क्या ये पुरानी अदावत है…महिला पहलवानों से लड़ाई में फंस गए बृजभूषण सिंह, सीएम योगी की चुप्‍पी पर उठ रहे सवाल

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क्या ये पुरानी अदावत है…महिला पहलवानों से लड़ाई में फंस गए बृजभूषण सिंह, सीएम योगी की चुप्‍पी पर उठ रहे सवाल

क्या ये पुरानी अदावत है…महिला पहलवानों से लड़ाई में फंस गए बृजभूषण सिंह, सीएम योगी की चुप्‍पी पर उठ रहे सवाल

लखनऊ: पहलवान दंगल छोड़ आंदोलन की जमीन पर उतरे हुए हैं। निशाने पर रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह हैं। बृजभूषण शरण के खिलाफ पहलवानों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर लिया है। 10 पहलवानों की ओर से एफआईआर दर्ज कराया गया है। पिछले दिनों दिल्ली पुलिस ने पर्याप्त सबूत न मिलने की बात कही है। ऐसे में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दर्ज पॉक्सो एक्ट को हटाए जाने की भी बात सामने आई है। इन तमाम मुद्दों के बीच एक सवाल उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारे में गूंज रहा है कि आखिर इस बड़े मुद्दे में अब तक यूपी भाजपा के किसी भी बड़े नेता का कोई बड़ा बयान सामने नहीं आया है। खासकर यूपी में भाजपा का चेहरा माने जाने वाले सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी इस मामले से दूरी बनाई हुई है। उन्होंने इस केस में अब तक कोई भी बयान नहीं दिया है।

क्या अदावत है पुरानी?

सीएम योगी के पहलवानों के आंदोलन और बृजभूषण शरण सिंह पर लगते आरोपों के बीच उदासीन रवैये की खासी चर्चा है। उन पर आरोप लगाने वाले भी हैरान हैं। दरअसल, कभी सीएम योगी आदित्यनाथ और बृजभूषण को करीबी माना जाता था। लेकिन, पिछले दिनों में दोनों नेताओं के बीच दूरी साफ दिखी। माफियाओं के खिलाफ चल रहे बुलडोजर एक्शन की चपेट में बृजभूषण फैमिली भी आई। दरअसल, बृजभूषण की राजनीतिक महत्वाकांक्षा यूपी चुनाव 2022 के दौरान ही बढ़ी थी। दावा किया जा रहा है कि उन्होंने करीबियों के लिए टिकट मांगे थे, लेकिन उनके मन का नहीं हो सका। इसके बाद 2022 में गोंडा और बलरामपुर में बाढ़ के दौरान बृजभूषण ने जमकर योगी सरकार पर हमले किए।

बृजभूषण ने योगी सरकार और अधिकारियों को कटघड़े में खड़ा किया। हालांकि, उस समय भी भाजपा या फिर सीएम योगी की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। वर्ष 2023 की शुरुआत से ही योगी सरकार की ओर से माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई। इस दरम्यान बृजभूषण भी निशाने पर आ गए। सामने से नहीं, लेकिन परिवार पर कार्रवाई हो गई। गोंडा में सरकारी जमीन पर कब्जा मामले में बृजभूषण के भाई शशिभूषण सिंह के बेटे सुमित सिंह के खिलाफ जालसाजी का केस दर्ज किया गया। इसमें 9 लोगों को नामजद बनाया गया। इसी घटना के बाद से बृजभूषण और सीएम योगी के बीच सबकुछ ठीक नहीं होने की बात सामने आ रही है।

बृजभूषण पर सामने आया 10 एफआईआर

दिल्ली पुलिस के समक्ष 10 एफआईआर का मामला सामने आया है। 10 महिला पहलवानों ने उत्पीड़न का केस दर्ज किया है। उन्होंने कहा कि बृजभूषण ने उन्हें मदद के नाम पर सेक्सुअल डिमांड की। हालांकि, इन मामलों में पुलिस की ओर से कोई गवाह पेश नहीं किए जाने की बात पिछले दिनों सामने आई। पुलिस की ओर से बृजभूषण के खिलाफ आईपीसी की धारा 354, 34 और पॉक्सो एक्ट की धारा 10 के तहत केस दर्ज किया गया है। पहलवानों ने आरोप लगाते हुए कहा कि उत्पीड़न से परेशान होकर हमने मिलकर तय किया था, अकेले खाना खाने नहीं जाएंगे।

किसानों ने दिया है पहलवानों को समर्थन

किसान संगठन ने पहलवानों को समर्थन दिया है। बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ लगे आरोपों के आधार पर कार्रवाई की मांग की जा रही है। शुक्रवार को भी महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है। इससे पहले गुरुवार को कई जिला मुख्यालयों पर किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग की। मुजफ्फरनगर में आयोजित किसान महापंचायत में किसान नेता राकेश टिकैत ने इस मुद्दे को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के समक्ष उठाने का निर्णय लिया है। वहीं, विपक्षी दलों की ओर से भी इस मुद्दे पर भाजपा को घेरा जा रहा है। अब तक समाजवादी पार्टी इस मामले में चुप दिख रही थी। लेकिन, पिछले दिनों अखिलेश यादव की ओर से भी बृजभूषण के खिलाफ कड़ी टिप्पणी सामने आई है।

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