कॅरियर: ड्रोन दिलाएगा बेहतर पैकेज, जॉब के साथ बिजनेस के भी कई मौके | Drone experts are in increasing demand worldwide | Patrika News

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कॅरियर: ड्रोन दिलाएगा बेहतर पैकेज, जॉब के साथ बिजनेस के भी कई मौके | Drone experts are in increasing demand worldwide | Patrika News

जानकारी के अनुसार आने वाले समय में एक लाख से अधिक ड्रोन पायलट की जरूरत होगी। देशभर में ड्रोन सर्विस की मांग को बढ़ावा देने केंद्र सरकार कोशिश कर रही है। शहर की मैपिंग के दौरान राजधानी में काम करने वाले विभु बताते हैं कि कई तरह से यहां पर काम हो रहा है। एक्सपर्ट की काफी डिमांड है। यहां तकनीक के जानकारों के लिए कई जॉब मुहैया हैं। कई मल्टीनेशनल इस पर काम कर रही हैं। डाक्यूमेंट्री, वेडिंग में इसका उपयोग हो रहा है। आपातकालीन सेवाओं में ड्रोन का उपयोग बढ़ रहा है।

ग्लोबल ड्रोन हब का टारगेट
भारत को ग्लोबल ड्रोन हब बनाने की योजना है। इंडस्ट्रियल और डिफेंस रिलेटेड सेक्टर में उपयोग बढ़ा तो नए लोगों को काम मिलेगा। योजना के तहत सर्विस सेक्टर में इसका इस्तेमाल ज्यादा होना है। ड्रोन के लेकर सरकार इस पर काम भी कर रही है। हायर सेकेन्डरी से लेकर आईटी तक जानकार जा सकते हैं यहां ड्रोन संचालन से जुड़े क्षेत्र में रोजगार पाने कक्षा बारहवीं के बाद भी जाया जा सकता है। ड्रोन पायलट के लिए कक्षा 12वीं पास युवा भी ट्रेनिंग ले सकते है। फोटोग्राफी व दूसरे क्षेत्रों में तकनीक जानकार होना जरूरी है।

संस्थान

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी

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बाम्बे फ्लाइग क्लब मुंबई

तेलंगाना स्टेट एविशन

एमआइटीएस में खुला प्रदेश का पहला ड्रोन स्कूल
जीवन को आसान बनाने के लिए विभिन्न सेक्टर में ड्रोन सेवाएं शुरू हो चुकी हैं, लेकिन ड्रोन को हैंडल करने वाले पायलट की कमी है। इस कमी को पूरा करने देशभर में ड्रोन स्कूल खोले जाने का प्लान है। एमआइटीएस ग्वालियर में प्रदेश का पहला ड्रोन स्कूल शुरू हो चुका है, जिससे ड्रोन पायलट तैयार होंगे। इसके लिए हमारा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी से एमओयू साइन हुआ है, जिसके अंतर्गत छात्रों को ड्रोन एसेम्बलिंग से लेकर ड्रोन पायलट तक की ट्रेनिंग होगी।

देश विदेश में इस पर काफी काम हो रहा
यह एक तेजी से बढ़ता सेक्टर है। ड्रोन का इस्तेमाल हर जगह बढ़ रहा है। ऐसे में तकनीकी जानकारों को यहां बेहतर अवसर हैं। खासतौर से युवाओं के लिए तो यहां पर कई जॉब की संभावनाएं बन रही हैं। भविष्य में बनने वाले मौके के मुताबिक युवाओं को खुद को तैयार करना चाहिए। यहां देश विदेश में काफी काम हो रहा है।

सिंधिया भी कह चुके हैं कि लाख ड्रोन पायलट्स की है जरूरत…
इससे पहले उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) भी कह चुके हैं कि भारत को आने वाले कुछ सालों में करीब एक लाख ड्रोन पायलटों (Drone Pilots) की जरूरत होगी। पिछले दिनों नीति आयोग की तरफ से ड्रोन स्टूडियो अनुभव से जुड़े कार्यक्रम के आयोजन के दौरान सिंधिया ने कहा कि वर्ष 2030 तक भारत दुनिया का ड्रोन हब बन सकता है।

उन्होंने कहा कि ड्रोन उद्योग में निवेश व रोजगार दोनों की भारी संभावनाएं हैं। ड्रोन निर्माण के लिए 5,000 करोड़ के निवेश की उम्मीद है जिससे 10,000 रोजगार मिल सकता है। वहीं ड्रोन से जुड़ी सेवाओं के लिए 30,000 करोड़ के उद्योग का सृजन हो सकता है।

इस दौरान सिंधिया ने कहा था कि कृषि से लेकर खनन, सुरक्षा व कई अन्य क्षेत्रों में ड्रोन का इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विभिन्न औद्योगिक क्षेत्र में ड्रोन के व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए कई पहल की गई है। किसान ड्रोन पहल से खेत में कीटनाशक के छिड़काव से लेकर फसल के अनुमान लगाने तक में मदद मिलेगी।

ड्रोन की मदद से भूमि का सही माप हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार के 12 मंत्रालय फिलहाल देश में ड्रोन सेवाओं की मांग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ 12वीं पास व्यक्ति को ड्रोन पायलट का प्रशिक्षण दिया जा सकता है। इसके लिए कालेज की डिग्री की जरूरत नहीं है।

सिंधिया ने कहा था कि ‘हम ड्रोन सेक्टर को तीन पहियों पर आगे बढ़ा रहे हैं। पहला पहिया है नीति, दूसरा प्रोत्साहन का माहौल तैयार करना और तीसरा है घरेलू मांग को बढ़ावा देना। आप देख रहे हैं कि हम कितनी तेजी से नीतियों पर अमल कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेटिव यानी पीएलआइ के जरिये ड्रोन सेक्टर में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।



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