‘छाती पीटकर रो रहे लोग सुन लें…’ महाराष्ट्र के प्रोजेक्ट क्यों चले गए गुजरात? फडणवीस और गोयल ने दिया करारा जवाब

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‘छाती पीटकर रो रहे लोग सुन लें…’ महाराष्ट्र के प्रोजेक्ट क्यों चले गए गुजरात? फडणवीस और गोयल ने दिया करारा जवाब

नई दिल्ली : गुजरात चुनावों (Gujarat Elections) से पहले राजनीतिक गलियारों में एक बहस बड़ी आम है। बहस इस पर छिड़ी है कि महाराष्ट्र के प्रोजेक्ट गुजरात क्यों जा रहे हैं? दरअसल, महाराष्ट्र के दो बड़े प्रोजेक्ट अब गुजरात में लगेंगे। हाल ही में खनन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी वेदांता ने अपने चिप फैक्ट्री प्रोजेक्ट को महाराष्ट्र के बजाय गुजरात में लगाने का फैसला किया था। यह प्रोजेक्ट 1.53 लाख करोड़ रुपये का है। इसके बाद टाटा-एयरबस सी-295 परिवहन विमान परियोजना भी गुजरात चली गई। यह परियोजना 22,000 करोड़ रुपये की है। इसमें एयरबस और टाटा समूह का एक कंसोर्टियम गुजरात के वडोदरा में भारतीय वायु सेना के लिए C-295 परिवहन विमान का निर्माण करेगा। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) और केद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में इस सवाल का जवाब दिया है। आइए जानते हैं।

4-6 दिन में तय नहीं होते हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट
महाराष्ट्र के प्रोजेक्ट गुजरात क्यों जा रहे हैं, इस सवाल पर पीयूष गोयल ने कहा, ‘बच्चे यह बात करें तो समझ में आता है। आप जैसे अनुभवी पत्रकार भी ऐसी बात करें तो बड़ा आश्चर्य लगता है। मुंबई एक आर्थिक नगरी है देश की। हजारों करोड़ का कोई प्रोजक्ट चार दिन-छह दिन में तय नहीं होता है। इसके पीछे लंबी प्रक्रिया होती है। लंबी स्टडी होती है। इंसेंटिव, छूट सब चीजों का ध्यान रखा जाता है। हम खुद बिजनस वर्ल्ड से आते हैं। निवेश के फैसले बड़ी पेचीदा प्रक्रिया के बाद लिए जाते हैं। राजनीतिक, आर्थिक सभी परिस्थितियों को देखा जाता है। हमारे पास इतना समय नहीं है कि उनको रोज रेस्पांस करें। मीडिया टीआरपी के लिए विवाद खड़ा करती है।’

भारत की ओर देख रहीं दुनिया की बड़ी कंपनियां
गोयल ने आगे कहा, ‘आजकल आप बहुत सुनते होंगे कि बड़ी-बड़ी कंपनियां भारत की तरफ देख रही हैं। मोदीजी के नेतृत्व में जिस प्रकार से मेक इन इंडिया प्रमोट हुआ है, पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। वे देखते हैं कि कई देश हैं, जहां डेमोक्रेसी नहीं हैं। जहां उनको डर भी लगता है। पता नहीं कब कोई करोड़पति आदमी भी गायब हो जाए। ऐसे में वे अब भारत की ओर देख रहे हैं। ऐसी ही एक सीईओ फोरम परसों और कल दिल्ली में हुई। प्रमुख देश जो हमारे उत्तरी पड़ोसी के साथ लड़ाई लड़ना चाहते हैं, उनके सीईओ आए थे।’

महाराष्ट्र की पुरानी सरकार में डर रही थी कंपनियां
गोयल ने आगे कहा, ‘एक प्रोजेक्ट को लेकर मैंने उनसे पूछा कि आपने महाराष्ट्र में वह प्रोजेक्ट क्यों नहीं किया। इस पर उन्होंने कहा कि वहां पर इतनी तकलीफ थी कि बिजनस करने का मजा नहीं आ रहा था। मैंने पूछा कि आप मजा किसे कहते हैं। उन्होंने कहा कि वहां उस समय राजनीतिक स्थिरता नहीं थी। भ्रष्टाचार काफी था। ईज ऑफ डूइंड बिजनस नहीं था। एक पार्टी के मंत्री से कुछ तय कर लो, तो दूसरी पार्टी का मंत्री पूछता था कि मेरा हिस्सा कहां हैं। हिस्सेदारी बांटने के चक्कर में महाराष्ट्र का जो नुकसान हुआ है, अब देवेंद्र जी को दोगुनी मेहनत करके इसका मेकअप करना पड़ेगा। हमारी सरकार ने 2014 से आज तक कहा है कि हम देश के सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस प्रतिस्पर्धा में लगेंगे, तभी देश आगे बढ़ेगा। जितनी ज्यादा स्पर्धा होगी और निवेशकों को बुलाकर इंडियन इंडस्ट्री को प्रमोट करेंगे, उतना अच्छा रहेगा।
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महाराष्ट्र में अब तक के सबसे बड़े प्रोजेक्ट को आने से रोका

वहीं, महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा, ‘साल 2014 में हम आए। साल 2015 से लेकर 2019 तक, महाराष्ट्र एफडीआई में नंबर 1 था। गुजरात, तमिलनाडु, दिल्ली और कर्नाटक में जितना एफडीआई था, उसका डेढ़ गुना महाराष्ट्र में था। इसलिए महाराष्ट्र को कोई पीछे नहीं ले जा सकता। लोग जो छाती पीट-पीटकर रो रहे हैं, ये वे लोग हैं, जिन्होंने महाराष्ट्र में आ रहे सबसे बड़े प्रोजेक्ट पर पानी फेर दिया। आज तक के इतिहास का देश का सबसे बड़ा निवेश ग्रीन रिफाइनरी के रूप में महाराष्ट्र में आ रहा था। इस निवेश में 60 फीसदी हिस्सा सरकारी कंपनियों का था। ऐसे निवेश को आने नहीं दिया गया। उसका विरोध किया, उसको रोका। हमारी सरकार के जाने के बाद उसको खत्म किया। वो अकेला निवेश आता तो 2 साल में जितना बाकी राज्यों में निवेश होता, उतना उनके पास एक बार में आ जाता। इसलिए इनको अधिकार नहीं है बोलने का।’

60 मिलियन टन की रिफाइनरी फैसिलिटी
फडणवीस की बात को आगे बढ़ाते हुए गोयल ने कहा, ‘यह 60 मिलियन टन की रिफाइनरी फैसिलिटी थी। आज पूरे विश्व में ऐसी एक भी नहीं है। सऊदी अरब और भारत इसमें साथ आ रहे थे। वे करीब 8 लाख करोड़ भारत में निवेश करना चाहते थे। देवेंद्र फडनवीस के मुख्यमंत्री काल में सब तय हो गया था। लेकिन इन्होंने सरकार में आकर रोड़ा डाला। पूरा प्रोजेक्ट खराब किया। अब मैं उन्हें दोबारा बुलाने में लगा हूं। पिछले 3 साल के अनुभव से वो अभी भी डरते हैं।’

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