एमपी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस का ‘प्‍लान’, जून में प्रियंका गांधी जबलपुर में फूंकेगीं बिगुल

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एमपी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस का ‘प्‍लान’, जून में प्रियंका गांधी जबलपुर में फूंकेगीं बिगुल

एमपी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस का ‘प्‍लान’, जून में प्रियंका गांधी जबलपुर में फूंकेगीं बिगुल

जबलपुर: इस साल के अंत में होने वाले मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के प्रचार अभियान की शुरुआत पार्टी की नेता प्रियंका गांधी अगले महीने जबलपुर से करेंगी। कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। जबलपुर महाकौशल का केंद्र है, जहां बड़ी संख्या में जनजातीय आबादी है। पिछले चुनाव में जबलपुर संभाग में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 13 सीटों में से कांग्रेस ने 11 सीटों पर जीत हासिल की थी।मध्य प्रदेश में पिछला विधानसभा चुनाव 28 नवंबर 2018 को हुआ था। भाजपा शासित इस राज्य में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। जबलपुर के महापौर और कांग्रेस के नगर प्रमुख जगत बहादुर सिंह ने शनिवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि प्रियंका यहां 12 जून को पार्टी के अभियान और ‘संकल्प 2023’ की शुरुआत करेंगी। जगत बहादुर सिंह ने कहा कि कांग्रेस महासचिव जबलपुर में दो किलोमीटर का रोड शो भी करेंगी और एक रैली को संबोधित करेंगी।

महापौर ने दावा किया कि महाकौशल क्षेत्र के लोग बीजेपी से अपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने इस क्षेत्र में (पिछली बार) अच्छा प्रदर्शन किया था और इस बार भी हम इस क्षेत्र से चुनाव जीतने जा रहे हैं। यह पूछे जाने पर कि प्रियंका गांधी ने विशेष रूप से पार्टी के अभियान की शुरुआत के लिए जबलपुर को क्यों चुना, कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने कहा कि राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ इस क्षेत्र से नहीं गुजरी थी और यात्रा ने मालवा और मध्य भारत को कवर किया था। उन्होंने कहा कि महाकौशल क्षेत्र में एक रैली से पड़ोसी विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्रों में कांग्रेस को मदद मिलेगी।

राज्‍य सभा सांसद विवेक तन्खा ने बताया कि इस क्षेत्र में एक मजबूत सत्ता विरोधी भावना है जहां बड़ी संख्या में आदिवासी, पारंपरिक कांग्रेस मतदाता रहते हैं। महाकौशल या जबलपुर संभाग में – जबलपुर, कटनी, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडोरी और छिंदवाड़ा सहित आठ जिले आते हैं।

2018 में कांग्रेस ने 38 में से 24 सीटे जीती थी

साल 2018 के विधानसभा चुनावों में, कांग्रेस ने 24 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा ने क्षेत्र के 38 विधानसभा क्षेत्रों में से 13 पर जीत हासिल की थी।वहीं, एक सीट पर कांग्रेस के करीबी निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। वहीं, साल 2013 में, कांग्रेस ने इस क्षेत्र में खराब प्रदर्शन किया तथा उसने 13 सीटें हासिल की जबकि भाजपा ने 24 सीटों पर विजय दर्ज की थी और तब भगवा पार्टी राज्य में सत्ता में आई थी।

वहीं, वरिष्ठ पत्रकार मनीष गुप्ता ने कहा कि मध्यप्रदेश के छह में से कम से कम तीन संभागों में अच्छा प्रदर्शन करने वाली पार्टी सत्ता में आएगी। उन्होंने कहा, ‘‘महाकौशल में आने वाले चुनावों में अपनी सीटों को बरकरार रखना कांग्रेस के लिए एक चुनौती है।’’उन्होंने याद किया कि विंध क्षेत्र में पिछली बार भाजपा ने 24 सीटें जीती थीं जबकि कांग्रेस केवल छह सीटें ही जीत पाई थी।

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मध्य प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनाव में 230 सदस्यीय सदन में कांग्रेस 114 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी थी, जबकि भाजपा ने 109 सीट पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस ने कमलनाथ के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार बनाई थी लेकिन मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक कई विधायकों के कांग्रेस छोड़ भाजपा में चले जाने से कांग्रेस नीत सरकार गिर गई और भाजपा सत्ता में आई तथा शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हुआ।

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