कमजोर संगठन, आपसी कलह और चुनाव प्रचार को गंभीरता से नहीं लेना कांग्रेस को पड़ा भारी

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कमजोर संगठन, आपसी कलह और चुनाव प्रचार को गंभीरता से नहीं लेना कांग्रेस को पड़ा भारी

नई दिल्ली: दिल्ली की राजनीति में अपनी साख बचाने के लिए उतरी कांग्रेस के उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। निगम चुनाव में कांग्रेस न केवल तीसरे नंबर पर रही बल्कि दहाई का आंकड़ा तक नहीं छू पाई। गनीमत रही कि लोकसभा और विधानसभा की तरह पार्टी जीरो पर न रही। जैसे-तैसे पार्टी 9 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई। पिछले विधानसभा चुनाव से तुलना करें तो कांग्रेस का इस चुनाव में वोट प्रतिशत में इजाफा हुआ है। पार्टी अगर इसे पॉजिटिव रूप में ले और आपसी रंजिश भुलाकर संठगन को मजबूत करने पर जोर दे तो वो इस मौके को भुना सकती है और आगे बेहतर कर सकती है।

2017 में हुए निगम चुनाव में कांग्रेस को 30 सीटों पर जीत मिली थी और 21.09 प्रतिशत वोट मिला था। लेकिन जब 2020 के विधानसभा चुनाव वोट पर्सेंट 3 से 4 प्रतिशत के बीच सिमट गया। पार्टी एक भी सीट जीत नहीं पाई। पिछले विधानसभा चुनाव से तुलना करें तो इस निगम चुनाव में पार्टी का वोट प्रतिशत 11.68 तक पहुंचा है। इस लिहाज से पार्टी के वोट में इजाफा का संकेत जरूर मिल रहा है। लेकिन दिल्ली में अपनी राजनीतिक पैठ फिर से जमाने के लिए काफी नहीं।

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जीते गए 9 सीटों में से 7 मुस्मिल समुदाय से हैं। इन सभी नौ सीटों पर कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को हराया है। जानकरों का कहना है कि कहीं न कहीं पार्टी के लिए यह एक अच्छा संकेत हैं कि अल्पसंख्यक वोटर नए सिरे से पार्टी के साथ जुड़ रहे हैं और कहीं न कहीं उनकी वोट की वजह से ही पार्टी के वोट प्रतिशत में इजाफा हुआ है।

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लेकिन, चिंता की बात यह भी अगर दिल्ली की बाकी जनता की दूरी कांग्रेस से आगे भी इसी प्रकार बनी रही तो दिल्ली में कांग्रेस का फिर से खड़ा होना मुश्किल है। पिछले कुछ चुनावों से लगातार कांग्रेस की हो रही हार से संगठन बिखर गया है। जो पहले कांग्रेस का कोर वोटर हुआ करता था, वह अल्पसंख्यक व दलित वोटर था, अब वो पूरी तरह से आप में शिफ्ट हो गया। ऊपर से इस चुनाव में पार्टी मजबूती के साथ चुनाव लड़ते नहीं दिखी। यही नहीं, जब निगम चुनाव पीक पर था, बीजेपी और आप के स्टार प्रचारक सड़कों पर थे, ऐसा लगने लगा था कि चुनाव जोर पकड़ रहा है। लेकिन कांग्रेस प्रचार में कभी भी उठता नहीं दिखा, वोटरों को लगा ही नहीं कि पार्टी चुनाव में है, इसलिए वोटर कांग्रेस के प्रति दिलचस्पी नहीं दिखा पाए। जबकि इस बार बीजेपी और आप दोनों के खिलाफ जनता में एंटी इनकंबेंसी थी, जिसे कांग्रेस भुना नहीं पाई।

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