गुजरात दंगों पर बनी SIT के चीफ को बाद में उच्‍चायुक्‍त बना दिया गया, सुप्रीम कोर्ट में सिब्‍बल की दलील

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गुजरात दंगों पर बनी SIT के चीफ को बाद में उच्‍चायुक्‍त बना दिया गया, सुप्रीम कोर्ट में सिब्‍बल की दलील

हाइलाइट्स

  • 2002 गुजरात दंगों में जाकिया जाफरी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
  • SIT के तत्‍कालीन सीएम नरेंद्र मोदी व अन्‍य को क्‍लीन चिट को दी गई चुनौती
  • जाफरी के वकील कपिल सिब्‍बल का SIT चीफ रहे आरके राघवन पर सवाल
  • SIT ने अपना काम नहीं किया, चीफ को बाद में उच्‍चायुक्‍त बनाया: सिब्‍बल

सुप्रीम कोर्ट
गुजरात दंगे मामले में एसआईटी द्वारा तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिए जाने के खिलाफ जाकिया जाफरी की अर्जी पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल ने दलील दी कि एसआईटी जांच को हेड करने वाले अधिकारी आरके राघवन को बाद में हाई कमिश्नर ( उच्चायुक्त) बनाया गया। उन्होंने दलील के दौरान आरोप लगाया कि जिनका भी सहयोग था उन्‍हें बाद में उच्च पद दिए गए।

‘SIT ने बड़ी खामियां की हैं’
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएम खानविलकर की अगुवाई वाली बेंच के सामने जाकिया जाफरी की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने दलील दी कि आरके राघवन सीबीआई डायरेक्टर रह चुके हैं, वह एसआईटी के हेड थे उन्हें बाद में अगस्त 2017 में साइप्रस का उच्चायुक्त बनाया गया। इसी तरह अहमदाबाद के पुलिस कमिश्नर पीसी पांडेय को बाद में गुजरात का डीजीपी बनाया गया। इस मामले की छानबीन में एसआईटी ने काफी खामियां की है और अहम साक्ष्य को नजरअंदाज किया और सही तरह से मामले की छानबीन नहीं की। दरअसल एसआईटी सिर्फ बैठी रही थी।

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‘कमिश्‍नर क्‍या कर रहे थे, सब जानते हैं’
सिब्बल ने आगे दलील दी कि एनएचआरसी ने शिकायत की थी कि स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। तब सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी का जो निष्कर्ष है वह मुख्य तथ्यों से परे है। 27 फरवरी को हिंसा हुई थी। उसके बाद अंतिम संस्कार हो रहा था। अहमदाबाद के पुलिस कमिश्नर ने कहा था कि सबकुछ शांतिपूर्ण तरीके से हो रहा है। एसआईटी का निष्कर्ष यह था कि सबकुछ शांतिपूर्ण था लेकिन तथ्य इसके विपरीत था और इन बातों की छानबीन नहीं हुई।

पुलिस कमिश्नर लगातार अपने दफ्तर में बैठे रहे थे। वह क्या कर रहे थे और क्यों कर रहे थे। क्या कर रहे थे सब जानते हैं लेकिन क्यों कर रहे थे ये नहीं पता। दिन भर ऑफिस में रहे बाहर नहीं निकले। तीन बार आरोपी से बात की थी। यह सब निंदनीय है। वह एक आरोपी के तौर पर थे और बाद में गुजरात के डीजीपी बने थे। आरोपी से डीजीपी तक का सफर थोड़ा परेशान करने वाली बात है। इस मामले में एसआईटी ने अपना काम नहीं किया।

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Sibal-raghavan

राघवन की भूमिका पर सिब्‍बल ने उठाए सवाल



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