गीतिका के स्यूसाइड नोट में थे संगीन आरोप, फिर भी साबित नहीं हुआ गोपाल कांडा का अपराध, सदमे में परिवार

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गीतिका के स्यूसाइड नोट में थे संगीन आरोप, फिर भी साबित नहीं हुआ गोपाल कांडा का अपराध, सदमे में परिवार

गीतिका के स्यूसाइड नोट में थे संगीन आरोप, फिर भी साबित नहीं हुआ गोपाल कांडा का अपराध, सदमे में परिवार

नई दिल्ली: ‘मेरी मौत के लिए दो लोग जिम्मेदार हैं- अरुणा चड्ढा और गोपाल गोयल कांडा। इन दोनों ने मेरा विश्वास तोड़ा और अपने फायदे के लिए मेरा गलत इस्तेमाल किया।’ ये लाइनें गीतिका के स्यूसाइड नोट की हैं, जिसने महज 23 साल की उम्र में मौत को गले लगा लिया था। इतने स्पष्ट आरोप… बावजूद इसके अदालत को कांडा और चड्ढा बेगुनाह नजर आए। ऐसा क्यों हुआ? क्यों अभियोजन का केस कानून की नजर में इतना कमजोर पड़ गया कि इन दोनों आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया।

अडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर मनीष रावत के मुताबिक, कुछ ऐसे कारण हैं जिन्होंने अभियोजन के केस को गंभीर नुकसान पहुंचाया। जैसे- शिरीश मारुति थोराट का बयान, जो उस वक्त एमिरेट्स एयरलाइंस में काम करते थे। वो एयरलाइंस जहां गीतिका ने MDLR छोड़ने के बाद दुबई में जॉइन किया था। घटनाक्रम 2010 का है। थोराट ने गीतिका के खिलाफ नौकरी के लिए जाली एनओसी देने से जुड़े आरोपों की जांच की थी। अदालत के सामने थोराट ने कहा कि मृतक ने जाली एनओसी देने की बात मानी थी और कहा था कि उनका पिछला नियोक्ता (MDLR) एनओसी नहीं दे रहा था। थोराट के इस बयान को बचाव पक्ष ने अपने फेवर में रखा। दावा किया कि इसी से यह साफ हो जाता है कि गीतिका ने एमिरेट्स एयरलाइंस से इस्तीफा अपने आचरण की वजह से दिया था।

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अभियोजन के मुताबिक, दूसरा नुकसान चनशिवरूप सिंह की फरारी से हुआ। वह भी इस मामले में एक आरोपी था। आरोपियों ने गीतिका को दुबई से वापस लाने का जिम्मा सिंह को ही सौंपा था। उसने अदालत के सामने अपने शुरुआती बयान में यह बात भी कबूली। सरकारी गवाह बनने की हामी भी दे दी। पर जब तक ऐसा हो पाता, वह फरार हो गया और आज तक फरार ही है। उसे भगोड़ा घोषित किया जा चुका है।

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तीसरा नुकसान मृतक की मां अनुराधा शर्मा की मौत से हुआ। वह मुख्य शिकायतकर्ता थीं और अभियोजन के लिए सबसे अहम गवाह…। पर बेटी की मौत के लगभग छह महीने बाद ही उनकी भी खुदकुशी करने की खबर आई। उनके जाने से अभियोजन का केस कमजोर पड़ गया। गीतिका के भाई और पिता ने केस को कायम रखने की पूरी कोशिश तो की, पर वो शिकायतकर्ता की कमी को पूरा नहीं कर सके।

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चौथा नुकसान मृतक गीतिका के कजन गौरव शर्मा की गवाही से पहुंचा। गौरव का बयान अदालत का भरोसा तो हासिल नहीं कर सका, उल्टा अभियोजन के केस को संदेह से भर गया। गौरव ने अपने बयान में कहा कि वह गीतिका के साथ मुंबई गया था। उन्हें 3 अगस्त, 2012 को लौटना था। शाम 8:30 बजे की फ्लाइट थी लेकिन गीतिका की अंकित अहलूवालिया के साथ लगातार लड़ाई होने के चलते उनकी फ्लाइट मिस हो गई थी।

अदालत ने जजमेंट में कहा कि हो सकता है कि गीतिका मुंबई में किसी और व्यक्ति के साथ ठहरी हों, जिसकी पहचान छिपाए रखने के लिए गवाह (गौरव शर्मा) ऐसा कह रहा हो कि गीतिका ने 3 अगस्त की रात एयरपोर्ट पर गुजारी। अदालत को गीतिका की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट इस तथ्य के समर्थन में लगी, जिसके मुताबिक गीतिका ने मौत से पहले शारीरिक संबंध बनाए थे।

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