कहीं गई कुर्सी तो किसी को मिला राज… क्यों सुर्खियों में IPS अमित लोढ़ा और कांग्रेस नेता सुखजिंदर रंधावा?

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कहीं गई कुर्सी तो किसी को मिला राज… क्यों सुर्खियों में IPS अमित लोढ़ा और कांग्रेस नेता सुखजिंदर रंधावा?

बिहार में इन दिनों एक सीनियर आईपीएस अधिकारी अमित लोढ़ा (IPS Amit Lodha) चर्चा में हैं तो राजस्थान में कांग्रेस के सुखजिंदर रंधावा (Congress leader Sukhjinder Singh Randhawa)। ओटीटी सीरीज से चर्चा में आए बिहार के आईपीएस लोढ़ा पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने सरकारी नौकरी में रहते हुए अवैध तरीके से बिजनेस डील की। वहीं राजस्थान में कांग्रेस के अंदर कलह को दूर करने के लिए इस बार पार्टी ने सुखजिंदर रंधावा को जिम्मेदारी दी है। दोनों के बारे में बता रहे हैं राजेश चौधरी और मंजरी चतुर्वेदी।

गैंगवॉर के कहानीकार हैं अमित लोढ़ा

बिहार पुलिस में आईजी पद पर तैनात रहे अमित लोढ़ा (Amit Lodha) की किताब ‘बिहार डायरीज’ पर एक वेब सीरीज आई है ‘खाकी : द बिहार चैप्टर’, जो काफी चर्चित हो रही है। अमित लोढ़ा ने अपनी किताब में अपराध और राजनीति से जुड़े अपने अनुभव लिखे हैं। वेब सीरीज नेटफ्लिक्स पर चल रही है। वेब सीरीज में जो कहानी है वह बिहार में नवादा और शेखपुरा इलाके में हुई गैंगवॉर पर आधारित है। इसमें 20 साल पहले नवादा में अशोक महतो और उस दौर की गैंगवॉर दिखाई गई है। इस वेब सीरीज के बाद एक बार फिर लोढ़ा की काफी चर्चा है। कहा जा रहा है कि उन्हें कमर्शल उद्देश्य से किताब लिखने और सरकारी नौकरी में रहते हुए बिजनेस डील करने का अधिकार नहीं था। आरोप है कि कॉन्ट्रैक्ट करके पैसे बनाने में उन्होंने इस तथ्य को भी नजरअंदाज कर दिया कि वह एक सरकारी अफसर हैं। उन्हें निलंबित करते हुए उन पर भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा-7 के तहत केस दर्ज किया गया है।

अमित लोढ़ा पर क्या हैं आरोप

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बिहार स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने मगध रेंज के तत्कालीन आईजी लोढ़ा पर आरोप लगाया है कि उन्होंने सरकारी पद पर रहते हुए बिजनेस किया और अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए वित्तीय गोलमाल किया। उन्होंने नेटफ्लिक्स और फ्राइडे स्टोरी टेलर के साथ कमर्शल डील की और पत्नी कौमुदी लोढ़ा के जरिए लगभग पचास लाख रुपये अर्जित किए। इसके अलावा खुद उनके खाते में 12,372 रुपए आए। भले ही यह रकम छोटी हो, लेकिन किसी सरकारी अधिकारी के लिए इसे ग्रहण करना अपराध है। इस मामले में अंतिम रिपोर्ट अगले साल फरवरी के पहले पखवाड़े तक आनी है। अगर इस मुकदमे में लोढ़ा दोषी पाए गए तो उन्हें दस साल जेल की सजा भी हो सकती है।

दिल्ली IIT से इंजीनियरिंग… 25 साल की उम्र में बने IPS

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अमित लोढ़ा ने दिसंबर के पहले हफ्ते में एक ट्वीट करके कहा कि जिंदगी में चुनौती का कभी-कभार सामना करना होता है। उसमें उन्होंने लोगों से उस पर काबू पाने के लिए सहयोग मांगा था। 1998 बैच के आईपीएस अधिकारी अमित लोढ़ा ने 2018 में यह किताब लिखी थी। उनकी शुरुआती पढ़ाई जयपुर के सेंट जेवियर्स में हुई थी। बाद में वह आईआईटी में सिलेक्ट हुए और आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की। फिर उन्होंने यूपीएससी में हाथ आजमाया और सिर्फ 25 साल की उम्र में आईपीएस बन गए। उन्हें बिहार कैडर मिला। जब वह शेखपुरा के एसपी थे, तो उन दिनों वहां अगड़ी और पिछड़ी जातियों में गैंगवॉर चल रही थी। इसी दौरान चर्चित सांसद राजो सिंह की हत्या भी हुई थी। इस हत्या के आरोपी अशोक महतो को अमित लोढा ने 13 दिसंबर 2006 को गिरफ्तार किया था।

