कॉमेडी चैंपियन जय छनियारा की 17 साल बाद TV पर वापसी, गंभीर बीमारी ने शरीर से कर दिया लाचार

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कॉमेडी चैंपियन जय छनियारा की 17 साल बाद TV पर वापसी, गंभीर बीमारी ने शरीर से कर दिया लाचार

हाल ही शुरू हुआ रिएलिटी शो ‘इंडियाज लाफ्टर चैंपियन’ खूब सुर्खियां बटोर रहा है। इसकी वजह है शो में आने वाले कमाल के कंटेस्टेंट्स, जिनका हुनर हर किसी को हैरान कर रहा है। हाल ही इस कॉमेडी शो में दिव्यांग कंटेस्टेंट जय छनियारा नजर आए। जय छनियारा 6 साल की उम्र से कॉमिडी कर रहे हैं। इस शो के जरिए जय छनियारा ने करीब 17 साल बाद टीवी पर वापसी की है और वापसी करते ही उन्होंने अपनी कॉमेडी से सबके होश उड़ा दिए। जज अर्चना पूरन सिंह और शेखर सुमन का भी हंसते-हंसते बुरा हाल हो गया।

सेरेब्रल पालसी जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं जय छनियारा

जय छनियारा को बेहद कम उम्र में सेरेब्रल पालसी होने के बारे में पता चला था। उसी के बाद से जय की दुनिया बदल गई। लेकिन जय छनियारा ने बीमारी को अपने कॉमेडी के हुनर पर हावी नहीं होने दिया। जय छनियारा ने कुछ साल पहले The Great Indian Laughter Challenge से सुर्खियां बटोरी थीं। अब 17 साल बाद जय ने India’s Laughter Champion के जरिए धमाकेदार वापसी की।


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17 साल बाद जय छनियारा की टीवी पर वापसी
जय छनियारा ने इस शो के साथ-साथ अपनी कॉमेडी के बारे में हमारे सहयोगी ईटाइम्स से बात की। उन्होंने कहा कि वह भले ही फिजिकली चैलेंज्ड हैं, पर इसे वह आशीर्वाद मानते हैं। उन्होंने कहा, ‘मुझे ‘इंडियाज लाफ्टर चैलेंज’ के लिए शूट करने में बहुत मजा आ रहा है। मैं बहुत खुश हूं कि इस शो के जरिए 17 साल बाद टीवी पर वापसी कर रहा हूं। मैंने 17 साल पहले India’s Laughter Challenge किया था और मुझे एक बार फिर लोगों को हंसाने का मौका मिल रहा है। मैं इस शो को लेकर बहुत खुश हूं।’


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पुरानी तस्वीरों को देख रो पड़ते हैं जय, मम्मी-पापा उठाकर गोद में ले जाते थे

जय छनियारा ने स्टैंड-अप कॉमेडियन के तौर पर अपनी जर्नी के बारे में बात की और बताया कि वह इसे किस तरह देखते हैं। जय छनियारा ने कहा, ‘मैंने 6 साल की उम्र से स्टैंड-अप कॉमेडी करनी शुरू कर दी थी। जब मैं एल्बम में अपनी बचपन की तस्वीरें देखता हूं तो इमोशनल हो जाता हूं। उस वक्त मम्मी-पापा मुझे गोद में लेकर जाते थे और मैं कुर्सी पर बैठकर कॉमिडी करता था। उन तस्वीरों को देखकर मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं। मैं बस 4 लाइनों में अपनी जर्नी बताना चाहूंगा। वो भी क्या दिन थे। मां की गोद और पापा के कंधे। ना पैसे की सोच ना लाइफ के फंडे। ना कल की चिंता ना फ्यूचर के सपने। बस अब कल की है फिक्र और अधूरे हैं सपने। मुड़के देखा तो बहुत दूर हैं वो अपने, मंजिल को ढूंढते-ढूंढते ना जाने कहां खो गया मैं। आखिर ना जाने क्यूं इतना बड़ा हो गया मैं।’





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