि इतने अच्छे गाने का सिर्फ दो शेर ही क्यों है? ये सुनकर राम परेशान हो गए। उन्होंने साहिर को फोन लगाया कि अगर तीसरा शेर है तो दे दें। लेकिन साहिर मिले नहीं। उन्हें हर जगह खोजा गया। भारत के ज्यादातर शहरों में साहिर को ढूंढने के लिए आदमी तक भेजे गए, लेकिन कई दिनों तक उनका कुछ अता-पता नहीं चला।

मजबूर होकर मेकर्स ने बदला था सीन

kaajal movie

काजल फिल्म की कामयाबी में साहिर लुधियानवी और रफी साहब का बड़ा हाथ था

फिर मजबूर होकर निर्माता-निर्देशक ने दो अंतरों वाले उस गाने को ही फिल्म में रखने का फैसला किया। जब दो अंतरे वाले गाने को दोबारा रिकॉर्ड किया गया तो रफी साहब ने उसका अंत ऐसे किया कि मानो हीरो गाते-गाते शराब के नशे में बेसुध हो जाता है और अचानक उसकी आवाज बंद हो जाती है। इस तरह से देखने वालों को लगता है कि गाना पूरा हो चुका है, लेकिन ये अधूरा है। बाद में ये गाना इतना हिट हुआ था कि राजकुमार के पूरे करियर में छाया रहा। जब भी उनका जिक्र होता है तो ये गाना जरूर याद आ जाता है। राजकुमार को भी ये गाना इतना पसंद था कि वो रफी साहब के मुरीद बन गए थे।

navbharat times -Throwback Thursday: भारत में सबसे पहले इस फिल्‍म का हुआ था बायकॉट, PM पंडित नेहरू ने माहौल देख लगा दिया था बैन
ये गाना सिर्फ इतना ही बना है:

https://www.youtube.com/watch?v=U2QURb3FbOA


छू लेने दो नाज़ुक होठों को
कुछ और नहीं हैं जाम हैं ये
क़ुदरत ने जो हमको बख़्शा है
वो सबसे हंसीं ईनाम हैं ये

शरमा के न यूं ही खो देना
रंगीन जवानी की घड़ियां
बेताब धड़कते सीनों का
अरमान भरा पैगाम है ये, छू…

अच्छों को बुरा साबित करना
दुनिया की पुरानी आदत है
इस मै को मुबारक चीज़ समझ
माना की बहुत बदनाम है ये, छू…