AAP की आंधी में भी जीते सुखजिंदर सिंह रंधावा

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राजस्थान में आपसी खींचतान से जूझती कांग्रेस ने सुखजिंदर सिंह रंधावा को प्रदेश प्रभारी बनाया है। रंधावा पंजाब की चन्नी सरकार में डेप्युटी सीएम थे। प्रभार लेने के साथ ही उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि पार्टी में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पंजाब कांग्रेस में अपना अलग कद रखने वाले रंधावा के पिता संतोख सिंह दो बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे चुके हैं। रंधावा की पृष्ठभूमि किसानी करने वाले जट सिख परिवार की है। उनका जन्म गुरदासपुर जिले की डेरा बाबा नानक साहब तहसील के धारोवाली गांव में हुआ। 63 वर्षीय रंधावा की स्कूली शिक्षा गवर्नमेंट स्कूल, चंडीगढ़ में हुई। वहां से उन्होंने मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की, फिर पंजाब यूनिवर्सिटी के एसडी कॉलेज, चंडीगढ़ से ग्रैजुएशन किया।

राजस्थान में रंधावा को बड़ी जिम्मेदारी

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रंधावा ने राजनीति में शुरुआत यूथ कांग्रेस से की। वह प्रदेश यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष रहे, बाद में प्रदेश कांग्रेस में महासचिव के तौर पर काम किया। उन्होंने अपना पहला चुनाव गुरदासपुर के फतेहगढ़ चूड़ियां से लड़ा और विधायक बने। हालांकि अगला चुनाव वह हार गए, लेकिन 2012 में अपने इलाके डेरा बाबा नानक साहब सीट से फिर जीते। तब से लगातार इस सीट से जीतते आ रहे हैं। 2022 चुनाव में आप की आंधी में भी उन्होंने जीत दर्ज की। वह चौथी बार विधायक बने हैं। किसी समय कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी माने जाने वाले रंधावा ने मुद्दों के लिए उनके खिलाफ भी आवाज उठाने में गुरेज नहीं किया। उन्होंने प्रताप सिंह बाजवा को प्रदेश चीफ के पद से हटाने की लड़ाई में कैप्टन का साथ दिया था। वह कैप्टन सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे।

पंजाब के सीएम पद की रेस में भी थे रंधावा

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कैप्टन अमरिंदर सिंह के जाने के बाद सीएम बनने की रेस में उनका नाम आगे था, लेकिन सियासी समीकरण के चलते दलित चेहरे चरणजीत सिंह चन्नी का पलड़ा भारी रहा और उन्हें चन्नी का डेप्युटी बनकर ही संतोष करना पड़ा। पंजाब की राजनीति में रंधावा अपने मुखर विचारों के लिए भी जाने जाते हैं। सतलुज-यमुना लिंक विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ जब कांग्रेस के 42 विधायकों ने इस्तीफा दिया था, तो उसमें रंधावा भी थे। एक पुराने विडियो को लेकर 2019 में वह विवादों में आए, जिसमें उन्होंने कैप्टन और बाबा नानक को लेकर बयान दिया था। विरोधियों ने इसे सिख समुदाय का अपमान बताते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। इसी तरह कोटकपुरा गोलीकांड मामले में आई एसआईटी रिपोर्ट को उन्होंने मंत्री रहते हुए खारिज कर दिया। कैप्टन से उनकी तल्खियां इस कदर बढ़ गई थीं कि अप्रैल 2021 में उन्होंने सीएम कैप्टन को अपना इस्तीफा तक दे डाला था। हालांकि कैप्टन ने इस्तीफा फाड़ दिया, लेकिन सिद्धू के साथ मिलकर कैप्टन के खिलाफ सुर बुलंद करने वालों में रंधावा भी थे।

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