चंद्रकांत पाटिल पर स्याही फेंकने के मामले में जर्नलिस्ट समेत 4 गिरफ्तार, पत्रकार संगठनों ने जताया विरोध

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चंद्रकांत पाटिल पर स्याही फेंकने के मामले में जर्नलिस्ट समेत 4 गिरफ्तार, पत्रकार संगठनों ने जताया विरोध

मुंबई: राज्य के उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील (Chandrakant Patil) पर स्याही फेंकने के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें तीन समता सैनिक दल के कार्यकर्ता हैं और एक न्यूज चैनल का रिपोर्टर है। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके नाम मनोज भास्कर घरबडे (समता सैनिक दल के आयोजक), धनंजय भाऊसाहेब इजागज (समता सैनिक दल सदस्य) और विजय धर्म ओवल (वंचित बहुजन आघाडी) हैं। इसके अलावा जिस रिपोर्टर को गिरफ्तार किया गया है, उसका नाम गोविंद वाकाडे बताया गया है। पुलिस ने स्याही फेंकने वालों पर हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया है, वहीं पत्रकार संगठनों ने इस मामले में विरोध दर्ज कराया है। तीनों आरोपियों को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। मनोज गरबाडे ने चंद्रकांत पाटील के चेहरे पर स्याही फेंकी और वहां नारेबाजी भी की थी। इसके बाद पुलिस ने तुरंत उसे हिरासत में ले लिया। आरोपियों के वकीलों का कहना है कि गिरफ्तार तीनों के खिलाफ 307 जैसा गंभीर अपराध दर्ज कर उन्हें राजनीतिक द्वेष से फंसाने का प्रयास किया गया। वकीलों ने कहा है कि इन तीनों ने 307 जैसा अपराध नहीं किया है।

पत्रकार संघ ने की निंदा
मुंबई मराठी पत्रकार संघ ने चंद्रकांत पाटील के उस बयान की निंदा की है, जिसमें स्याही फेंकने की घटना को कैमरे में कैद करने वाले पत्रकार को गिरफ्तार करने की मांग पाटील द्वारा की जा रही है। संघ ने कहा कि चंद्रकांत पाटील को थप्पड़ मारना अनुचित और निंदनीय है। लेकिन इस थप्पड़ मारने की खबर को कवर करने वाले पत्रकार को गिरफ्तार करने की मांग ज्यादा आपत्तिजनक है। मुंबई मराठी पत्रकार संघ के अध्यक्ष नरेंद्र वाबले ने कहा कि पाटील को अपना बयान वापस लेना चाहिए और माफी मांगनी चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो हमें लोकतांत्रिक तरीकों से अगले आंदोलन के बारे में सोचना होगा।

तालिबान जैसा व्यवहार कर रही है सरकार: राजू शेट्टी
पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने कहा है कि स्याही फेंकना गलत है, लेकिन स्याही फेंकने वाले युवकों पर दर्ज मुकदमों को देखकर लगता है कि सरकार तालिबान की तरह व्यवहार करने लगी है। 307 यानि धारदार हथियार से जान से मारने की कोशिश और 353 मतलब सरकारी काम में बाधा। शेट्टी ने पूछा कि महापुरुषों का अपमान करना सरकारी काम है क्या? फिर दिल्ली में किसान आंदोलन में 700 से ज्यादा किसानों को मारने वाली सरकार के लिए जिम्मेदार लोगों पर 302 की धारा क्यों नहीं लगाई गई।

10 पुलिसकर्मी निलंबित
उधर पुलिस महकमे ने चंद्रकांत पाटील पर स्याही फेंके जाने की घटना के संबंध में अपने तीन अधिकारियों और सात अन्य कर्मियों को निलंबित कर दिया है। दस पुलिसकर्मियों के खिलाफ पाटिल की सुरक्षा में कथित तौर पर चूक को लेकर कार्रवाई की गई है। एक शीर्ष अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।

यह है मामला
शनिवार को पुणे के पास पिंपरी पाटील पर स्याही फेंकने की घटना डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले के बारे में पाटील की विवादास्पद टिप्पणी के विरोध में हुई थी। पाटील पर तीन लोगों ने उस समय स्याही फेंकी थी, जब वह पिंपरी में एक पदाधिकारी के घर से बाहर निकल रहे थे। दरअसल, शुक्रवार को औरंगाबाद में एक कार्यक्रम में उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री पाटील ने मराठी में कहा था कि आंबेडकर और फुले ने शैक्षणिक संस्थान चलाने के लिए सरकारी अनुदान नहीं मांगा, उन्होंने स्कूल और कॉलेज शुरू करने के लिए धन इकट्ठा करने के वास्ते लोगों से ‘भीख’ मांगी। ‘भीख’ शब्द के प्रयोग से विवाद खड़ा हो गया। विपक्षी पार्टियां इसे बाबासाहेब आंबेडकर और महात्मा फुले का अपमान बता रही हैं। उनका कहना है कि दोनों महापुरुषों ने बहुजन समाज में शिक्षा का प्रसार करने के लिए भीख नहीं मांगी, बल्कि जनसहयोग से गरीबों के लिए स्कूल खोले थे।

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