कारोबारी, पुलिस, सरकारी अधिकारी… वीडियो कॉल पर कपड़े उतारने वालों में कई बड़े नाम, दिल्‍ली में सेक्‍सटॉर्शन की पूरी कहानी

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कारोबारी, पुलिस, सरकारी अधिकारी… वीडियो कॉल पर कपड़े उतारने वालों में कई बड़े नाम, दिल्‍ली में सेक्‍सटॉर्शन की पूरी कहानी

नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मेवात के दो लोगों को राजस्थान से गिरफ्तार किया है। दोनों पर अंतरराज्यीय सेक्‍सटॉर्शन रैकेट (Inter-state sextortion racket) चलाने का आरोप है। रैकेट में एक महिला भी शामिल है जो संभावित शिकार के साथ वीडियो चैट किया करती थी। शिकार से बातचीत में धीरे-धीरे अंतरंगता बढ़ाई जाती थी और उसे न्यूड होने के लिए कहता था। न्यूड चैट के साथ ही शिकार जाल में फंस जाता था। न्यूड वीडियो चैट को रिकॉर्ड कर रैकेट पीड़ितों को ब्लैकमेल करता था। गैंग ने कथित रूप से 200 लोगों को शिकार बनाया जिनमें कई हाई प्रोफाइल नाम शामिल हैं। गैंग ने पुलिस और सरकारी अधिकारियों के अलावा कई राज्‍यों के कारोबारियों को ब्‍लैकमेल करके वसूली की। जॉइंट कमिश्‍नर (क्राइम) धीरज कुमार के अनुसार, गैंग ने वसूली की रकम पाने के लिए 14 बैंक खातों का इस्‍तेमाल किया। इन खातों के लेन-देन की जांच की जा रही है। शुरुआती जांच बताती है कि हाल के दिनो में इन खातों में करीब 22 लाख रुपये जमा किए गए।

भरतपुर के दो शातिर हैं मास्‍टरमाइंड
कई शिकायतें मिलने के बाद, डीसीपी जॉय तिरके और इंस्‍पेक्‍टर अनिल शर्मा की टीम ने जांच शुरू की। दिल्‍ली, हरियाणा, राजस्‍थान और गुजरात तक इस नेटवर्क के निशान मिले। कुछ संदिग्‍धों को अरेस्‍ट किया जिन्‍होंने भरतपुर और अलवर के दो लोगों का नाम लिया। कथित रूप से यही दोनों पूरे गोरखधंधे की जड़ थे। कई बार छापेमारी के बावजूद, आरोपी पकड़ में नहीं आए तो दिल्‍ली पुलिस की टीम मेवात में कैंप लगाकर बैठ गई। खोजबीन में पता चला कि दोनों के नाम समयदीन और मुनफेद हैं। दोनों पर 10-10 हजार रुपये का इनाम रखा गया था। मुखबिरी के आधार पर उन्‍हें मेवात के सुभाष चौक से पकड़ा गया और दिल्‍ली लाया गया।

सेक्‍सटॉर्शन गैंग : कौन टारगेट? कैसे फंसाते थे?

  • पुलिस के अनुसार, दोनों मुख्‍य आरोपियों ने कबूला कि वे 45 से 60 साल उम्र वाले ऐसे लोगों को टारगेट करते थे जो सोशल मीडिया पर ऐक्टिव हों।
  • दोनों ने आकर्षक महिलाओं की तस्‍वीरों का इस्‍तेमाल कर कई फर्जी प्रोफाइल बनाईं फिर उन्‍हें फ्रेंड रिक्‍वेस्‍ट भेजी।
  • सोशल मीडिया पर ही बातचीत शुरू होती। कुछ दिन में दोस्‍ती के बाद वॉट्सऐप नंबर शेयर होता और सेक्‍सटिंग शुरू हो जाती।
  • इसके बाद टारगेट्स को वीडियो कॉल पर बुलाया जाता। गैंग की फीमेल मेम्‍बर्स कॉल पर अपने कपड़े उतारतीं और टारगेट से भी ऐसा ही करने को कहतीं।
  • जब टारगेट न्‍यूड हो रहा होता तो गैंग स्‍क्रीन रिकॉर्ड कर लेता था। इसके बाद उन्‍हें ब्‍लैकमेल करने का सिलसिला शुरू होता।
  • पुलिस के अनुसार, ज्‍यादातर केसेज में शिकायतकर्ताओं ने कहा कि उन्‍होंने कॉल पर कुछ नहीं किया मगर उनकी तस्‍वीरें मॉर्फ्ड की गईं। अन्‍य केसेज में कहा गया कि उन्‍हें जो वीडियोज मिले, उनसे छेड़छाड़ की गई थी।
  • टारगेट्स को धमकाया जाता कि अगर रुपये नहीं दिए तो तस्‍वीरें और वीडियो पब्लिक कर दिए जाएंगे।
  • अगर कोई एक बार पैसा दे देता तो मतलब वह बार-बार पैसा दे सकता है। नॉर्मली पेमेंट्स के लिए ई-वॉलेट्स का यूज किया जाता था।


फर्जी लोन ऐप की गुंडागर्दी, पहले मॉर्फ फोटो बनाया, अब फेक मैसेज तैयार कर बदनाम किया
देशभर में फैला था सेक्‍सटॉर्शन गैंग का जाल
गिरोह के चार सदस्यों को पहले क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि गिरोह के एक सदस्य – 42 वर्षीय नखरुद्दीन को पिछले साल अगस्त में गिरफ्तार किया गया था। बाद में जांच के दौरान तीन और लोगों जाहिद, निशात और आदित्य को गिरफ्तार किया गया। देश के सभी हिस्सों से – ज्यादातर दिल्ली/एनसीआर, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दक्षिण भारत के लोग इस गिरोह के जाल में फंस गए हैं। समयदीन और मुनफेड दोनों को बाद में अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। उन्होंने गिरोह के कई अन्य सदस्यों के नाम और विवरण का खुलासा किया है।

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